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प्रो. अरविंद कुमार वर्मा को निदेशक पद से हटाया गया, यूपी सरकार ने गाजियाबाद मेडिकल कॉलेज में किया स्थानांतरण!

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Date:

UP Government Removes Director of Homoeopathy, Professor Arvind Kumar Verma Transferred to Ghaziabad

प्रो. अरविंद कुमार वर्मा का स्थानांतरण: होम्योपैथी विभाग में प्रशासनिक बदलाव की बड़ी कार्यवाही

AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश सरकार के आयुष विभाग-2 ने एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए प्रोफेसर अरविंद कुमार वर्मा, निदेशक होम्योपैथी को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटा दिया है। उन पर अपने कर्तव्यों में लापरवाही और दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन न करने के गंभीर आरोप हैं। इसके साथ ही, उन्हें लखनऊ से स्थानांतरित कर गाजियाबाद के राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से संबद्ध कर दिया गया है।

पूरा घटनाक्रम विस्तार से (मानवीय अंदाज में)

उत्तर प्रदेश सरकार ने 16 जुलाई 2025 को एक आधिकारिक आदेश जारी किया जिसमें कहा गया कि आयुष विभाग के महानिदेशक की ओर से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, प्रो. अरविंद कुमार वर्मा अपने पद पर रहते हुए प्रशासनिक जिम्मेदारियों का सही ढंग से निर्वहन नहीं कर रहे थे। उनके द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और रिपोर्टों में गंभीर खामियां पाई गईं।

शासन ने इस आधार पर निर्णय लिया कि प्रो. वर्मा को मौजूदा पद से हटाकर किसी अन्य स्थान पर भेजा जाए, ताकि विभागीय कार्यों की गुणवत्ता बनी रहे। इसके तहत उन्हें उनके मूल संस्थान – राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, गाजियाबाद – स्थानांतरित कर दिया गया है।

इस आदेश को उत्तर प्रदेश सेवा नियमावली, 1999 के नियम-7 के अंतर्गत और सामान्य प्रशासनिक अनुशासन के तहत पारित किया गया है। यह कार्रवाई सरकार के अनुशासन और जवाबदेही की नीति का उदाहरण है।

सेवानिवृत्ति लाभ और नियमों की स्थिति

इस आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रो. वर्मा को जीवन निर्वाह भत्ते (pensionary benefits) और महंगाई भत्ता केवल उन्हीं शर्तों पर मिलेगा, जो उत्तर प्रदेश वित्तीय नियम संहिता भाग-2, खंड-2, नियम-53 में उल्लेखित हैं।

यदि वह जीवन निर्वाह भत्ते के पात्र पाए जाते हैं, तो उन्हें महंगाई भत्ता केवल उसी स्थिति में मिलेगा जब उनके जीवन निर्वाह भत्ते की गणना उनके पूर्व के अंतिम वेतन के आधार पर होगी। यदि उनकी सेवा में ऐसा कोई प्रावधान नहीं होता, तो उन्हें महंगाई भत्ते की सुविधा नहीं दी जाएगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह भत्ता केवल इस शर्त पर मिलेगा कि प्रो. वर्मा किसी और सेवा, व्यापार या रोजगार में शामिल न हों। यदि वह किसी अन्य सेवा में पाए जाते हैं, तो यह भत्ता स्वतः निरस्त हो जाएगा।

प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की शर्त

आदेश में एक महत्वपूर्ण शर्त यह भी जोड़ी गई है कि प्रो. वर्मा को यह प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा कि वह अब किसी भी प्रकार की सरकारी सेवा या अन्य व्यवसाय में संलग्न नहीं हैं। प्रमाण-पत्र प्रस्तुत होने के बाद ही उन्हें संबंधित भुगतान किया जाएगा।

सरकारी निर्णय का निष्कर्ष

यह आदेश शासन स्तर पर अनुमोदन प्राप्त होने के बाद ही जारी किया गया है और इसके पीछे सरकार की यह मंशा है कि विभागीय संचालन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बना रहे। यह कार्यवाही उत्तर प्रदेश सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता को दर्शाती है।

The Uttar Pradesh Government has transferred Professor Arvind Kumar Verma from the post of Director of Homoeopathy due to administrative negligence. According to the official order dated July 16, 2025, the AYUSH department found discrepancies in his conduct and reports. He has been reassigned to the Government Homoeopathic Medical College and Hospital in Ghaziabad. This decision was made under the UP Government Servant Rules, ensuring accountability and administrative integrity in public service. The order also includes conditions regarding pension benefits and mandatory declarations for availing dearness allowance after retirement.

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