AIN NEWS 1 | तमिल सिनेमा के सुपरस्टार और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने रविवार को तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राजनीति में सिर्फ दो साल पुरानी पार्टी के नेता विजय ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया।
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक दिलचस्प पल तब आया जब विजय निर्धारित शपथ के अलावा कुछ और बोलने लगे। इस पर तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि अर्लेकर ने उन्हें बीच में रोकते हुए कहा कि वे केवल वही पढ़ें जो आधिकारिक रूप से लिखा गया है।
हालांकि इस छोटी सी घटना के बावजूद समारोह शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और विजय ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल ली। शपथ लेने के तुरंत बाद उन्होंने 200 यूनिट मुफ्त बिजली, महिला सुरक्षा और ड्रग्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई जैसे कई अहम फैसलों पर हस्ताक्षर किए।
पहली बार मुख्यमंत्री बने विजय

सी. जोसेफ विजय लंबे समय से तमिल सिनेमा के सबसे लोकप्रिय सितारों में गिने जाते रहे हैं। करोड़ों प्रशंसकों के बीच उनकी लोकप्रियता को देखते हुए लंबे समय से उनके राजनीति में आने की चर्चा थी।
आखिरकार विजय ने दो साल पहले तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) नाम से अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई। बहुत कम समय में पार्टी ने युवाओं, पहली बार वोट डालने वालों और शहरी वर्ग में मजबूत पकड़ बना ली।
अब विजय तमिलनाडु के 9वें मुख्यमंत्री बन गए हैं और उनके समर्थक इसे “तमिल राजनीति में नया युग” बता रहे हैं।
शपथ समारोह में क्या हुआ?

चेन्नई में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में कई बड़े नेता और राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी समारोह में शामिल हुए।
जब विजय मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे, तब उन्होंने तमिल भाषा में संविधान और राज्य के प्रति निष्ठा की शपथ ली।
लेकिन इसी दौरान उन्होंने लिखित शपथ से आगे कुछ अतिरिक्त बातें बोलनी शुरू कर दीं। इस पर राज्यपाल अर्लेकर ने उन्हें रोकते हुए कहा कि वे केवल निर्धारित शपथ ही पढ़ें।
यह पल कुछ सेकंड का था, लेकिन सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो गया।
शपथ के दौरान विजय ने क्या कहा?
शपथ लेते हुए विजय ने कहा:
“मैं सी. जोसेफ विजय भारत के संविधान के प्रति सच्ची आस्था और निष्ठा रखूंगा। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में भारत की एकता और अखंडता बनाए रखूंगा। मैं अपने विवेक और कानून के अनुसार कार्य करूंगा, किसी से नहीं डरूंगा और सभी लोगों के साथ न्याय करूंगा।”
उनके इस बयान को समर्थक “जनता केंद्रित राजनीति” का संदेश बता रहे हैं।
CM बनते ही लिए बड़े फैसले

मुख्यमंत्री पद संभालते ही विजय तुरंत एक्शन मोड में नजर आए। शपथ के तुरंत बाद उन्होंने सरकारी दस्तावेजों के पहले सेट पर हस्ताक्षर किए।
इन फैसलों में शामिल हैं:
1. 200 यूनिट मुफ्त बिजली
राज्य के घरेलू उपभोक्ताओं को हर महीने 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का फैसला लिया गया। इससे मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
2. महिला सुरक्षा पर सख्ती
महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए विशेष सुरक्षा सेल बनाने और फास्ट ट्रैक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
3. ड्रग्स के खिलाफ अभियान
राज्य में बढ़ते नशे के मामलों पर रोक लगाने के लिए विशेष टास्क फोर्स बनाने का आदेश दिया गया।
4. प्रशासनिक सुधार
विजय ने अधिकारियों को “पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन” देने का निर्देश दिया।
विजय के साथ किन मंत्रियों ने ली शपथ?
मुख्यमंत्री विजय के साथ 9 अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ली। इनमें शामिल हैं:
- एन आनंद
- आधव अर्जुन
- डॉ. केजी अरुणराज
- केए सेंगोट्टैयन
- पी वेंकटरमणन
- आर निर्मलकुमार
- राजमोहन
- डॉ. टीके प्रभु
- सेल्वी एस कीर्तना
ये सभी विधायक विजय की पार्टी TVK से हैं।
दिलचस्प बात यह है कि फिलहाल सहयोगी दलों के किसी भी विधायक को मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई है।
कैसे बनी विजय की सरकार?
तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं और बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है।
TVK ने अपने पहले ही चुनाव में 108 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया। इसके बाद कांग्रेस, CPI, CPM, VCK और IUML जैसे दलों ने विजय को समर्थन दिया।
इन सहयोगी दलों के समर्थन के बाद विजय के पास कुल 121 विधायकों का आंकड़ा पहुंच गया, जो बहुमत से ज्यादा है।
राज्यपाल से चौथी मुलाकात के बाद मिला न्योता
सरकार गठन से पहले विजय शनिवार को चौथी बार राज्यपाल से मिलने पहुंचे थे।
उन्होंने राज्यपाल अर्लेकर को 121 विधायकों के समर्थन पत्र सौंपे। इसके बाद राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने का आधिकारिक न्योता दिया।
इस मुलाकात के बाद ही साफ हो गया था कि विजय तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव
विजय का मुख्यमंत्री बनना तमिलनाडु की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है।
दरअसल, 1967 के बाद पहली बार किसी गैर-द्रविड़ दल का नेता तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बना है।
1967 के बाद से राज्य की राजनीति पर DMK और AIADMK जैसी द्रविड़ पार्टियों का दबदबा रहा है।
इससे पहले 1963 से 1967 तक कांग्रेस नेता एम. भक्तवत्सलम मुख्यमंत्री रहे थे। उसके बाद से राज्य में द्रविड़ राजनीति का दौर शुरू हुआ, जो अब तक जारी था।
फिल्मी लोकप्रियता ने दिलाई राजनीतिक ताकत
विशेषज्ञ मानते हैं कि विजय की सबसे बड़ी ताकत उनकी फिल्मी लोकप्रियता रही।
तमिलनाडु में सिनेमा और राजनीति का गहरा संबंध रहा है। एमजी रामचंद्रन, जयललिता और करुणानिधि जैसे नेता भी फिल्म जगत से जुड़े रहे हैं।
विजय ने अपने फिल्मों के जरिए युवाओं और गरीब वर्ग में मजबूत पहचान बनाई। यही लोकप्रियता चुनावों में वोटों में बदल गई।
युवा वोटरों ने निभाई बड़ी भूमिका
TVK की जीत में युवा मतदाताओं की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।
विजय ने चुनाव प्रचार के दौरान:
- बेरोजगारी
- शिक्षा
- भ्रष्टाचार
- ड्रग्स
- महिला सुरक्षा
जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
सोशल मीडिया पर भी उनकी पार्टी बेहद सक्रिय रही, जिससे पहली बार वोट डालने वाले युवाओं का बड़ा समर्थन मिला।
विपक्ष की क्या प्रतिक्रिया?
विजय के मुख्यमंत्री बनने पर विपक्षी दलों ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी है।
कुछ नेताओं ने इसे “लोकतंत्र की ताकत” बताया, जबकि कुछ ने कहा कि असली परीक्षा अब शासन चलाने की होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विजय को अब अपनी स्टार इमेज से आगे बढ़कर प्रशासनिक क्षमता साबित करनी होगी।
क्या विजय बदल पाएंगे तमिलनाडु की राजनीति?
विजय के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं:
- बेरोजगारी
- उद्योग निवेश
- कानून व्यवस्था
- जल संकट
- शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार
हालांकि उनके समर्थकों को उम्मीद है कि विजय “नई राजनीति” की शुरुआत करेंगे।
सोशल मीडिया पर छाए विजय
शपथ समारोह के बाद सोशल Media पर विजय लगातार ट्रेंड करते रहे।
उनके समर्थकों ने:
- #CMVijay
- #TVKGovernment
- #ThalapathyVijay
जैसे हैशटैग चलाए।
वहीं शपथ के दौरान राज्यपाल द्वारा टोके जाने वाला वीडियो भी तेजी से वायरल हुआ।
आगे क्या?
अब सभी की नजर विजय सरकार के अगले कदमों पर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती फैसले यह तय करेंगे कि विजय सिर्फ एक लोकप्रिय चेहरा हैं या वास्तव में लंबे समय तक राजनीति में प्रभाव छोड़ने वाले नेता साबित होंगे।
फिलहाल इतना तय है कि तमिलनाडु की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है, और फिल्मी दुनिया से निकले विजय अब राज्य की सत्ता की सबसे बड़ी कुर्सी तक पहुंच चुके हैं।


















