AIN NEWS 1: राजस्थान पुलिस ने नकली भारतीय मुद्रा के कारोबार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो हरियाणा में बैठकर 500 रुपये के नकली नोट छाप रहा था और उन्हें राजस्थान सहित अन्य राज्यों में खपा रहा था। दौसा पुलिस की जांच में सामने आए इस मामले ने सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया है।
पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान 24 लाख 84 हजार रुपये मूल्य के 500-500 रुपये के नकली नोट बरामद किए हैं। इसके साथ ही नोट छापने में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक मशीनें, कंप्यूटर उपकरण, विशेष कागज और अन्य सामग्री भी जब्त की गई है। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक किशोर को निरुद्ध किया गया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
एक गिरफ्तारी से खुला पूरा नेटवर्क
दौसा पुलिस के अनुसार इस मामले की शुरुआत 28 मई को हुई, जब पुलिस ने एक संदिग्ध व्यक्ति को 40 हजार रुपये के नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया। शुरुआती पूछताछ में मामला सामान्य लग रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के बाद पुलिस ने एक किशोर को भी हिरासत में लिया, जिसके पास से 47 हजार रुपये के नकली नोट बरामद हुए। दोनों से मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कीं और जांच धीरे-धीरे राजस्थान से निकलकर हरियाणा तक पहुंच गई।
तकनीकी जांच से मिला बड़ा सुराग
पुलिस की विशेष टीम ने मोबाइल डेटा, तकनीकी साक्ष्यों और खुफिया सूचनाओं का विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि नकली नोटों की छपाई हरियाणा के फरीदाबाद में की जा रही है।
इसके बाद पुलिस ने फरीदाबाद में छापेमारी की। जब टीम मौके पर पहुंची तो वहां नकली नोट छापने का पूरा सेटअप संचालित पाया गया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे ठिकाने को सील कर दिया और वहां मौजूद लोगों को हिरासत में लिया।
फैक्टरी से क्या-क्या बरामद हुआ?
छापेमारी के दौरान पुलिस को बड़ी मात्रा में नकली भारतीय मुद्रा मिली। बरामद सामग्री में शामिल हैं—
500 रुपये के 4,968 नकली नोट
कुल नकली मुद्रा मूल्य लगभग 24.84 लाख रुपये
11 हाई-क्वालिटी प्रिंटर
2 लैपटॉप
6 बड़े पेपर रोल
विशेष प्रकार के केमिकल
ब्रश और कटर
वाटरमार्क बनाने वाली डाई
उच्च गुणवत्ता वाला विशेष कागज
नकली नोट तैयार करने के अन्य उपकरण
पुलिस अधिकारियों के अनुसार बरामद उपकरणों से स्पष्ट है कि गिरोह संगठित तरीके से काम कर रहा था और बड़े पैमाने पर नकली नोटों का उत्पादन कर रहा था।
दौसा से जुड़ा मिला मुख्य कनेक्शन
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि इस नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण कड़ी राजस्थान के दौसा जिले से जुड़ी हुई है। पूछताछ में सामने आया कि बरामद नकली नोटों की खेप दौसा निवासी कुलदीप गुर्जर उर्फ केडी के माध्यम से विभिन्न स्थानों तक पहुंचाई जा रही थी।
पुलिस को जानकारी मिली कि कुछ नकली नोट अजमेर और किशनगढ़ क्षेत्र में भी सप्लाई किए गए थे। इसके बाद जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया।
कौन-कौन आरोपी गिरफ्तार हुए?
इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं—
आयुष कुमार मीणा (19 वर्ष), निवासी दौसा, राजस्थान
संतोष सिंह वाल्मीकि (33 वर्ष), निवासी फरीदाबाद, हरियाणा
विशाल उपाध्याय (42 वर्ष), निवासी झारखंड
इसके अलावा एक किशोर को भी निरुद्ध किया गया है, जिसकी भूमिका की जांच की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और उनसे कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुई हैं। संभावना है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी हो सकती है।
किशनगढ़ कनेक्शन ने बढ़ाई जांच
इस मामले में किशनगढ़ कनेक्शन भी सामने आया है। मदनगंज थाना पुलिस पहले से ही नकली नोटों के कारोबार की जांच कर रही थी। जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए आरोपियों का संबंध इसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा हुआ पाया गया।
मदनगंज थाना पुलिस ने सुमेरनगर निवासी नितेश रावत को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। अदालत ने पूछताछ के लिए उसे तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
इसके अलावा अजय मीना और नवीन कोमल रेगर को भी अदालत में पेश किया गया। दोनों आरोपियों को भी तीन दिन के पुलिस रिमांड पर सौंपा गया है ताकि नेटवर्क के अन्य सदस्यों और आर्थिक लेन-देन की जानकारी जुटाई जा सके।
कैसे खपाए जाते थे नकली नोट?
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह छोटे-छोटे लेन-देन, बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में नकली नोटों को चलाने की कोशिश करता था। इसके अलावा विभिन्न जिलों में मौजूद संपर्कों के माध्यम से नकली मुद्रा को असली नोटों के साथ मिलाकर बाजार में उतारा जाता था।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस नेटवर्क के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हुए हैं और क्या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह सक्रिय है।
पुलिस की जांच जारी
दौसा पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि बरामदगी और गिरफ्तारियां इस नेटवर्क का केवल एक हिस्सा हो सकती हैं। जांच का मुख्य उद्देश्य नकली मुद्रा तैयार करने वाले मास्टरमाइंड, वित्तीय मददगारों और वितरण चैनल की पूरी श्रृंखला को उजागर करना है।
पुलिस का कहना है कि नकली भारतीय मुद्रा देश की अर्थव्यवस्था और वित्तीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है। ऐसे मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अब तक कितनी मात्रा में नकली मुद्रा बाजार में पहुंचाई जा चुकी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
Dausa Police in Rajasthan has busted a major fake currency racket operating across Rajasthan and Haryana. The police seized counterfeit ₹500 notes worth ₹24.84 lakh and uncovered a sophisticated printing setup in Faridabad. Several accused have been arrested, while investigators are probing the wider interstate counterfeit currency network. The case highlights growing concerns over fake Indian currency circulation and organized financial crimes in northern India.


















