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अरविंद केजरीवाल का अतिरिक्त हलफनामा: जज की निष्पक्षता पर उठाए सवाल, ‘हितों के टकराव’ का किया दावा!

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AIN NEWS 1: दिल्ली के मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने अपने मामले में एक नया मोड़ लाते हुए अदालत में एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल किया है। इस हलफनामे में उन्होंने कुछ नए तथ्यों का हवाला देते हुए संबंधित जज से खुद को मामले की सुनवाई से अलग करने (Recusal) की मांग को और मजबूत किया है। केजरीवाल का कहना है कि हाल ही में सार्वजनिक डोमेन में आई जानकारी से उन्हें ऐसे तथ्य पता चले हैं, जो इस मामले में निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

 नए तथ्यों का हवाला

केजरीवाल ने अपने हलफनामे में कहा कि 9 अप्रैल 2026 को एक कानूनी पत्रकार, सौरव दास द्वारा कुछ दस्तावेज सार्वजनिक किए गए। इन दस्तावेजों में सरकारी रिकॉर्ड और नोटिफिकेशन शामिल थे। इन तथ्यों की पुष्टि करने के बाद उन्होंने यह अतिरिक्त हलफनामा दाखिल किया है।

उनका कहना है कि ये तथ्य उनके पहले दिए गए आवेदन के बाद सामने आए हैं और ये स्वतंत्र रूप से यह दिखाते हैं कि इस मामले में हितों का टकराव (Conflict of Interest) हो सकता है।

जज के परिवार से जुड़ी जानकारी

हलफनामे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही गई है कि संबंधित जज के बेटे और बेटी दोनों ही केंद्र सरकार के लिए वकील के तौर पर पैनल में शामिल हैं।

बेटे ईशान शर्मा को सुप्रीम कोर्ट में ‘ग्रुप A पैनल काउंसल’ के रूप में नियुक्त किया गया है।

बेटी शांभवी शर्मा दिल्ली हाईकोर्ट में सरकारी वकील (Govt. Pleader) और सुप्रीम कोर्ट में ‘ग्रुप C पैनल काउंसल’ हैं।

केजरीवाल का कहना है कि ये सिर्फ नाम मात्र के पद नहीं हैं, बल्कि इनमें सरकार की ओर से केस मिलते हैं, पेशी होती है और आर्थिक लाभ भी होता है।

 केस आवंटन प्रक्रिया पर सवाल

उन्होंने केंद्र सरकार के एक नोटिफिकेशन (13 सितंबर 2022) का हवाला देते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट में मामलों का आवंटन कैसे होता है। इसके अनुसार, मामलों को पहले अटॉर्नी जनरल देखते हैं और उसके बाद सॉलिसिटर जनरल व अन्य कानून अधिकारियों के जरिए पैनल वकीलों को केस दिए जाते हैं।

इस संदर्भ में उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में Central Bureau of Investigation की ओर से सॉलिसिटर जनरल अदालत में पेश हो रहे हैं और वही अधिकारी पैनल वकीलों को केस आवंटित करने की प्रक्रिया का हिस्सा भी होते हैं।

हितों के टकराव की आशंका

केजरीवाल ने कहा कि जब एक ही सरकारी व्यवस्था के तहत जज के परिवार के सदस्य कार्य कर रहे हों और उसी व्यवस्था के प्रतिनिधि अदालत में उनके खिलाफ दलील दे रहे हों, तो यह स्थिति हितों के टकराव का आभास पैदा करती है।

उन्होंने साफ किया कि वे किसी प्रकार के व्यक्तिगत पक्षपात का आरोप नहीं लगा रहे हैं, लेकिन यह परिस्थितियां ऐसी हैं, जिनसे एक सामान्य व्यक्ति को निष्पक्षता पर संदेह हो सकता है।

RTI से सामने आए आंकड़े

हलफनामे में यह भी कहा गया है कि RTI के जरिए मिली जानकारी के अनुसार जज के बेटे को बड़ी संख्या में सरकारी केस दिए गए हैं।

2023 में: 2487 केस

2024 में: 1784 केस

2025 में: 1633 केस

केजरीवाल का कहना है कि इससे यह साबित होता है कि केंद्र सरकार के साथ यह पेशेवर संबंध लगातार और मजबूत है।

राजनीतिक संदर्भ भी अहम

उन्होंने इस पूरे मामले को सिर्फ एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामला बताया। उनका कहना है कि वे केंद्र सरकार के प्रमुख राजनीतिक विरोधी हैं और उनके खिलाफ मामला भी उसी सरकार की एजेंसी द्वारा चलाया जा रहा है।

इस संदर्भ में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की पहले की टिप्पणी का भी जिक्र किया, जिसमें Central Bureau of Investigation को “पिंजरे का तोता” कहा गया था। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में न सिर्फ न्याय होना चाहिए, बल्कि न्याय होता हुआ दिखना भी जरूरी है।

सुनवाई प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल

केजरीवाल ने सुनवाई की प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि वे खुद अदालत में पेश होकर अपनी बात रख रहे थे और 3:45 बजे के आसपास अनुमति लेकर चले गए थे।

इसके बाद:

CBI की ओर से दलीलें शाम 6:15 बजे तक चलीं

कार्यवाही 7 बजे के बाद तक जारी रही

उसी दिन मामले को समाप्त कर दिया गया

उनका कहना है कि उन्हें जवाब देने का पर्याप्त मौका नहीं मिला, जिससे उनकी निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद कमजोर हुई है।

लंबित Recusal आवेदन के दौरान आदेश

हलफनामे में यह भी कहा गया है कि जब उनका Recusal आवेदन अभी विचाराधीन था, उसी दौरान अदालत ने मुख्य मामले में कुछ आदेश भी पारित किए।

उनका मानना है कि जब तक Recusal पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक मुख्य मामले में इस तरह के आदेश नहीं दिए जाने चाहिए थे। इससे यह संकेत मिलता है कि मामला उसी बेंच के सामने जारी रहेगा।

अदालत से अपील

केजरीवाल ने अपने हलफनामे में अदालत से अनुरोध किया है कि:

इन नए तथ्यों को रिकॉर्ड में लिया जाए

उन्हें मौखिक रूप से अपनी बात रखने का मौका दिया जाए

और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जज खुद को इस मामले से अलग कर लें

उन्होंने कहा कि यह केवल न्याय की प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए जरूरी है।

Arvind Kejriwal has filed an additional affidavit in a high-profile CBI case, raising serious concerns about judicial neutrality and conflict of interest. The affidavit highlights the professional links between the judge’s family members and the Central Government, questioning the fairness of the proceedings. This politically sensitive case has intensified the debate around judicial transparency, recusal norms, and the role of institutions like the Central Bureau of Investigation in India’s legal system.

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