जौहर यूनिवर्सिटी पर बढ़ा सियासी घमासान, 10 सपा सांसदों का रामपुर दौरा; ध्वस्तीकरण आदेश वापस लेने की उठाई मांग
AIN NEWS 1: रामपुर में स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) के 10 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल शनिवार को रामपुर पहुंचा और जिला प्रशासन से मुलाकात कर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश को वापस लेने की मांग की। इस दौरान सांसदों ने छात्रों से भी मुलाकात की और प्रशासन के फैसले का विरोध दर्ज कराया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सपा सांसद इकरा हसन का बयान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी को किसी भी कीमत पर गिरने नहीं दिया जाएगा। यदि जरूरत पड़ी तो “एक-एक ईंट की जगह अपना सिर लगा देंगे”, लेकिन इस शैक्षणिक संस्थान को नुकसान नहीं होने देंगे।
पहले हुई सांसदों की बैठक, फिर पहुंचे यूनिवर्सिटी
शनिवार दोपहर करीब 12:30 बजे सपा सांसद इकरा हसन सबसे पहले रामपुर स्थित संत शिरोमणि गेस्ट हाउस पहुंचीं। इसके बाद सांसद रुचि वीरा और जियाउर्रहमान बर्क सहित अन्य सांसद वहां पहुंचे। सभी नेताओं ने बंद कमरे में रणनीतिक बैठक की, जिसमें आगे की कार्रवाई पर चर्चा हुई।

बैठक समाप्त होने के बाद पूरा प्रतिनिधिमंडल जौहर यूनिवर्सिटी पहुंचा। वहां पिछले आठ दिनों से धरने पर बैठे छात्र-छात्राओं से मुलाकात की गई। सांसदों ने छात्रों की बातें सुनीं और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी शिक्षा और विश्वविद्यालय के भविष्य की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
इकरा हसन का बड़ा बयान
छात्रों और मीडिया से बातचीत के दौरान सांसद इकरा हसन ने कहा कि इससे पहले भी सपा के विधायक प्रशासन से मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि आजम खान और रामपुर की जनता को विश्वास दिलाया जाता है कि जौहर यूनिवर्सिटी को टूटने नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय केवल इमारतों का समूह नहीं, बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़ा संस्थान है। इसलिए प्रशासन को ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो।
रुचि वीरा ने बताया शिक्षा का मंदिर
मुरादाबाद से सांसद रुचि वीरा ने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी शिक्षा का केंद्र है और इसे ध्वस्त करने का निर्णय उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि जिला प्रशासन उनकी मांगों पर विचार नहीं करता है तो पार्टी इस मामले को उच्च अधिकारियों और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय तक भी ले जाएगी।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शिक्षा संस्थानों को बचाने की जिम्मेदारी सभी की है और इसी उद्देश्य से सांसदों का प्रतिनिधिमंडल रामपुर आया है।
जियाउर्रहमान बर्क बोले- संसद में उठाएंगे मुद्दा
संभल से सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने प्रशासन के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने पर वह इस मुद्दे को सदन में भी उठाएंगे।
उन्होंने बताया कि इस विषय पर बोलने के लिए उनका नाम जीरो ऑवर में शामिल हो चुका है, लेकिन संसद में लगातार व्यवधान के कारण चर्चा नहीं हो पा रही है।
हरेंद्र मलिक और जावेद अली खान ने भी जताया विरोध
मुजफ्फरनगर के सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि सरकार को नए शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने चाहिए, जबकि वर्तमान में विश्वविद्यालयों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार सकारात्मक पहल नहीं करती तो विपक्ष लोकतांत्रिक तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
राज्यसभा सांसद जावेद अली खान ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि शिक्षा संस्थानों को नुकसान पहुंचाने वाले फैसलों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि छात्रों के हित सर्वोपरि होने चाहिए और प्रशासन को सभी पक्षों की बात सुननी चाहिए।
डीएम को सौंपा गया ज्ञापन

करीब साढ़े तीन बजे सपा सांसदों का प्रतिनिधिमंडल रामपुर कलेक्ट्रेट पहुंचा। वहां जिला अधिकारी अजय कुमार द्विवेदी को ज्ञापन सौंपते हुए 38 भवनों के ध्वस्तीकरण संबंधी आदेश को वापस लेने की मांग की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से अनुरोध किया कि अंतिम निर्णय लेने से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों की बात भी सुनी जाए।
सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम
प्रतिनिधिमंडल के दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी थी। कलेक्ट्रेट से लेकर जौहर यूनिवर्सिटी के मुख्य प्रवेश द्वार तक पुलिस बल तैनात रहा।
अपर पुलिस अधीक्षक अनुराग सिंह के अनुसार तीन थानों की पुलिस, संबंधित क्षेत्राधिकारी, वज्र वाहन तथा फायर ब्रिगेड की टीम को भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया था ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
कौन-कौन रहा प्रतिनिधिमंडल में शामिल
सपा के इस प्रतिनिधिमंडल में सांसद इकरा हसन, मोहिबुल्लाह, जियाउर्रहमान बर्क, नीरज मौर्य, राजीव राय, रामशिरोमणि वर्मा, बीरेंद्र सिंह मलिक, रामजीलाल सुमन, जावेद अली खान सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। पूर्व सांसद अबू आसिम आजमी भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे।
हालांकि सूची में शामिल रामपुर के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए।
इससे पहले 25 विधायकों का दल भी पहुंचा था
इससे पहले 23 जुलाई को नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी के 25 विधायकों और अन्य नेताओं का प्रतिनिधिमंडल भी रामपुर पहुंचा था।
उस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय परिसर का दौरा किया, अधिकारियों के साथ बैठक की और बाद में आजम खान की पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा से भी मुलाकात की थी। इस बैठक में विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई थी।
सपा प्रदेश अध्यक्ष ने जारी किया था पत्र
सपा प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने प्रतिनिधिमंडल के गठन से पहले पत्र जारी कर कहा था कि जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रस्तावित कार्रवाई शिक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा गंभीर विषय है। उनका कहना था कि यदि विश्वविद्यालय को नुकसान पहुंचता है तो हजारों छात्रों के भविष्य पर असर पड़ सकता है।
आखिर क्या है पूरा मामला?
रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने 15 जुलाई को मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 40 में से 38 भवनों को अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था। प्राधिकरण का कहना है कि इन भवनों के निर्माण के लिए आवश्यक मानचित्र (नक्शा) स्वीकृत नहीं कराया गया था।
ध्वस्तीकरण से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन को 15 दिन का समय दिया गया है ताकि वह कानूनी विकल्पों का उपयोग कर सके।
कानूनी लड़ाई भी जारी
यूनिवर्सिटी की चेयरमैन एवं ट्रस्टी निखत अफलाक खान ने रामपुर विकास प्राधिकरण के आदेश को चुनौती देते हुए मुरादाबाद मंडल के आयुक्त की अदालत में अपील दायर की है। इस मामले में 28 जुलाई को सुनवाई प्रस्तावित है।
इसी सुनवाई पर सभी पक्षों की नजर बनी हुई है, क्योंकि आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई इसी निर्णय से प्रभावित हो सकती है।
नक्शा पास न कराने का मुद्दा भी चर्चा में
जानकारों के अनुसार जिस क्षेत्र में जौहर यूनिवर्सिटी स्थित है, उसे वर्ष 2026 में रामपुर विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते भवनों के नक्शे स्वीकृत करा लिए गए होते तो वर्तमान विवाद की स्थिति संभवतः उत्पन्न नहीं होती।
हालांकि अंतिम निर्णय अब कानूनी प्रक्रिया और संबंधित प्राधिकरणों की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल क्या है स्थिति?
फिलहाल जौहर यूनिवर्सिटी का मामला प्रशासन, राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया—तीनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर समाजवादी पार्टी इसे शिक्षा और छात्रों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बताते हुए ध्वस्तीकरण का विरोध कर रही है, वहीं प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है।
अब सभी की नजर 28 जुलाई को होने वाली सुनवाई और उसके बाद आने वाले प्रशासनिक फैसलों पर टिकी हुई है, जो इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकते हैं।
The Jauhar University demolition row has intensified after Samajwadi Party MPs met the Rampur District Magistrate demanding the withdrawal of the demolition order issued against 38 buildings of Mohammad Ali Jauhar University. Ikra Hasan, Azam Khan, Rampur Development Authority (RDA), and the ongoing legal battle have become major political issues in Uttar Pradesh. The university administration has challenged the order before the Commissioner, while political leaders continue to protest, making the Jauhar University latest news one of the most discussed topics in UP politics.



















