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अंतरिक्ष से लौटे शुभांशु शुक्ला: पत्नी और बेटे से मिलते ही बोले – “इन्हें गले लगाना ही घर जैसा लगा”?

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AIN NEWS 1: 15 जुलाई 2025 को भारत के पहले अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) यात्री, समूह कप्तान शुभांशु शुक्ला, धरती पर लौटे। 18 दिनों की ऐतिहासिक उड़ान के बाद उन्होंने 16 जुलाई को अपनी पत्नी कामना और छह साल के बेटे कियाश से जोरदार गले-मुट्ठी की। यह सगाई और भी भावुक थी क्योंकि वे पहले दो महीने लंबी क्वारंटीन के कारण करीब नहीं आ पाए थे।

क्वारंटीन और तैयारियों की कहानी

शुभांशु ने करीब 60 दिन पहले ही क्वारंटीन शुरू किया था ताकि उनकी ISS उड़ान सुरक्षित हो सके। इस दौरान घर वालों से मिलने भी दूरी रखनी पड़ी—उनका बेटा कियाश मिलने पर पुछता था: “क्या मेरे हाथ में कीटाणु हैं?”, और गुनगुनाते हुए बार-बार हाथ धोकर मिलने की अनुमति मांगता था। इस दूरी के बीच भी कामना ने उन्हें प्यार से तैयार रखा, जिससे उनका मन स्थिर बना रहा ।

कोलंबियाई कैप्सूल और वसूली प्रक्रिया

ISS से पृथ्वी आने के बाद उनका Dragon स्पेसक्राफ्ट कैप्सूल पॉल्टिक महासागर में सुरक्षित रूप से उतरा। वैज्ञानिक-संबंधित कप्तान पिग्गी व्हिटसन, पोलैंड के झ़्लावोस उज़नांस्की और हंगरी के तिबोर कापु समेत अन्य क्रू मेंबर्स के साथ शुभांशु की वापसी ब्लॉकबस्टर बनी। उनकी वसूली तुरंत हो गई और कुछ घंटों में वे आराम और मेडिकल जांच के बाद Houston के परिवार केंद्र में पहुंचे ।

23 घंटे की पृथ्वी यात्रा और पुनरुद्धार

Dragon कैप्सूल की 22‑23 घंटे की यात्रा के बाद उन्हें पृथ्वी पर लाया गया। अगले फेज में उनका सात दिन तक का पुन:स्थापना (rehabilitation) कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसमें उनकी धड़कन, संतुलन और हड्डियों की रिकवरी शामिल थी ।

संवेदना भरा मिलन

16 जुलाई को अस्पताल परिसर में कामना और कियाश के साथ शुभांशु का मिलन बेहद दिल छू लेने वाला था—कामना की आँखों में आँसू थे, कियाश ने पिता को सीने से लगाया। उन्होंने इंस्टा पोस्ट में लिखा:

“वापस आकर अपने परिवार को गले लगाना ‘घर जैसा’ लगा।”  

उन्होंने आगे कहा:

 “अंतरिक्ष अद्भुत है, लेकिन अपने प्रियजनों को लंबे समय बाद देखने की संभावना और भी अद्भुत है।”  

“आज ही एक प्रिय व्यक्ति को ढूंढ़िए और बताइए कि आप उनसे कितना प्यार करते हैं। हम अक्सर जिंदगी में व्यस्त हो जाते हैं, और उन लोगों की अहमियत भूल जाते हैं।” उनके शब्द दिल में उतर जाते हैं ।

वैज्ञानिक योगदान और भविष्य की राह

लोहा मानते हुए, शुभांशु ने ISS में सात वैज्ञानिक प्रयोग किए —बायोलॉजी, मैटेरियल साइंस और AI से जुड़े कार्य। उनके योगदान से भारत के Gaganyaan मिशन की तैयारी और मजबूत होगी ।

राष्ट्रीय प्रतिक्रिया

कबिनेट की प्रशंसा: भारत सरकार ने उनके मिशन को युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत बताया ।

भविष्य की योजना: Gaganyaan मिशन (2027) के लिए उनकी भूमिका प्रमुख होगी, जिसमें उन्होंने खुद प्रशिक्षण और महत्वपूर्ण अनुभव हासिल किये हैं ।

शुभांशु शुक्ला की सुरक्षित वापसी और घर आकर अपनी पत्नी और बेटे से मिलना सिर्फ एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं—बल्कि उनमें मानवीय जुड़ाव, परिवार की अहमियत और देश के लोगों के लिए प्रेरणा है। उनका संदेश साफ है: चाहे इंसान अंतरिक्ष की ऊँचाइयों पर क्यों न पहुंच जाए, घर की गंध और अपनों का प्यार उससे कहीं ऊपर होता है।

Subhanshu Shukla, India’s first astronaut to live aboard the International Space Station, returned on July 15 after an 18‑day mission and was greeted by his emotional homecoming with wife Kamna and six‑year‑old son Kiash. His heartfelt reunion, marked by the words “holding my family felt like home,” captured national attention, while his seven ISRO‑designed experiments on biology, material science, and AI reflect his pivotal role in advancing India’s Gaganyaan mission and human spaceflight ambitions.

 

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