AIN NEWS 1: उत्तराखंड में इस समय पर्यटन सीजन अपने पूरे शबाब पर है। पहाड़ों की खूबसूरती देखने और चारधाम यात्रा पर जाने के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं। देहरादून, नैनीताल, मसूरी, हरिद्वार, ऋषिकेश और चारधाम मार्गों पर भारी भीड़ देखने को मिल रही है। लेकिन इस बार यात्रा पर निकले लोगों को सिर्फ लंबा सफर और भीड़ ही नहीं, बल्कि बढ़ती महंगाई की भी बड़ी मार झेलनी पड़ रही है।
पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने पहले ही आम लोगों का बजट बिगाड़ रखा है। अब पर्यटन सीजन शुरू होते ही होटल, टैक्सी और अन्य सेवाओं के दामों में अचानक बढ़ोतरी ने यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यात्रा का खर्च पहले के मुकाबले काफी ज्यादा हो गया है और कई जगहों पर मनमानी वसूली भी की जा रही है।
होटल और टैक्सी किराए में भारी बढ़ोतरी
पर्यटन सीजन शुरू होते ही उत्तराखंड के कई पर्यटन स्थलों पर होटल व्यवसायियों ने अपने कमरे के किराए बढ़ा दिए हैं। जो होटल ऑफ सीजन में 1500 से 2000 रुपये में मिल जाते थे, वही अब 4000 से 6000 रुपये तक पहुंच गए हैं। खासकर चारधाम यात्रा मार्गों पर स्थिति और ज्यादा गंभीर बताई जा रही है।
यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ जाने वाले यात्रियों का कहना है कि उन्हें सामान्य सुविधाओं वाले होटल और लॉज भी काफी महंगे मिल रहे हैं। कई जगहों पर एडवांस बुकिंग के बावजूद यात्रियों से अतिरिक्त पैसे मांगे जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
सिर्फ होटल ही नहीं, टैक्सी और स्थानीय परिवहन सेवाओं के किराए भी बढ़ गए हैं। देहरादून से मसूरी, ऋषिकेश से बद्रीनाथ और हरिद्वार से केदारनाथ तक टैक्सी किराए में काफी उछाल देखा गया है। कुछ यात्रियों का आरोप है कि पर्यटन सीजन का फायदा उठाकर मनमाने रेट वसूले जा रहे हैं।
पेट्रोल-डीजल के दामों ने बढ़ाई मुश्किल
डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधा यात्रा खर्च पर पड़ रहा है। टैक्सी चालक और टूर ऑपरेटर इसका हवाला देकर किराया बढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि ईंधन महंगा होने से गाड़ियों का संचालन खर्च बढ़ गया है, इसलिए किराया बढ़ाना मजबूरी बन गया है।
हालांकि, यात्रियों का कहना है कि बढ़े हुए किराए का कोई निश्चित मानक नजर नहीं आता। अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग रेट वसूले जा रहे हैं। इससे बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों को ज्यादा परेशानी हो रही है क्योंकि उन्हें स्थानीय दरों की जानकारी नहीं होती।
चारधाम यात्रा में उमड़ रही भारी भीड़
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा लगातार जारी है और हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को संभालने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन बढ़ती भीड़ के कारण कई जगहों पर जाम और अव्यवस्था भी देखने को मिल रही है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि यात्रा के दौरान खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़ गए हैं। कई ढाबों और दुकानों पर सामान्य वस्तुएं भी महंगे दामों पर बेची जा रही हैं। इससे मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
पर्यटकों ने सरकार से की हस्तक्षेप की मांग
कई यात्रियों और स्थानीय लोगों ने सरकार से पर्यटन सीजन में रेट नियंत्रण की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निगरानी नहीं की गई तो उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों की संख्या पर भी असर पड़ सकता है।
कुछ सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से होटल और टैक्सी किरायों की जांच कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और यदि पर्यटक खुद को ठगा हुआ महसूस करेंगे तो इसका सीधा असर राज्य की छवि पर पड़ेगा।
कारोबारियों ने भी रखी अपनी बात
वहीं होटल और टैक्सी कारोबारियों का कहना है कि सीजन के दौरान मांग बढ़ने पर खर्च भी बढ़ जाते हैं। कर्मचारियों की व्यवस्था, बिजली-पानी, ईंधन और अन्य सुविधाओं का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में किराए में थोड़ी बढ़ोतरी जरूरी हो जाती है।
हालांकि, कारोबारियों का एक वर्ग यह भी मानता है कि कुछ लोग जरूरत से ज्यादा दाम वसूलकर पूरे पर्यटन उद्योग की छवि खराब कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को तय रेट और निगरानी व्यवस्था लागू करनी चाहिए ताकि पर्यटकों और कारोबारियों दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।
सरकार और प्रशासन पर उठ रहे सवाल
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर पर्यटन सीजन में बढ़ती महंगाई और मनमाने किरायों की जिम्मेदारी किसकी है। क्या प्रशासन को पहले से तैयारी करनी चाहिए थी? क्या रेट कंट्रोल के लिए सख्त नियम लागू किए जाने चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे पर्यटन आधारित राज्य में पारदर्शी व्यवस्था बेहद जरूरी है। यदि होटल, टैक्सी और अन्य सेवाओं के लिए मानक दरें तय की जाएं और उनकी नियमित निगरानी हो तो यात्रियों को राहत मिल सकती है।
आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है भीड़
बकरीद, गर्मी की छुट्टियों और आगामी वीकेंड्स को देखते हुए आने वाले दिनों में उत्तराखंड में पर्यटकों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती और बड़ी हो जाएगी।
यदि समय रहते महंगाई और अव्यवस्था पर नियंत्रण नहीं किया गया तो श्रद्धालुओं और पर्यटकों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। फिलहाल लोग भगवान के दर्शन और पहाड़ों की खूबसूरती का आनंद लेने तो पहुंच रहे हैं, लेकिन बढ़ते खर्च ने उनकी यात्रा को काफी महंगा बना दिया है।
Uttarakhand tourism season 2026 has witnessed a massive surge in travelers and Char Dham Yatra pilgrims, but rising hotel prices, expensive taxi fares, and increasing fuel costs are creating major problems for tourists. Popular destinations like Dehradun, Kedarnath, Badrinath, Haridwar, Rishikesh, and Mussoorie are seeing heavy crowds along with inflation-related travel challenges. Pilgrims and tourists are demanding government intervention to control hotel tariffs and transportation charges during the peak tourism season.


















