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संभल में मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई से मचा विवाद, महिलाओं की भावुक अपील के बीच दूसरे दिन भी जारी रहा ध्वस्तीकरण अभियान!

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संभल में मस्जिद पर दूसरे दिन भी चला बुलडोजर, महिलाओं की भावुक अपील के बीच जारी रही कार्रवाई

AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में कथित सरकारी भूमि पर बने धार्मिक ढांचे को हटाने की कार्रवाई रविवार को दूसरे दिन भी जारी रही। प्रशासन द्वारा मस्जिद मुस्तफा कादरी के खिलाफ चलाए जा रहे ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान गांव की महिलाओं और बच्चियों का भावुक वीडियो सामने आया, जिसमें वे मस्जिद को बचाने की गुहार लगाते हुए रोती दिखाई दीं।

ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि गांव में यह एकमात्र मस्जिद है और वर्षों से यहां लोग नमाज अदा करते आ रहे हैं। वीडियो में एक महिला हाथ जोड़कर प्रशासन से अनुरोध करती दिखाई देती है कि गांव के लोगों की किसी से कोई दुश्मनी नहीं है और सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है। उन्होंने प्रशासन से मस्जिद को न तोड़ने की अपील की।

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दूसरे दिन भी जारी रही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई

संभल के नखासा क्षेत्र स्थित कसेरुआ गांव में शनिवार को शुरू हुई कार्रवाई रविवार को भी जारी रही। प्रशासन ने पहले दिन मस्जिद के बड़े हिस्से को ध्वस्त कर दिया था, जबकि दूसरे दिन शेष हिस्से को हटाने का काम किया गया।

अधिकारियों के अनुसार मस्जिद का अग्रभाग, कई पिलर और अन्य संरचनाएं पहले ही गिराई जा चुकी हैं। इसके अलावा लगभग 55 फीट ऊंची मीनार को क्रेन की सहायता से नीचे गिराया गया। पूरे अभियान के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।

प्रशासन का दावा- सरकारी भूमि पर किया गया था निर्माण

राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के आधार पर प्रशासन का कहना है कि जिस भूमि पर मस्जिद बनी हुई थी, वह कब्रिस्तान की सरकारी जमीन के रूप में दर्ज है। अधिकारियों के अनुसार लगभग 120 वर्गमीटर भूमि पर अतिक्रमण कर मस्जिद का निर्माण किया गया था।

प्रशासन का यह भी दावा है कि आसपास की अन्य सरकारी भूमि पर भी अवैध कब्जे पाए गए हैं। कुछ स्थानों पर मकान बनाए गए हैं, जबकि कुछ हिस्सों में खेती किए जाने की जानकारी सामने आई है।

अधिकारियों का कहना है कि सरकारी अभिलेखों की जांच और शिकायतों के आधार पर कार्रवाई की गई है तथा इसका उद्देश्य सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना है।

कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई कार्रवाई

मामले की कानूनी प्रक्रिया कई महीनों से चल रही थी। प्रशासन के अनुसार तहसीलदार न्यायालय ने अप्रैल 2026 में मस्जिद समिति के खिलाफ बेदखली का आदेश पारित किया था।

इसके बाद मस्जिद पक्ष ने उच्च स्तर पर अपील दायर की, लेकिन कार्रवाई पर रोक लगाने संबंधी कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ। इसी के बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण अभियान को आगे बढ़ाने का फैसला लिया।

कार्रवाई के लिए विशेष टीम गठित की गई थी, जिसमें राजस्व विभाग, नगर निकायों और पुलिस प्रशासन के अधिकारी शामिल थे। अभियान में जेसीबी मशीनें, डंपर और सफाईकर्मी भी लगाए गए।

ग्रामीणों ने जताई नाराजगी

गांव के कई लोगों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त की है। ग्रामीणों का कहना है कि मस्जिद बहुत पुरानी है और उनके बुजुर्गों के समय से यहां धार्मिक गतिविधियां होती रही हैं।

कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया और अचानक कार्रवाई शुरू कर दी गई। उनका कहना है कि यदि पहले से स्पष्ट जानकारी दी जाती तो वे कानूनी स्तर पर अपनी बात रखने की कोशिश करते।

ग्रामीणों के मुताबिक शुक्रवार की नमाज के दौरान यहां बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं और आसपास के मुस्लिम समुदाय के लिए यह महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल रहा है।

मस्जिद समिति का दावा

मस्जिद से जुड़े लोगों का कहना है कि यह धार्मिक स्थल कई वर्षों से मौजूद है। उनके अनुसार करीब दो दशक पहले इसका पुनर्निर्माण कराया गया था, जिस पर लाखों रुपये खर्च हुए थे।

समिति का आरोप है कि उनकी बात को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। हालांकि प्रशासन का कहना है कि सुनवाई के दौरान संबंधित पक्ष को पूरा अवसर दिया गया था।

प्रशासन का पक्ष

तहसील प्रशासन के अनुसार गांव के कुछ लोगों ने कब्रिस्तान की भूमि को सुरक्षित कराने के लिए शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराई गई।

अधिकारियों का कहना है कि सुनवाई के दौरान मस्जिद समिति से भूमि स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन ऐसा कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका जिससे यह साबित हो सके कि निर्माण निजी भूमि पर किया गया था।

इसी आधार पर राजस्व कानूनों के तहत कार्रवाई की गई और बेदखली का आदेश लागू किया गया।

पोस्टर और झंडे मिलने का दावा

कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने दावा किया कि मस्जिद की ऊपरी मंजिल से कुछ पोस्टर और एक झंडा बरामद हुआ है। पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिया है कि मामले की जांच की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

हालांकि इस विषय पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

पहले भी दर्ज हो चुका है मुकदमा

इस विवाद से जुड़े मामले में वर्ष 2026 की शुरुआत में कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया था। आरोप था कि भूमि से संबंधित दस्तावेजों के आधार पर सरकारी जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्शाने का प्रयास किया गया।

प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की जांच कानून के अनुसार की जा रही है और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

संभल में पहले भी हुई हैं ऐसी कार्रवाइयां

संभल जिले में पिछले कुछ समय से प्रशासन द्वारा विभिन्न स्थानों पर कथित अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान कई धार्मिक और गैर-धार्मिक संरचनाओं पर कार्रवाई की गई है।

प्रशासन का दावा है कि जहां भी सरकारी भूमि पर अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां राजस्व अभिलेखों और न्यायालय के आदेशों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं प्रभावित पक्षों का कहना है कि कई मामलों में ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थलों को लेकर संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए।

संभल के कसेरुआ गांव में मस्जिद मुस्तफा कादरी पर हुई बुलडोजर कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी भूमि, धार्मिक स्थलों और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बहस तेज कर दी है। एक ओर प्रशासन इसे अदालत के आदेश और राजस्व रिकॉर्ड पर आधारित वैधानिक कार्रवाई बता रहा है, तो दूसरी ओर स्थानीय लोगों और महिलाओं की भावुक अपील इस मामले को सामाजिक और मानवीय दृष्टि से भी चर्चा का विषय बना रही है। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।

The Sambhal Mosque Demolition has become one of the most discussed issues in Uttar Pradesh after authorities launched a bulldozer action against the Mustafa Qadri Mosque, alleging encroachment on government land. Emotional scenes emerged as local women appealed to officials to stop the demolition, claiming it was the village’s only mosque. The Sambhal administration maintains that the action followed court orders and land record verification. The case highlights the broader campaign against alleged illegal constructions, including mosques, madrasas, shrines, and other structures across the district.

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