AIN NEWS 1 | रूस और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर से चरम पर पहुंच गया है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के नजदीक दो परमाणु पनडुब्बियों (न्यूक्लियर सबमरीन्स) की तैनाती का आदेश दिया। इसके जवाब में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बड़ा और कड़ा फैसला लेते हुए इंटरमीडिएट-रेंज मिसाइलों की तैनाती पर लगी रोक को हटाने की घोषणा कर दी है।
इससे दोनों देशों के बीच सुरक्षा संतुलन और वैश्विक स्थिरता को लेकर चिंता गहराने लगी है।
अमेरिका ने क्या किया जिससे रूस भड़का?
1 अगस्त 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ’ पर जानकारी दी कि उन्होंने दो परमाणु पनडुब्बियों को रणनीतिक रूप से रूस की सीमाओं के पास तैनात करने का आदेश दे दिया है। ट्रंप का यह कदम, रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के एक आक्रामक बयान के जवाब में बताया गया है।
इस घोषणा के बाद से ही मॉस्को में खलबली मच गई और पुतिन प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया।
रूस का जवाब: प्रतिबंध खत्म, मिसाइलें तैनात होंगी
रूस के विदेश मंत्रालय ने 4 अगस्त को स्पष्ट कर दिया कि अब देश इंटरमीडिएट और शॉर्ट-रेंज मिसाइलों पर लगी अपनी स्वयं की रोक को हटाने जा रहा है।
मंत्रालय ने बयान में कहा:
“रूस अब खुद को उन प्रतिबंधों से बंधा हुआ नहीं मानता जो इंटरमीडिएट-रेंज और शॉर्ट-रेंज मिसाइलों की तैनाती पर लगे थे।”
इस बयान के साथ ही यह भी पुष्टि हुई कि रूस अब ऐसी मिसाइलें तैनात करेगा जिनकी रेंज 500 से 5500 किलोमीटर तक हो सकती है।
पृष्ठभूमि: INF संधि क्या थी?
इस पूरे विवाद की जड़ INF ट्रीटी (Intermediate-Range Nuclear Forces Treaty) है, जो 1987 में अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ के बीच हुई थी। इसके तहत दोनों देशों ने सहमति दी थी कि वे ऐसी सभी मिसाइलों की तैनाती और निर्माण पर रोक लगाएंगे जिनकी रेंज 500 से 5500 किलोमीटर के बीच हो।
हालांकि, अमेरिका 2019 में इस संधि से बाहर हो गया, और रूस पर इसका उल्लंघन करने का आरोप भी लगाया था। अब जब अमेरिका ने अपने न्यूक्लियर हथियारों को रूस के करीब भेजा है, तो रूस ने भी इसे औपचारिक रूप से खत्म करने का ऐलान कर दिया है।
पुतिन पहले ही दे चुके थे संकेत
पुतिन ने दिसंबर 2024 में दिए एक इंटरव्यू में यह संकेत दिया था कि यदि हालात बिगड़े, तो रूस 2025 की दूसरी छमाही में इंटरमीडिएट रेंज की मिसाइलों को बेलारूस में तैनात कर सकता है।
उस समय इसे एक रणनीतिक चेतावनी माना गया था, लेकिन अब इसे क्रियान्वयन में लाया जा रहा है।
क्या बढ़ेगा परमाणु युद्ध का खतरा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटनाक्रम से दुनिया में रणनीतिक तनाव बढ़ेगा। अमेरिका और रूस के बीच ऐसे हालात आखिरी बार शीत युद्ध के समय देखने को मिले थे। अब जब दोनों देशों ने अपनी-अपनी मिसाइल और परमाणु क्षमताओं को एक-दूसरे के सामने लाना शुरू कर दिया है, तो यह नई रेस का संकेत भी माना जा रहा है।
रूस का अगला कदम क्या हो सकता है?
रूस अब न केवल अपने पुराने INF हथियारों को एक्टिव करेगा, बल्कि नई तकनीक से लैस इंटरमीडिएट मिसाइल सिस्टम को भी तैयार करने की योजना पर काम कर रहा है। इसका एक उद्देश्य यूरोप में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को संतुलित करना हो सकता है।
रूस यह स्पष्ट कर चुका है कि यदि अमेरिका अपने सैन्य बेस और मिसाइल सिस्टम को रूस के नजदीक बढ़ाता है, तो वे भी उसी स्तर की प्रतिक्रिया देंगे।
वैश्विक असर
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यूरोप के कई देश इस नई स्थिति से चिंतित हैं, क्योंकि वे अमेरिकी मिसाइल डिफेंस के सहयोगी हैं और रूस की मिसाइल रेंज में आते हैं।
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चीन जैसे देश इस टकराव का रणनीतिक लाभ उठाने की फिराक में होंगे।
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संयुक्त राष्ट्र और नाटो पर अब दबाव होगा कि वे इस विवाद को शांत करने के लिए डिप्लोमैटिक समाधान खोजें।
Tensions between the US and Russia have intensified as President Donald Trump deployed two nuclear submarines near Russian waters. In response, Russian President Vladimir Putin announced the end of the ban on intermediate-range missile deployment, signaling a major strategic shift. The decision follows the US withdrawal from the 1987 INF Treaty, which restricted missiles with ranges between 500 and 5500 km. With both superpowers ramping up their nuclear and missile capabilities, global concerns over a new arms race and nuclear escalation are mounting.


















