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भारत–यूएई रिश्तों में संस्कृति की मिठास: यूएई शाही परिवार को दिए गए भारत के खास पारंपरिक उपहार!

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AIN NEWS 1: भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच लगातार मजबूत होते रिश्तों के बीच भारतीय परंपरा, कला और कृषि विरासत की एक अनूठी झलक देखने को मिली। यूएई के क्राउन प्रिंस और शाही परिवार के लिए भारत की ओर से ऐसे विशेष उपहार चुने गए, जो न केवल भारतीय संस्कृति की पहचान हैं बल्कि देश की विविधता, शिल्पकला और पारंपरिक विरासत को भी दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं।

इन उपहारों में बिहार का प्रसिद्ध मिथिला मखाना, तेलंगाना की करीमनगर फिलिग्री कला, मध्य प्रदेश की महेश्वरी सिल्क और मणिपुर का ऐतिहासिक चाक-हाओ ब्लैक राइस शामिल हैं। हर उपहार अपने भीतर भारत की सदियों पुरानी परंपरा, स्थानीय कारीगरों की मेहनत और सांस्कृतिक गौरव की कहानी समेटे हुए है।

यूएई क्राउन प्रिंस को भेंट किया गया मिथिला मखाना

बिहार के मिथिला क्षेत्र में उगाया जाने वाला “मिथिला मखाना” भारत की सबसे खास कृषि उपजों में गिना जाता है। इसे फॉक्स नट या कमल बीज के नाम से भी जाना जाता है। अपनी गुणवत्ता और विशिष्ट पहचान के कारण इसे GI टैग भी प्राप्त है।

मिथिला क्षेत्र के तालाबों और मीठे पानी वाले जलाशयों में उगने वाला यह मखाना हल्का, कुरकुरा और बेहद पौष्टिक माना जाता है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, एंटीऑक्सीडेंट और कई जरूरी मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसे हेल्दी स्नैक के रूप में दुनियाभर में लोकप्रियता मिल रही है।

भारतीय संस्कृति में मखाने का धार्मिक महत्व भी है। पूजा-पाठ, व्रत और पारंपरिक व्यंजनों में इसका विशेष उपयोग होता है। यूएई के क्राउन प्रिंस को मिथिला मखाना भेंट करना सिर्फ एक कृषि उत्पाद देना नहीं था, बल्कि यह भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक खेती और पारंपरिक खानपान की पहचान को सम्मान देने जैसा कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के उपहार वैश्विक मंच पर भारत के स्थानीय उत्पादों और किसानों को नई पहचान दिलाने में मदद करते हैं।

यूएई क्वीन मदर को दिया गया करीमनगर फिलिग्री बॉक्स

तेलंगाना के करीमनगर की मशहूर फिलिग्री कला भारतीय धातु शिल्प की सबसे बारीक और आकर्षक कलाओं में से एक मानी जाती है। यूएई की क्वीन मदर को उपहार में दिया गया यह चांदी का सजावटी बॉक्स इसी पारंपरिक नक्काशी कला का शानदार उदाहरण है।

इस कलाकृति को तैयार करने में कारीगर चांदी की पतली शीट पर हाथ से बेहद महीन डिजाइन उकेरते हैं। इस प्रक्रिया को “रेपुसे तकनीक” कहा जाता है, जिसमें हथौड़े और विशेष उपकरणों की मदद से धातु पर उभरी हुई आकृतियां बनाई जाती हैं।

इस खास बॉक्स पर हाथी और शाही जुलूस की आकृतियां बनाई गई हैं। भारतीय संस्कृति में हाथी को सम्मान, शक्ति और राजसी गरिमा का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि यह कलाकृति केवल एक सजावटी वस्तु नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास और परंपरा का जीवंत प्रतीक बन जाती है।

करीमनगर फिलिग्री कला सदियों पुरानी विरासत है, जिसे आज भी स्थानीय कारीगर जीवित रखे हुए हैं। ऐसे उपहार भारत और यूएई के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव और पारंपरिक मूल्यों के प्रति सम्मान को दर्शाते हैं।

महेश्वरी सिल्क: भारतीय हथकरघा परंपरा की पहचान

मध्य प्रदेश के महेश्वर शहर में तैयार होने वाली महेश्वरी सिल्क भारत की सबसे खूबसूरत और प्रसिद्ध हैंडलूम परंपराओं में शामिल है। यह कपड़ा अपनी हल्की बनावट, चमकदार लुक और शाही डिजाइन के लिए दुनियाभर में जाना जाता है।

महेश्वरी सिल्क का इतिहास 18वीं शताब्दी से जुड़ा है। कहा जाता है कि देवी अहिल्याबाई होल्कर ने महेश्वर को कला, संस्कृति और हथकरघा उद्योग का प्रमुख केंद्र बनाया था। उनके प्रयासों से यहां की बुनाई कला को नई पहचान मिली।

महेश्वरी सिल्क की सबसे खास बात इसका सिल्क और कॉटन का मिश्रण है। इसमें रेशम की चमक और सूती कपड़े की आरामदायक गुणवत्ता दोनों देखने को मिलती हैं। इसकी बॉर्डर डिजाइन, जिसे “बुगड़ी” कहा जाता है, दोनों तरफ से पहनी जा सकती है।

यूएई की क्वीन मदर को यह खास फैब्रिक भेंट करना भारतीय महिला नेतृत्व, हस्तशिल्प परंपरा और स्थानीय बुनकरों की कला को सम्मान देने का प्रतीक माना जा रहा है।

मणिपुर का चाक-हाओ ब्लैक राइस भी बना खास उपहार

भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर का “चाक-हाओ राइस” या ब्लैक राइस अपनी अनूठी खुशबू, स्वाद और पोषण के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो रहा है। इसे मणिपुर का “रॉयल राइस” भी कहा जाता है।

इतिहासकारों के अनुसार, प्राचीन समय में यह चावल केवल राजघरानों और विशेष समारोहों के लिए इस्तेमाल किया जाता था। इसकी गहरी बैंगनी रंगत और खास सुगंध इसे दूसरे चावलों से अलग बनाती है।

चाक-हाओ राइस में फाइबर, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसे दिल की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है और यह शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करता है।

आज दुनिया भर में हेल्दी और ऑर्गेनिक फूड की बढ़ती मांग के बीच यह चावल भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र की पहचान बनता जा रहा है। यूएई शाही परिवार को इसे उपहार स्वरूप देना भारत की जैविक खेती और पारंपरिक खाद्य विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने जैसा माना जा रहा है।

भारत की सांस्कृतिक ताकत का प्रतीक बने ये उपहार

विशेषज्ञों का मानना है कि कूटनीतिक रिश्तों में उपहार केवल औपचारिकता नहीं होते, बल्कि वे देशों की संस्कृति, इतिहास और मूल्यों का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। भारत द्वारा यूएई शाही परिवार को दिए गए ये उपहार देश की विविधता, पारंपरिक कला, किसानों और कारीगरों की मेहनत का प्रतीक हैं।

इन उपहारों के जरिए भारत ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि आधुनिक विकास के साथ-साथ देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों और स्थानीय परंपराओं को भी उतना ही महत्व देता है।

भारत और यूएई के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। ऐसे में भारतीय विरासत से जुड़े इन खास उपहारों ने दोनों देशों के रिश्तों में सांस्कृतिक गर्मजोशी और विश्वास को और गहरा करने का काम किया है।

India showcased its rich cultural heritage and traditional craftsmanship by presenting unique gifts such as Mithila Makhana, Karimnagar Filigree box, Maheshwari Silk fabric, and Chak Hao Black Rice to the UAE royal family. These iconic Indian products represent centuries-old traditions, GI-tagged specialties, sustainable craftsmanship, and the deepening diplomatic and cultural ties between India and the United Arab Emirates.

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