AIN NEWS 1 नई दिल्ली। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई। मंगलवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए। कांग्रेस की मांग थी कि संसद में NEET पेपर लीक मामले पर विस्तृत चर्चा कराई जाए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दें।
धरना उस समय और अधिक चर्चाओं में आ गया जब दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने की कार्रवाई की। इस दौरान राहुल गांधी को पुलिस ने हिरासत में लिया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि जब पुलिस उन्हें उठाने पहुंची तो राहुल गांधी जमीन पर बैठ गए और बाद में पुलिसकर्मियों ने उन्हें उठाकर वाहन तक पहुंचाया। यह वीडियो कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

कांग्रेस के शीर्ष नेता भी धरने में रहे शामिल
राहुल गांधी के साथ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार सहित कई वरिष्ठ नेता और विपक्षी दलों के प्रतिनिधि धरने में मौजूद रहे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इन नेताओं को भी हिरासत में लिया और बाद में उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत वहां से हटाया गया।
इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं का कहना था कि NEET पेपर लीक जैसे गंभीर मामले ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों का विश्वास तोड़ा है। ऐसे में सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए और संसद में इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए।
दोपहर से शाम तक चला विरोध प्रदर्शन
जानकारी के अनुसार कांग्रेस नेताओं का धरना मंगलवार दोपहर लगभग साढ़े तीन बजे शुरू हुआ। शाम करीब साढ़े छह बजे तक प्रदर्शन जारी रहा। इसके बाद पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए धरनास्थल खाली कराया।
पुलिस अधिकारियों का कहना था कि प्रधानमंत्री आवास के आसपास सुरक्षा के विशेष प्रबंध रहते हैं और वहां बिना अनुमति धरना देना सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं है। इसी कारण प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई की गई।
राहुल गांधी और सरकार के बीच बातचीत की कोशिश
धरने के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने राहुल गांधी से बातचीत की और उनकी मांगों को जानने का प्रयास किया। इसके बाद वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने गए। गृह मंत्री से चर्चा करने के बाद जितेंद्र सिंह दोबारा राहुल गांधी के पास पहुंचे और बातचीत जारी रखी।
बाद में सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में डॉ. जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि राहुल गांधी की प्रारंभिक मांग संसद में NEET पेपर लीक पर चर्चा कराने की थी। सरकार इस पर सहमत हो गई थी। हालांकि बाद में राहुल गांधी ने दूसरी मांग भी जोड़ दी, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल थी।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि NEET पेपर लीक मामले ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों की नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री को लेनी चाहिए।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि केवल जांच की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि जवाबदेही भी तय होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
वहीं सरकार का पक्ष है कि पेपर लीक मामले की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि छात्रों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
गृह सचिव और राहुल गांधी के बीच भी हुई बातचीत
धरने के दौरान गृह सचिव ने भी राहुल गांधी से बातचीत की। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि प्रधानमंत्री आवास के आसपास का क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील है और वहां लंबे समय तक धरना देना सुरक्षा कारणों से उचित नहीं है।
सूत्रों के अनुसार अधिकारियों ने राहुल गांधी से स्थान बदलने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने वहीं बैठकर विरोध जारी रखने की बात कही। इसके बाद पुलिस ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रदर्शन समाप्त कराया।
धरनास्थल पर लगे सरकार विरोधी नारे
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। कई कार्यकर्ता प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग करते नजर आए। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल और सुरक्षा कर्मी तैनात रहे ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
इस दौरान पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी सहित कई अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया।
बेहद गोपनीय तरीके से बनाई गई थी रणनीति
कांग्रेस का यह विरोध प्रदर्शन काफी हद तक गोपनीय रखा गया था। जानकारी के अनुसार राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य वरिष्ठ नेता पहले कांग्रेस अध्यक्ष के आवास पर एकत्र हुए। इसके बाद सभी नेता पैदल मार्च करते हुए प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़े।
बताया जा रहा है कि जब नेता प्रधानमंत्री आवास से लगभग 100 मीटर की दूरी पर पहुंच गए, तभी मीडिया को इसकी सूचना दी गई। इससे पहले तक प्रदर्शन की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी। माना जा रहा है कि यह रणनीति सुरक्षा और प्रशासनिक रोकथाम से बचने के उद्देश्य से बनाई गई थी।
NEET विवाद बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
NEET पेपर लीक विवाद लगातार विपक्ष के निशाने पर है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल सरकार पर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगा रहे हैं। दूसरी ओर केंद्र सरकार का कहना है कि जांच एजेंसियां पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रही हैं और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। विपक्ष का कहना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना होगा, जबकि सरकार का दावा है कि कानून के तहत दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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आगे क्या?
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की हिरासत के बाद भी NEET विवाद शांत होता नहीं दिख रहा है। माना जा रहा है कि विपक्ष आने वाले दिनों में इस मुद्दे को संसद और सड़क दोनों जगह उठाता रहेगा। वहीं सरकार जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई का इंतजार करने की बात कह रही है।
फिलहाल देशभर के छात्र, अभिभावक और राजनीतिक दल इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस मुद्दे पर होने वाली चर्चा और सरकार की अगली रणनीति पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।
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