अमेरिका-ईरान तनाव के बीच भारत पर बढ़ता दबाव
AIN NEWS 1: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल आ रहा है और इसका सीधा असर भारत जैसे उन देशों पर पड़ रहा है, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करते हैं। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से कई अहम अपीलें की हैं।
तेलंगाना में करीब 9,400 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश को इस समय आर्थिक अनुशासन और जिम्मेदारी दिखाने की जरूरत है। उन्होंने लोगों से पेट्रोल-डीजल की बचत करने, विदेश यात्राएं कम करने और एक साल तक सोना न खरीदने जैसी अपील की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास बड़े तेल भंडार नहीं हैं और देश अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल बाहर से खरीदता है। ऐसे में अगर वैश्विक संकट और गहराता है तो इसका असर सीधे आम जनता की जेब पर पड़ेगा।
पीएम मोदी ने क्या-क्या अपील की?
प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से कहा कि आने वाला समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसलिए अभी से सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने लोगों को कई सुझाव दिए ताकि देश पर आर्थिक दबाव कम किया जा सके।
1. पेट्रोल-डीजल का सीमित उपयोग करें
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोग जहां संभव हो वहां निजी गाड़ियों का कम इस्तेमाल करें। कार पूलिंग अपनाएं और मेट्रो या सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा उपयोग करें। उन्होंने कहा कि ईंधन की बचत करना अब केवल निजी जरूरत नहीं बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी बन चुकी है।
2. वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग्स बढ़ाएं
मोदी ने कोरोना काल का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे महामारी के दौरान ऑनलाइन काम और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का इस्तेमाल बढ़ा था, वैसे ही जरूरत पड़ने पर फिर से उसी व्यवस्था को अपनाना चाहिए। इससे ईंधन की खपत कम होगी और ट्रैफिक भी घटेगा।
3. एक साल तक सोना न खरीदने की अपील
प्रधानमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि घर में शादी या अन्य कार्यक्रम होने पर भी फिलहाल सोने के गहनों की खरीदारी टालें। उन्होंने कहा कि भारत को सोना डॉलर में खरीदना पड़ता है और इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है।
4. विदेश यात्राओं में कटौती करें
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोग अगले एक साल तक विदेश घूमने या डेस्टिनेशन वेडिंग जैसी चीजों से बचें। इससे देश का पैसा बाहर जाने से रुकेगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
5. खाने के तेल और फर्टिलाइजर का कम इस्तेमाल
उन्होंने कहा कि हर परिवार खाने में तेल की मात्रा कम करे। इससे स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा और आयात पर निर्भरता भी घटेगी। किसानों से भी रासायनिक खाद का इस्तेमाल कम करने की अपील की गई।
भारत पर कितना आर्थिक दबाव?
प्रधानमंत्री की अपील के पीछे सबसे बड़ी वजह देश का बढ़ता आयात खर्च है। वर्तमान में भारत को तेल, सोना, विदेश यात्राओं और फर्टिलाइजर पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ रही है।
कच्चे तेल पर सबसे ज्यादा खर्च
भारत अपनी जरूरत का लगभग 70 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। बीते वित्त वर्ष में तेल आयात पर करीब 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए। अब युद्ध के कारण तेल की कीमतें लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं, जिससे यह खर्च और बढ़ सकता है।
सोने का आयात बढ़ा
भारत में सोने की मांग लगातार बढ़ रही है। बीते वर्षों में सोने के आयात पर लाखों करोड़ रुपये खर्च हुए। खास बात यह है कि अब लोग निवेश के लिए भी बड़ी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं।
विदेश यात्राओं पर रिकॉर्ड खर्च
भारतीयों द्वारा विदेश घूमने और शादी समारोहों में खर्च किए जाने वाले पैसों में भी तेजी आई है। पिछले कुछ वर्षों में विदेश यात्राओं पर होने वाला खर्च कई लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
फर्टिलाइजर संकट की आशंका
भारत बड़ी मात्रा में फर्टिलाइजर आयात करता है और इसका एक बड़ा हिस्सा उन क्षेत्रों से आता है जो युद्ध के असर में हैं। इससे खाद की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
दुनिया के कई देशों में बढ़ चुका है असर
अमेरिका-ईरान तनाव का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है। कई देशों में ईंधन संकट गहराने लगा है।
अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में तेजी आई है।
पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल के दाम काफी बढ़ चुके हैं।
ब्रिटेन में डीजल और गैस महंगी हो गई है।
दक्षिण कोरिया में बिजली और ईंधन बचाने के लिए सरकारी स्तर पर कई प्रतिबंध लगाए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चला तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर और गंभीर असर पड़ सकता है।
ईरान के सामने भी बड़ी चुनौती
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी प्रतिबंधों और समुद्री नाकाबंदी के कारण ईरान का तेल निर्यात प्रभावित हुआ है। कई ऑयल टैंकर समुद्री रास्तों में फंसे हुए हैं। हालात ऐसे हैं कि ईरान के स्टोरेज टैंक भर चुके हैं और उसे रोजाना भारी मात्रा में तेल का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि तेल के कुओं से उत्पादन पूरी तरह रोकना आसान नहीं होता। अगर लंबे समय तक उत्पादन बंद किया जाए तो कुओं को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार को आर्थिक संकट से निपटने के लिए ठोस नीतियां बनानी चाहिए, न कि आम लोगों पर बोझ डालना चाहिए।
विपक्ष का आरोप है कि महंगाई पहले से ही आम जनता की कमर तोड़ रही है और अब लोगों से रोजमर्रा की जरूरतों में कटौती करने की अपील की जा रही है।
क्या आम जनता पर बढ़ेगा असर?
अगर वैश्विक तेल संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो आने वाले समय में भारत में भी पेट्रोल, डीजल, गैस और जरूरी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। क्योंकि तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ता है और उसका असर लगभग हर सेक्टर पर पड़ता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि फिलहाल सरकार और जनता दोनों को मिलकर ईंधन बचत और आर्थिक अनुशासन पर ध्यान देना होगा ताकि संकट का असर कम किया जा सके।
अमेरिका-ईरान युद्ध ने वैश्विक बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। प्रधानमंत्री मोदी की अपील का मकसद लोगों को आने वाले संभावित आर्थिक दबाव के प्रति जागरूक करना है। अब देखने वाली बात होगी कि लोग इन सुझावों को कितना अपनाते हैं और सरकार भविष्य में स्थिति से निपटने के लिए कौन-कौन से कदम उठाती है।
Prime Minister Narendra Modi has urged Indian citizens to reduce fuel consumption, avoid gold purchases, limit foreign travel, and adopt work-from-home practices amid the growing US-Iran war and global oil crisis. Rising crude oil prices and increasing pressure on India’s oil imports have raised concerns about inflation, foreign exchange reserves, and economic stability. The ongoing geopolitical tension between the United States and Iran is affecting fuel prices worldwide, making energy conservation and economic discipline crucial for India.


















