सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद विवाद: हिंदू जागरण मंच ने सांसद इमरान मसूद के बयान पर उठाए सवाल, अवैध कब्जा हटाने की मांग तेज
AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय द्वारा मस्जिद को अवैध निर्माण घोषित किए जाने के बाद राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। इसी क्रम में हिंदू जागरण मंच पश्चिम उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष ठाकुर सूर्यकांत सिंह ने कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के हालिया बयान और मस्जिद में नमाज अदा करने की घटना पर कड़ी आपत्ति जताई है।
ठाकुर सूर्यकांत सिंह ने आरोप लगाया कि न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद सांसद इमरान मसूद का रवैया न्यायिक प्रक्रिया के प्रति सम्मानजनक नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कदमों से न केवल कानून व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, बल्कि समाज में अनावश्यक तनाव भी पैदा होने की आशंका बढ़ जाती है।

क्या है पूरा मामला?
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर लंबे समय से स्वामित्व और वैधता का विवाद चल रहा था। यह मामला मार्च 2025 से नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय में विचाराधीन था। न्यायालय में दोनों पक्षों को अपने-अपने दावे और साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि मस्जिद पक्ष स्वामित्व और निर्माण की वैधता से जुड़े पर्याप्त दस्तावेज अथवा ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके आधार पर नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय ने संबंधित निर्माण को अवैध मानते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
हालांकि, इस आदेश के बाद मामला राजनीतिक रंग भी लेने लगा और विभिन्न संगठनों तथा नेताओं की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
सांसद इमरान मसूद के बयान पर हिंदू जागरण मंच की प्रतिक्रिया
हिंदू जागरण मंच पश्चिम उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष ठाकुर सूर्यकांत सिंह ने कहा कि न्यायालय के आदेश पर सवाल उठाना और उसके बाद विवादित स्थल पर जाकर नमाज अदा करना न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान नहीं माना जा सकता।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद इमरान मसूद इस मुद्दे को राजनीतिक रूप देने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि किसी न्यायालय ने सुनवाई के बाद आदेश पारित किया है, तो सभी पक्षों को उसका सम्मान करना चाहिए और यदि किसी को आदेश से असहमति है तो उसके लिए उच्च न्यायालय या अन्य कानूनी मंच उपलब्ध हैं।
ठाकुर सूर्यकांत सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक और जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है कि वह कानून और संविधान की मर्यादा का पालन करे।
“संविधान की बात करने वालों को न्यायालय का भी सम्मान करना चाहिए”
अपने बयान में ठाकुर सूर्यकांत सिंह ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता अक्सर संविधान की रक्षा की बात करते हैं, लेकिन यदि न्यायालय के आदेशों का सम्मान नहीं किया जाता तो यह दोहरे मापदंड को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी संवेदनशील मामले में सार्वजनिक बयान देते समय राजनीतिक नेताओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए ताकि समाज में किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न न हो।
कानून व्यवस्था पर चिंता जताई
हिंदू जागरण मंच के अध्यक्ष ने कहा कि सहारनपुर हमेशा से सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे के लिए जाना जाता रहा है। ऐसे में किसी भी विवादित विषय को लेकर दिए जाने वाले बयान या सार्वजनिक गतिविधियां कानून व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।
उन्होंने प्रशासन से अपील की कि पूरे मामले में निष्पक्षता बनाए रखी जाए और न्यायालय के आदेशों का विधिसम्मत पालन कराया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा पाया जाता है तो उसे नियमानुसार हटाया जाना चाहिए।
प्रशासन से की यह मांग
ठाकुर सूर्यकांत सिंह ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मांग की कि नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय के आदेश का तत्काल पालन कराया जाए। उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय ने किसी निर्माण को अवैध माना है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति या संगठन को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। प्रशासन को निष्पक्ष रहते हुए कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करनी चाहिए।
राजनीतिक बयानबाजी से बढ़ी बहस
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सहारनपुर की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहां हिंदू संगठनों ने न्यायालय के आदेश के पालन की मांग उठाई है, वहीं दूसरी ओर इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होना चाहिए। यदि किसी पक्ष को आदेश पर आपत्ति है तो उसके लिए कानूनी उपाय उपलब्ध हैं। सार्वजनिक विवाद या टकराव की स्थिति से बचना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है।
न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान जरूरी
लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायालयों के आदेशों का सम्मान करना सभी नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का दायित्व माना जाता है। किसी भी आदेश के खिलाफ असहमति होने पर कानून में अपील का अधिकार दिया गया है। इसलिए संवेदनशील मामलों में राजनीतिक संयम और कानूनी प्रक्रिया का पालन सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए आवश्यक माना जाता है।
फिलहाल क्या स्थिति है?
नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासन आगे की कानूनी प्रक्रिया पर काम कर रहा है। इस बीच मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं जारी हैं। प्रशासन की ओर से कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
(नोट: यह समाचार संबंधित पक्षों द्वारा दिए गए सार्वजनिक बयानों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। यदि मामले में किसी अन्य पक्ष का आधिकारिक बयान या न्यायालय के आदेश के संबंध में नई जानकारी सामने आती है, तो उसे भी समाचार में शामिल किया जाएगा।)
The Saharanpur Collectorate Mosque dispute has become a major political and legal issue in Uttar Pradesh after the Nagar Magistrate Court reportedly declared the structure illegal. Hindu Jagran Manch has criticized Congress MP Imran Masood, alleging that his actions undermine the judicial process while demanding strict implementation of the court order. The case has drawn significant attention due to concerns over illegal encroachment, court order compliance, law and order, and the evolving political debate in Saharanpur. This developing story remains one of the most discussed UP News topics and continues to attract public and political interest.


















