मई-जून में उत्तर भारत क्यों झुलसने लगता है? जानिए भीषण गर्मी और उमस के पीछे का पूरा विज्ञान
AIN NEWS 1: हर साल मई का आखिरी सप्ताह और जून की शुरुआत आते ही उत्तर भारत मानो आग की भट्ठी में बदल जाता है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। दिनभर तपती धूप, गर्म हवाएं और रात में भी न कम होने वाली गर्मी लोगों का जीना मुश्किल कर देती है।
कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर हर साल इसी समय इतनी भयंकर गर्मी क्यों पड़ती है? क्या इसके पीछे सिर्फ सूरज जिम्मेदार है या फिर धरती, मौसम और वातावरण में भी कुछ खास बदलाव होते हैं?
वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर भारत की यह भीषण गर्मी कई खगोलीय, मौसमी और भूगर्भीय कारणों का परिणाम होती है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर मई-जून में उत्तर भारत इतना गर्म क्यों हो जाता है।
1. सूरज की किरणें सीधे पड़ने लगती हैं
गर्मी बढ़ने का सबसे बड़ा कारण पृथ्वी की स्थिति और सूरज की सीधी किरणें हैं। मई और जून के दौरान सूर्य कर्क रेखा की ओर बढ़ता है। इस समय उत्तर भारत में सूरज की किरणें लगभग सीधी पड़ती हैं, जिससे धरती तेजी से गर्म होने लगती है।
जब सूर्य की किरणें सीधे जमीन पर पड़ती हैं तो जमीन ज्यादा गर्म होती है और तापमान तेजी से बढ़ता है। यही वजह है कि दोपहर के समय बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।
2. राजस्थान का रेगिस्तान बनता है हीटवेव का केंद्र
उत्तर भारत की गर्मी में राजस्थान के थार रेगिस्तान की बड़ी भूमिका होती है। गर्मियों के दौरान रेगिस्तान की रेत बहुत तेजी से गर्म हो जाती है। यहां कम नमी होने के कारण तापमान बेहद अधिक पहुंच जाता है।
इसके बाद पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी हवाएं इस गर्मी को लेकर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश तक पहुंचती हैं। इन्हीं गर्म और शुष्क हवाओं को “लू” कहा जाता है।
लू चलने के दौरान शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि मौसम विभाग बार-बार दोपहर में बाहर न निकलने की चेतावनी देता है।
3. मानसून आने से पहले बढ़ती है उमस
मई के आखिर और जून की शुरुआत में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी वाली हवाएं भारत की ओर बढ़ने लगती हैं। लेकिन इस समय तक मानसून पूरी तरह उत्तर भारत में नहीं पहुंचता।
ऐसे में वातावरण में नमी बढ़ जाती है, लेकिन बारिश नहीं होती। परिणामस्वरूप उमस महसूस होने लगती है। यही वजह है कि कई बार तापमान थोड़ा कम होने के बावजूद गर्मी ज्यादा परेशान करती है।
उमस बढ़ने से शरीर का पसीना जल्दी नहीं सूखता और शरीर को ठंडक नहीं मिल पाती। इससे बेचैनी और थकान बढ़ जाती है।
4. शहरों में “हीट आइलैंड इफेक्ट” बढ़ा रहा तापमान
दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ और जयपुर जैसे बड़े शहरों में कंक्रीट की इमारतें, सीमेंट की सड़कें और वाहनों से निकलने वाली गर्मी तापमान को और बढ़ा देती है।
वैज्ञानिक इसे “अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट” कहते हैं। शहरों में पेड़ों की कमी और अत्यधिक निर्माण कार्य के कारण गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। रात में भी सड़कें और इमारतें गर्म रहती हैं, जिससे तापमान सामान्य से ज्यादा बना रहता है।
यही वजह है कि गांवों की तुलना में शहरों में गर्मी अधिक महसूस होती है।
5. पश्चिमी विक्षोभ की कमी भी बढ़ाती है गर्मी
सर्दियों और वसंत ऋतु में पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में बारिश और ठंडी हवाएं लाते हैं। लेकिन मई-जून में इनकी गतिविधि काफी कम हो जाती है।
जब बारिश नहीं होती और आसमान साफ रहता है, तब सूरज की गर्मी लगातार धरती पर पड़ती रहती है। इससे तापमान तेजी से बढ़ जाता है।
यदि इस दौरान कुछ दिनों तक बादल या हल्की बारिश हो जाए तो गर्मी से थोड़ी राहत मिलती है।
6. जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई समस्या
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में गर्मी पहले से अधिक खतरनाक होती जा रही है।
अब हीटवेव पहले की तुलना में ज्यादा लंबे समय तक चलती है। कई शहरों में तापमान नए रिकॉर्ड बना रहा है। वैज्ञानिक चेतावनी दे चुके हैं कि यदि प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन कम नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
विश्व मौसम संगठन और कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार पृथ्वी का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है।
7. शरीर पर पड़ता है गंभीर असर
45 डिग्री से अधिक तापमान इंसानों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। ज्यादा गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक, चक्कर आना, कमजोरी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को सबसे ज्यादा खतरा होता है। डॉक्टर गर्मियों में ज्यादा पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और दोपहर में धूप से बचने की सलाह देते हैं।
8. आने वाले वर्षों में और बढ़ सकती है गर्मी
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यदि पर्यावरण संरक्षण पर गंभीर कदम नहीं उठाए गए तो उत्तर भारत में गर्मी और ज्यादा खतरनाक हो सकती है।
पेड़ों की कटाई, बढ़ता प्रदूषण, कंक्रीट के शहर और ग्लोबल वार्मिंग भविष्य में तापमान को और बढ़ा सकते हैं। इसलिए पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और हरियाली बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है।
कैसे बचें भीषण गर्मी से?
दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें
ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं
हल्के और सूती कपड़े पहनें
खाली पेट बाहर न जाएं
बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें
घर में पौधे लगाएं और आसपास हरियाली बढ़ाएं
जरूरत पड़ने पर ORS और नींबू पानी का सेवन करें
उत्तर भारत में मई और जून की भीषण गर्मी कोई अचानक होने वाली घटना नहीं है। इसके पीछे सूर्य की स्थिति, रेगिस्तानी हवाएं, मानसून से पहले की नमी, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन जैसे कई वैज्ञानिक कारण जिम्मेदार हैं।
हालांकि प्रकृति के इन बदलावों को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन सही तैयारी, पर्यावरण संरक्षण और सावधानी बरतकर इसके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
North India experiences severe heatwaves and extremely high temperatures during May and June due to a combination of geographical, climatic, and astronomical factors. The intense sunlight, dry desert winds from Rajasthan, delayed monsoon, urban heat islands, and climate change contribute to temperatures reaching up to 48°C in cities across Delhi, Uttar Pradesh, Rajasthan, Haryana, and Madhya Pradesh. Scientists believe that global warming is making Indian summers hotter and longer, increasing the frequency of heatwave conditions and humidity across the region.


















