धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर के बाद जंतर-मंतर पर जश्न, छात्रों ने गाया राष्ट्रगान; अभिजीत दीपके बोले- आंदोलन अभी जारी रहेगा
AIN NEWS 1 नई दिल्ली। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और विभिन्न छात्र संगठनों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। लंबे समय से चल रहे आंदोलन में शामिल छात्रों ने एक-दूसरे को बधाई दी, “छात्र एकता जिंदाबाद” के नारे लगाए और राष्ट्रगान गाकर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही नीट पेपर लीक प्रकरण और उससे जुड़े तनाव के कारण जान गंवाने वाले छात्रों की स्मृति में दो मिनट का मौन भी रखा गया।
यह आंदोलन पिछले कई दिनों से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और छात्रों के साथ न्याय की मांग को लेकर जारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की भी है।

जंतर-मंतर पर दिखा जश्न का माहौल
जैसे ही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर प्रदर्शन स्थल तक पहुंची, वहां मौजूद छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई। कई छात्रों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई, तिरंगा लहराया और राष्ट्रगान गाकर इस पल को ऐतिहासिक बताया।
हालांकि प्रदर्शनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन केवल किसी एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि जब तक उनकी सभी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
शहीद छात्रों को दी गई श्रद्धांजलि
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने नीट पेपर लीक विवाद के बाद मानसिक तनाव और अन्य कारणों से जान गंवाने वाले विद्यार्थियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी प्रदर्शनकारियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत छात्रों को याद किया और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में हुई कथित अनियमितताओं का सबसे बड़ा नुकसान उन छात्रों को उठाना पड़ा जिन्होंने वर्षों की मेहनत और सपनों के साथ परीक्षा की तैयारी की थी।
अभिजीत दीपके ने क्या कहा?
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह आंदोलन छात्रों की एकजुटता और संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि कई लोगों का मानना था कि सरकार किसी भी स्थिति में पीछे नहीं हटेगी, लेकिन छात्रों के लगातार आंदोलन ने परिस्थितियां बदल दीं।
दीपके ने कहा कि मंत्री का इस्तीफा आंदोलन की एक उपलब्धि हो सकता है, लेकिन इसे अंतिम मंजिल नहीं माना जा सकता। उन्होंने दोहराया कि उनकी अन्य प्रमुख मांगें अभी भी पूरी होना बाकी हैं।
आंदोलन की प्रमुख मांगें
अभिजीत दीपके ने कहा कि आंदोलन की ओर से सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं, जिनमें प्रमुख रूप से—
नीट विवाद से प्रभावित और जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं।
आंदोलन के दौरान कथित तौर पर बल प्रयोग करने वाले पुलिस अधिकारियों की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जाए।
परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुधार किए जाएं।
भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त और प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए।
उन्होंने कहा कि छात्र न्याय मिलने तक पीछे हटने वाले नहीं हैं।
पुलिस कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की गई और कई छात्रों पर मामले दर्ज किए गए।
उन्होंने मांग की कि यदि आंदोलन के दौरान किसी भी स्तर पर छात्रों के साथ अनुचित व्यवहार हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
“आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ”
अभिजीत दीपके ने अपने संबोधन में कहा कि मंत्री के इस्तीफे की खबर आने के बाद भी आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उनका कहना है कि जब तक सभी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और छात्रों ने उसी अधिकार का उपयोग करते हुए अपनी आवाज बुलंद की है।
छात्रों ने दिखाई एकजुटता
प्रदर्शन स्थल पर मौजूद छात्रों ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक संगठन का नहीं बल्कि देशभर के छात्रों की आवाज है। उनका मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
छात्रों ने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली पर विश्वास कमजोर होगा तो लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित होगा। इसलिए वे चाहते हैं कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से सुने और स्थायी समाधान निकाले।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल एक मामले की जांच पर्याप्त नहीं होगी। उनका मानना है कि भविष्य में किसी भी राष्ट्रीय परीक्षा में पेपर लीक या अनियमितता की संभावना समाप्त करने के लिए मजबूत तंत्र विकसित किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने परीक्षा संचालन, सुरक्षा व्यवस्था, डिजिटल निगरानी और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई जैसी व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाने की मांग की।
आगे क्या?
प्रदर्शनकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी शेष मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। छात्र संगठनों का कहना है कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाते रहेंगे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर अभियान जारी रखेंगे।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर के बाद जंतर-मंतर पर छात्रों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। राष्ट्रगान, श्रद्धांजलि और नारों के बीच प्रदर्शनकारियों ने इसे अपने संघर्ष की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। हालांकि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके और अन्य छात्र नेताओं का कहना है कि उनकी कई मांगें अभी भी अधूरी हैं। उनका कहना है कि प्रभावित छात्रों के परिवारों को न्याय, उचित मुआवजा, छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
The reported resignation of Dharmendra Pradhan has sparked celebrations among protesting students at Jantar Mantar, where demonstrators sang the national anthem and observed silence for students affected by the NEET paper leak controversy. Abhijeet Dipke, founder of the Cockroach Janata Party, reiterated demands for justice, compensation for victims’ families, and withdrawal of cases against students. The protest has become one of the most significant student movements related to education reforms and examination transparency in India.



















