AIN NEWS 1: गाजियाबाद के मोदीनगर क्षेत्र में स्थित एक निजी स्कूल को लेकर धार्मिक आस्थाओं से जुड़ा विवाद सामने आया है, जिसने स्थानीय स्तर पर माहौल को काफी संवेदनशील बना दिया है। संत टेरेसा सीनियर एकेडमी नामक इस स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों और वहां कार्यरत एक शिक्षिका के आरोपों के बाद मामला तेजी से तूल पकड़ रहा है। इस पूरे प्रकरण में जहां एक ओर शिक्षिका ने गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं स्कूल प्रबंधन ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

क्या हैं शिक्षिका के आरोप?
मोदीनगर की संतपुरा कॉलोनी निवासी अरुणा गोस्वामी, जो वर्ष 2012 से स्कूल में शारीरिक शिक्षा (PTI) की शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं, ने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि स्कूल प्रबंधन छात्रों और स्टाफ पर धार्मिक दबाव बनाता है।

उनका कहना है कि:
हिंदू छात्रों के हाथों में बंधे कलावे (मौली) को जबरन काटा जाता है।
जो छात्र माथे पर तिलक लगाकर आते हैं, उन पर जुर्माना लगाया जाता है।
हर रविवार को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को बुलाकर उनका धर्म परिवर्तन कराया जाता है।
शिक्षकों को भी चर्च जाने के लिए मजबूर किया जाता है।
शिक्षिका ने यह भी दावा किया कि उनके हाथ पर “महादेव” का नाम लिखा हुआ था, जिसे हटाने के लिए स्कूल प्रबंधन की ओर से दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि तिलक लगाने पर भी उन्हें कई बार रोका गया और ऐसा न मानने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी गई।
बेटे को स्कूल से निकाले जाने का आरोप
अरुणा गोस्वामी ने अपनी शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनका बेटा भी उसी स्कूल में पढ़ता था। जब उनके बेटे ने कथित तौर पर कलावा काटने का विरोध किया, तो उसे स्कूल से निकाल दिया गया। इस घटना ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
स्कूल प्रबंधन ने आरोपों को बताया निराधार
इस पूरे मामले पर स्कूल की प्रधानाचार्य सिस्टर लूर्द ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिक्षिका द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। उनका कहना है कि:
स्कूल में किसी भी तरह का धार्मिक भेदभाव नहीं किया जाता।
शिक्षिका पहले भी विवादों में रह चुकी हैं और अभिभावकों की शिकायतें उनके खिलाफ आ चुकी हैं।
यह स्कूल की छवि को खराब करने की कोशिश है।
प्रधानाचार्य के अनुसार, संस्थान में सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है और आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है।
हिंदू संगठनों का विरोध प्रदर्शन
मामले के सामने आने के बाद स्थानीय हिंदू संगठनों ने स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने स्कूल के गेट पर “जय श्रीराम” लिख दिया और वहीं बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह धार्मिक स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन है।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और स्कूल परिसर में ही धरना जारी रहेगा।
पुलिस ने शुरू की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया है। मोदीनगर के एसीपी भास्कर वर्मा ने बताया कि शिक्षिका की शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है।
उन्होंने कहा:
छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
दोनों पक्षों से बातचीत की जा चुकी है।
जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस का कहना है कि मामले को निष्पक्ष तरीके से जांचा जाएगा और किसी भी तरह की अफवाह या भ्रामक जानकारी से बचने की अपील की गई है।
संवेदनशील माहौल, सतर्क प्रशासन
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देश में धार्मिक मुद्दों को लेकर संवेदनशीलता बढ़ी हुई है। गाजियाबाद का यह विवाद भी स्थानीय स्तर पर तनाव पैदा कर सकता है, इसलिए प्रशासन पूरी सतर्कता बरत रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में तथ्यों की पुष्टि बेहद जरूरी होती है, ताकि किसी भी समुदाय के बीच गलतफहमियां न बढ़ें।
गाजियाबाद के इस स्कूल से जुड़ा विवाद अभी शुरुआती जांच के दौर में है। एक तरफ जहां शिक्षिका ने गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं स्कूल प्रबंधन ने उन्हें पूरी तरह गलत बताया है। अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी है, जो तय करेगी कि सच्चाई क्या है।
जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।
A controversy has surfaced in a Ghaziabad-based school where a teacher has alleged forced religious conversion, removal of Hindu symbols like kalawa and tilak, and pressure on students and staff to follow specific religious practices. The Modinagar school case has drawn attention from local groups and police authorities, who have initiated an investigation. This Ghaziabad school controversy highlights concerns over religious freedom, student rights, and institutional accountability in India.


















