Kanwar Yatra 2025: 4.5 Crore Pilgrims Return from Haridwar Leaving 10,000 Metric Tons of Garbage
कांवड़ यात्रा 2025: हरिद्वार से लौटे करोड़ों श्रद्धालु, 10 हजार मीट्रिक टन कूड़ा छोड़ गए, सफाई में जुटा प्रशासन
AIN NEWS 1: हरिद्वार हर साल कांवड़ यात्रा के समय लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन जाता है। इस बार श्रावण कांवड़ मेले में करीब साढ़े चार करोड़ कांवड़ यात्री हरिद्वार पहुंचे और गंगाजल लेकर अपने घरों की ओर लौटे। हालांकि इस आस्था यात्रा के बाद हरिद्वार शहर में 10 हजार मीट्रिक टन कूड़े का ढेर रह गया, जिसने नगर निगम प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
सफाई में जुटा नगर निगम
नगर आयुक्त नंदन कुमार ने बताया कि गंगा घाटों और शहर के अन्य हिस्सों में गंदगी को साफ करने में कम से कम दो से तीन दिन का समय लगेगा। इसके लिए विशेष सफाई महाअभियान शुरू कर दिया गया है। नगर निगम ने चार नोडल अधिकारी और 11 मुख्य सफाई निरीक्षकों को अलग-अलग घाटों की जिम्मेदारी दी है।
सफाई के लिए 1,000 अतिरिक्त सफाईकर्मी, 15 ट्रैक्टर-ट्रालियां, 3 लोडर, 3 टिपर और 8 सीएनजी वाहन तैनात किए गए हैं। बुधवार शाम गंगा आरती से पहले सुभाष घाट, नाई सोता, बिरला घाट और कांगड़ा पुल क्षेत्रों में सफाई कराई गई। प्रशासन का दावा है कि गुरुवार सुबह तक सभी घाट चकाचक कर दिए जाएंगे।
कचरे का आंकड़ा चौंकाने वाला
कांवड़ यात्रा 11 जुलाई से शुरू हुई थी। शुरुआती दिनों में यात्रियों की संख्या थोड़ी कम थी, लेकिन यात्रा के आधे पड़ाव के बाद भीड़ ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। 19 जुलाई से डाक कांवड़ शुरू होने के बाद प्रतिदिन 1,000 से 1,200 मीट्रिक टन कचरा निकलने लगा। सामान्य दिनों में हरिद्वार से रोजाना 250-300 मीट्रिक टन कचरा निकलता है, लेकिन कांवड़ यात्रा के दौरान यह चार गुना से अधिक हो गया।
गंगा घाटों पर गंदगी का अंबार
हरकी पैड़ी और उसके आसपास के सभी घाट – मालवीय घाट, सुभाष घाट, महिला घाट, रोड़ी बेलवाला, पंतद्वीप, कनखल, भूपतवाला, ऋषिकुल मैदान, बैरागी कैंप – गंदगी से पाट दिए गए। जगह-जगह खाने के पैकेट, प्लास्टिक की बोतलें, पॉलिथीन, कपड़े, जूते-चप्पल और यहां तक कि खुले में शौच की वजह से दुर्गंध फैल गई।
प्लास्टिक बैन का उल्लंघन
हरिद्वार में प्लास्टिक पर प्रतिबंध है, लेकिन कांवड़ यात्रा के दौरान यह प्रतिबंध कागजों तक ही सीमित रहा। घाटों और बाजारों में प्लास्टिक की बोतलें, कैन, पन्नी, बरसाती और चटाई बेची जाती रहीं। रोड़ीबेलवाला, पंतद्वीप समेत कई क्षेत्रों में अस्थायी दुकानें सजी रहीं। प्रशासन की ओर से कुछ जगहों पर कार्रवाई हुई, लेकिन वह नाकाफी रही।
शहर के अंदरूनी हिस्सों की हालत
भीड़ के कारण शहर के अंदरूनी हिस्सों में भी सफाई व्यवस्था चरमरा गई। ज्वालापुर रेलवे रोड, पीपलान मोहल्ला ट्रांसफर स्टेशन जैसे स्थानों पर दोपहर तक गंदगी का ढेर लगा रहा। अपर रोड, मोती बाजार, बड़ा बाजार और अलकनंदा से पंतद्वीप घाट तक कचरा उठाने वाले वाहनों को पहुंचने में मुश्किलें आईं।
नगर निगम ने बताया कि सफाई कार्य रात के समय भी किया जा रहा है और शहर को सामान्य स्थिति में लाने में अभी दो से तीन दिन का समय लगेगा। इसके अलावा कीटनाशकों का छिड़काव भी कराया जा रहा है ताकि दुर्गंध और संक्रमण से बचाव हो सके।
हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान आने वाले श्रद्धालु आस्था के प्रतीक हैं, लेकिन स्वच्छता पर ध्यान न देना बड़ी समस्या बन गई। प्रशासन सफाई में जुटा है, लेकिन यह भी सच है कि जब तक श्रद्धालु स्वयं स्वच्छता का संकल्प नहीं लेते, तब तक ऐसी स्थिति दोहराई जाती रहेगी।
During the Kanwar Yatra 2025, over 4.5 crore pilgrims visited Haridwar to collect holy Ganga water, but left behind an astonishing 10,000 metric tons of garbage. The Haridwar Municipal Corporation has launched a massive cleanliness drive to clear the waste from Ganga ghats and city streets. Despite a plastic ban, widespread usage of polythene and plastic bottles worsened the waste crisis. Authorities have deployed over 1,000 sanitation workers and heavy machinery to restore the city’s cleanliness.


















