AIN NEWS 1: लखनऊ के काकोरी कस्बे स्थित शीतला मंदिर में बुधवार को आयोजित भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब मलिहाबाद सुरक्षित विधानसभा सीट से भाजपा विधायक जय देवी कौशल ने मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान उनके साथ भेदभाव किए जाने का आरोप लगाया। विधायक का कहना है कि उन्हें पूजा की प्रक्रिया में शामिल नहीं होने दिया गया और यहां तक कि अगरबत्ती तथा नारियल चढ़ाने की अनुमति भी नहीं दी गई।
विधायक ने आरोप लगाया कि उनके साथ ऐसा व्यवहार उनकी जातिगत पहचान की वजह से किया गया। हालांकि, मंदिर प्रबंधन ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। इसलिए फिलहाल मामले में जातिगत भेदभाव को सिद्ध तथ्य नहीं, बल्कि विधायक का आरोप माना जाना चाहिए।
शीतला मंदिर में कार्यक्रम के दौरान हुआ विवाद
मामला काकोरी कस्बे के शीतला मंदिर का है। बुधवार को मंदिर परिसर में जीर्णोद्धार से जुड़े काम के लिए शिलान्यास और भूमिपूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में मलिहाबाद विधायक जय देवी कौशल समेत स्थानीय जनप्रतिनिधि और मंदिर से जुड़े लोग मौजूद थे।

कार्यक्रम के दौरान ही विधायक और मंदिर प्रबंधन के बीच कथित तौर पर पूजा को लेकर विवाद हो गया। बाद में विधायक ने मीडिया के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की और मंदिर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
जय देवी कौशल का कहना है कि वह मंदिर में पूजा करने पहुंची थीं, लेकिन उन्हें पूजा में अपेक्षित तरीके से शामिल नहीं किया गया। उनके मुताबिक, उन्हें अगरबत्ती और नारियल तक चढ़ाने की अनुमति नहीं मिली। विधायक ने इसे अपने लिए अपमानजनक बताते हुए जातिगत भेदभाव से जोड़ दिया।
विधायक बोलीं- पासी समाज से होने की वजह से किया गया भेदभाव
जय देवी कौशल ने आरोप लगाया कि वह पासी समाज से आती हैं और इसी वजह से उनके साथ मंदिर में अलग व्यवहार किया गया। उन्होंने इसे एक सुनियोजित साजिश तक बताया है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विधायक ने सवाल उठाया कि जिस मंदिर के विकास के लिए उन्होंने सरकारी स्तर पर धनराशि स्वीकृत कराने में भूमिका निभाई, उसी मंदिर में उन्हें पूजा करने से क्यों रोका गया।
हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि जातिगत भेदभाव का आरोप अभी जांच का विषय है। उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसा कोई प्रशासनिक या पुलिस निष्कर्ष सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि विधायक को वास्तव में उनकी जाति के कारण पूजा से रोका गया था।
मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए विधायक के प्रयास का दावा
इस विवाद का एक अहम पहलू मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए स्वीकृत धनराशि भी है। रिपोर्टों के अनुसार, पर्यटन विभाग ने काकोरी के शीतला मंदिर के विकास और जीर्णोद्धार के लिए करीब 76 लाख रुपये मंजूर किए हैं।
विधायक पक्ष का कहना है कि इस धनराशि को स्वीकृत कराने में जय देवी कौशल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसी वजह से विधायक ने मंदिर में अपने साथ हुए कथित व्यवहार पर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में विकास कार्य की राशि को लेकर अलग आंकड़े भी सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में करीब 76 लाख रुपये, जबकि कुछ में इससे अधिक राशि का उल्लेख है। इसलिए आधिकारिक दस्तावेज सामने आने तक सटीक राशि को लेकर सावधानी बरतना उचित होगा।
मंदिर प्रबंधन ने आरोपों को बताया गलत
विधायक के आरोप सामने आने के बाद मंदिर प्रबंधन ने भी अपना पक्ष रखा है। मंदिर प्रबंधक रमाकांत गुप्ता ने जातिगत भेदभाव के आरोपों को खारिज किया।
मंदिर प्रबंधन का कहना है कि मंदिर सभी श्रद्धालुओं के लिए खुला है और किसी व्यक्ति के साथ उसकी जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया गया। प्रबंधन ने विधायक के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि पूजा कार्यक्रम को लेकर जो बात सामने रखी जा रही है, वह वास्तविक स्थिति नहीं है।
यही वजह है कि इस मामले में फिलहाल दोनों पक्षों के दावे सामने हैं और पूरे विवाद की वास्तविक वजह को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई है।
कार्यक्रम में कौन-कौन रहा मौजूद?
भूमिपूजन और शिलान्यास कार्यक्रम में विधायक जय देवी कौशल के अलावा स्थानीय स्तर के कई जनप्रतिनिधि और भाजपा पदाधिकारी मौजूद थे।
रिपोर्ट के अनुसार कार्यक्रम में नगर पंचायत अध्यक्ष रोहित साहू, भाजपा मंडल अध्यक्ष विपिन राजपूत, सभासद प्रतिनिधि लवकुश यादव, मंदिर प्रबंधक रमाकांत गुप्ता और पुजारी शैलेंद्र बाजपेयी सहित कई लोग मौजूद थे।
ऐसे में कार्यक्रम के दौरान वास्तव में क्या हुआ, इसे लेकर मौजूद लोगों के बयान भी आगे की स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
बेटे विकास किशोर ने भी उठाया मामला
विवाद सामने आने के बाद भाजपा विधायक के बेटे विकास किशोर ने भी सोशल मीडिया के जरिए मामले को उठाया। उन्होंने मंदिर प्रबंधन के व्यवहार पर सवाल खड़े किए और इसे गंभीर मुद्दा बताया। इसके बाद विवाद ने राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और विधायक के पति कौशल किशोर ने भी मामले पर नाराजगी जताई है। परिवार की ओर से इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लिया जा रहा है।
आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता भी पहुंचे मंदिर
मामला सार्वजनिक होने के बाद आजाद समाज पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मंदिर पहुंचे। रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी के जिलाध्यक्ष अजय भारती के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया।
स्थिति को देखते हुए पुलिस भी मौके पर पहुंची। काकोरी इंस्पेक्टर सतीश राठौर पुलिस बल के साथ वहां पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे लोगों को शांत कराया। फिलहाल मामला किसी बड़े टकराव में तब्दील नहीं हुआ।
क्या जातिगत भेदभाव साबित हो गया?
इस सवाल का जवाब फिलहाल नहीं है।
यह जरूर पुष्ट है कि विधायक जय देवी कौशल ने मंदिर में पूजा को लेकर आपत्ति जताई और जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया। उनके आरोपों की कई मीडिया संस्थानों ने रिपोर्टिंग की है। लेकिन दूसरी तरफ मंदिर प्रबंधन ने आरोपों को गलत बताया है। उपलब्ध रिपोर्टों में अभी तक ऐसी कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है, जो यह प्रमाणित करती हो कि विधायक के साथ उनकी जाति के कारण भेदभाव किया गया।
इसलिए खबर में यह लिखना अधिक उचित होगा कि “विधायक ने जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया”, न कि “मंदिर में जातिगत भेदभाव हुआ।”
आगे क्या हो सकता है?
जय देवी कौशल ने संकेत दिया है कि वह इस मामले को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और संगठन के सामने रखेंगी। अगर प्रशासनिक स्तर पर शिकायत की जाती है तो संबंधित अधिकारी दोनों पक्षों के बयान लेकर मामले की जांच कर सकते हैं।
फिलहाल विवाद का केंद्र पूजा में शामिल होने को लेकर विधायक की शिकायत और मंदिर प्रबंधन का इससे इनकार है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बयान और किसी आधिकारिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के पीछे वास्तविक वजह क्या थी।
कुल मिलाकर, काकोरी के शीतला मंदिर में हुआ विवाद अब केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहा है। विधायक द्वारा लगाए गए जातिगत भेदभाव के आरोपों ने इसे राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बना दिया है। वहीं मंदिर प्रबंधन ने आरोपों को खारिज कर अपना पक्ष रख दिया है। ऐसे में निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए दोनों पक्षों के दावों को सामने रखना और जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना जरूरी है।
Lucknow Kakori Sheetla Temple controversy has emerged after BJP MLA Jai Devi Kaushal alleged caste discrimination during a temple worship and bhoomi pujan ceremony. The Malihabad MLA claimed she was not allowed to offer incense and coconut, while the temple management denied the allegations. The controversy involving Jai Devi Kaushal, Kaushal Kishore, Kakori Sheetla Temple and Lucknow politics is being closely watched for further administrative or official action.



















