AIN NEWS 1: अगर आप 20 या 30 की उम्र में गांजा, भांग या दूसरे कैनाबिस उत्पादों का सेवन करते हैं, तो नई रिसर्च आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया की UNSW Sydney के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए एक नए मेटा-एनालिसिस में कैनाबिस के इस्तेमाल और साइकोसिस की अपेक्षाकृत जल्दी शुरुआत के बीच महत्वपूर्ण संबंध पाया गया है।
शोधकर्ताओं ने पिछले करीब 15 वर्षों में प्रकाशित 149 अध्ययनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इन अध्ययनों में 71,000 से ज्यादा लोग शामिल थे। शोध का उद्देश्य यह समझना था कि कैनाबिस का इस्तेमाल करने वाले लोगों में साइकोसिस की शुरुआत उन लोगों की तुलना में किस उम्र में होती है, जो कैनाबिस का इस्तेमाल नहीं करते।
क्या सामने आया नई रिसर्च में?
शोध के अनुसार, जिन लोगों में साइकोसिस विकसित हुआ और जिन्होंने कैनाबिस का इस्तेमाल किया था, उनमें बीमारी की शुरुआत औसतन करीब 2.5 साल पहले हुई।
हालांकि, उम्र के हिसाब से आंकड़ों में बड़ा अंतर देखने को मिला। 20 से 29 वर्ष की उम्र के बीच साइकोसिस विकसित करने वाले कैनाबिस यूजर्स में इसकी शुरुआत औसतन 4.4 साल पहले देखी गई।

वहीं, जिन लोगों में 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र में साइकोसिस विकसित हुआ, उनमें कैनाबिस इस्तेमाल करने वालों में साइकोसिस की शुरुआत 6.3 साल से ज्यादा पहले हुई।
यह निष्कर्ष इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय से कैनाबिस और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर यह सवाल रहा है कि क्या जोखिम मुख्य रूप से किशोरों और बहुत कम उम्र के लोगों तक सीमित है।
नई रिसर्च के निष्कर्ष बताते हैं कि केवल 25 वर्ष की उम्र पार कर लेना कैनाबिस से जुड़े संभावित psychosis risk को पूरी तरह खत्म नहीं करता।
क्या हर कैनाबिस इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को साइकोसिस होगा?
नहीं। इस बात को समझना बेहद जरूरी है।
रिसर्च में कैनाबिस सेवन और साइकोसिस की जल्दी शुरुआत के बीच संबंध पाया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि कैनाबिस लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति को साइकोसिस होगा या हर व्यक्ति में बीमारी कई साल पहले शुरू हो जाएगी।
अध्ययन एक बड़े स्तर के उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण है और इसमें कई तरह के व्यक्तिगत कारकों को पूरी तरह नियंत्रित करना संभव नहीं था। मानसिक स्वास्थ्य, आनुवंशिक संवेदनशीलता, बचपन के अनुभव, दूसरी दवाओं या नशीले पदार्थों का इस्तेमाल और कैनाबिस की मात्रा व potency जैसे कारक भी जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए 4.4 साल और 6.3 साल के आंकड़ों को व्यक्तिगत व्यक्ति के भविष्य की सीधी भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए।
साइकोसिस आखिर क्या होता है?
साइकोसिस कोई एक बीमारी नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े लक्षणों का एक समूह है। इसमें व्यक्ति को वास्तविकता और अपने दिमाग में पैदा होने वाले अनुभवों के बीच अंतर समझने में परेशानी हो सकती है।
ऐसी स्थिति में व्यक्ति को ऐसी आवाजें सुनाई दे सकती हैं जो वास्तव में मौजूद नहीं हैं। कुछ लोगों को ऐसी चीजें दिखाई दे सकती हैं जिन्हें दूसरे लोग नहीं देख रहे होते। इसके अलावा व्यक्ति किसी गलत धारणा को पूरी तरह सच मान सकता है।
साइकोसिस कई मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों से जुड़ा हो सकता है। यह कुछ न्यूरोलॉजिकल या मेडिकल स्थितियों और नशीले पदार्थों के इस्तेमाल के कारण भी हो सकता है।
साइकोसिस के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
साइकोसिस के लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य संकेतों पर ध्यान दिया जा सकता है।
1. हैलुसिनेशन
इस स्थिति में व्यक्ति ऐसी चीजों को देखने, सुनने, महसूस करने, सूंघने या स्वाद लेने का अनुभव कर सकता है, जिनका बाहरी दुनिया में कोई वास्तविक स्रोत नहीं होता।
उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति को ऐसी आवाजें सुनाई दे सकती हैं जो वास्तव में कोई दूसरा व्यक्ति नहीं सुन रहा है।
2. भ्रम या Delusions
इसमें व्यक्ति किसी ऐसी बात पर मजबूत विश्वास कर सकता है जो वास्तविकता से मेल नहीं खाती।
मसलन, उसे लग सकता है कि कोई व्यक्ति उसके खिलाफ साजिश कर रहा है या उसे नुकसान पहुंचाने की योजना बना रहा है। कई बार व्यक्ति को अपनी धारणा गलत लगती ही नहीं और वह उसे पूरी तरह वास्तविक मानता है।
3. सोच और बातचीत में बदलाव
साइकोसिस के दौरान सोचने का तरीका भी प्रभावित हो सकता है। व्यक्ति बहुत तेजी से बोल सकता है, बातचीत के दौरान अचानक एक विषय से दूसरे विषय पर जा सकता है या उसके विचारों में स्पष्टता की कमी दिखाई दे सकती है।
कुछ मामलों में सामान्य बातचीत या रोजमर्रा की गतिविधियों को पूरा करना भी मुश्किल हो सकता है।
कैनाबिस साइकोसिस को कैसे प्रभावित कर सकता है?
कैनाबिस में THC यानी delta-9-tetrahydrocannabinol एक प्रमुख psychoactive compound है। THC मस्तिष्क में cannabinoid receptors पर असर डालता है और इससे mood, memory, perception और दूसरी मानसिक प्रक्रियाओं में बदलाव आ सकता है।
पहले भी कई अध्ययनों में cannabis use और psychosis के बीच संबंध सामने आया है। खासतौर पर नियमित इस्तेमाल, अधिक THC वाली cannabis और पहले से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी संवेदनशीलता रखने वाले लोगों को लेकर वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है।
नई रिसर्च का महत्व इसलिए है क्योंकि इसमें केवल किशोरावस्था पर ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि 20 और 30 की उम्र में साइकोसिस की शुरुआत के मामलों को भी अलग से देखा गया।
25 साल की उम्र के बाद क्या खतरा खत्म हो जाता है?
ऐसा मानना सही नहीं होगा।
अक्सर यह कहा जाता है कि करीब 25 वर्ष की उम्र तक मस्तिष्क का विकास पूरा हो जाता है और इसके बाद cannabis से जुड़े मानसिक स्वास्थ्य जोखिम कम हो जाते हैं। नई रिसर्च इस धारणा को चुनौती देती है।
हालांकि इसका अर्थ यह भी नहीं है कि 25 वर्ष की उम्र के बाद cannabis इस्तेमाल करना निश्चित रूप से psychosis का कारण बनेगा। सही निष्कर्ष यह है कि उम्र बढ़ जाने से संभावित जोखिम को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
पहले के शोधों से भी मिला है संकेत
Cannabis और psychosis के बीच संबंध कोई नया वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं है। इससे पहले की बड़ी reviews और meta-analyses में भी cannabis users में psychosis की शुरुआत अपेक्षाकृत कम उम्र में होने का संबंध सामने आया था।
2026 की नई रिसर्च ने उपलब्ध अध्ययनों के बड़े समूह को एक साथ देखकर यह समझने की कोशिश की है कि यह संबंध अलग-अलग उम्र के समूहों में कैसा दिखाई देता है।
इससे यह संदेश जरूर मजबूत होता है कि cannabis को मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से पूरी तरह harmless मानना उचित नहीं है।
क्या चिंता और नींद के लिए कैनाबिस लेना सुरक्षित है?
कई लोग anxiety, depression या insomnia जैसी परेशानियों के लिए cannabis का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इन समस्याओं के इलाज में cannabis के फायदे को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण सीमित और परिस्थितियों पर निर्भर हैं।
इसलिए मानसिक स्वास्थ्य समस्या के लिए खुद से cannabis लेना उचित नहीं माना जाना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को लगातार चिंता, अवसाद, नींद की समस्या, असामान्य आवाजें सुनाई देना, अत्यधिक शक या वास्तविकता को समझने में परेशानी जैसी समस्या हो रही है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित रास्ता है।
नई मेटा-एनालिसिस ने cannabis use और psychosis के पहले शुरू होने के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध सामने रखा है। अध्ययन में कुल मिलाकर cannabis users में psychosis की शुरुआत औसतन करीब 2.5 साल पहले देखी गई। 20-29 वर्ष के समूह में यह अंतर करीब 4.4 साल और 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र वाले समूह में 6.3 साल से ज्यादा पाया गया।
फिर भी इन आंकड़ों को डर फैलाने के बजाय सही संदर्भ में समझना जरूरी है। यह अध्ययन यह साबित नहीं करता कि cannabis लेने वाले हर व्यक्ति को psychosis होगा। यह केवल बताता है कि जिन लोगों में psychosis विकसित हुआ, उनमें cannabis use के साथ बीमारी की शुरुआत अपेक्षाकृत पहले होने का संबंध देखा गया।
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर विशेषज्ञ से सलाह और सही उपचार से कई मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को बेहतर तरीके से manage किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। इसे किसी व्यक्ति के लिए मेडिकल निदान या उपचार की सलाह न माना जाए। किसी भी मानसिक स्वास्थ्य समस्या या नशीले पदार्थ के इस्तेमाल को लेकर चिंता होने पर योग्य डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
A new UNSW Sydney meta-analysis examining 149 studies and more than 71,000 people found a significant association between cannabis use and earlier psychosis onset. The research suggests that cannabis users who developed psychosis in their 20s experienced onset several years earlier, while the difference was even greater among people who developed psychosis after age 30. The findings add to existing evidence about cannabis, THC, psychosis risk and mental health, while researchers caution that the results show an association rather than proving that cannabis causes psychosis in every individual.



















