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ग्रेटर नोएडा में टीचर की गलती से 188 लोग हुए नुकसान में, सरकार को 1.22 करोड़ का फायदा?

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Greater Noida Liquor Shop Lottery: How a Teacher’s Mistake Cost 188 People and Benefited UP Government

ग्रेटर नोएडा में सरकारी टीचर की गलती से 188 लोग हुए नुकसान में, सरकार को हुआ 1.22 करोड़ का फायदा

AIN NEWS 1: ग्रेटर नोएडा में देशी शराब की दुकान के आवंटन में एक सरकारी शिक्षक की गलती 188 लोगों को भारी पड़ गई। इस गलती के कारण जहां आवेदनकर्ताओं को आर्थिक नुकसान हुआ, वहीं राज्य सरकार को 1.22 करोड़ रुपये का सीधा लाभ हुआ। मामला चिटहेरा गांव के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक से जुड़ा है, जिसने अपनी पहचान छिपाकर शराब की दुकान के लिए आवेदन किया था।

कैसे हुई यह गलती?

शासनादेश के अनुसार, कोई भी सरकारी कर्मचारी शराब दुकान के आवंटन प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकता। लेकिन चिटहेरा गांव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत एक शिक्षक ने इस नियम की अनदेखी करते हुए शराब की दुकान के लिए आवेदन कर दिया।

संयोगवश, लॉटरी में उसका नाम निकल आया और दुकान का आवंटन उसे मिल गया। जब आबकारी विभाग को इस बात की जानकारी मिली कि आवेदक एक सरकारी कर्मचारी है, तो आवंटन को तुरंत रद्द कर दिया गया।

188 लोगों को नुकसान कैसे हुआ?

शराब की दुकान के आवंटन के लिए आवेदन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को 65,000 रुपये प्रोसेसिंग फीस जमा करनी पड़ती है।

पहली लॉटरी: 16 लोगों ने आवेदन किया था, जिससे सरकार को 10.40 लाख रुपये मिले।

लॉटरी रद्द: शिक्षक के कारण पूरी प्रक्रिया रद्द हो गई, और सभी आवेदकों की प्रोसेसिंग फीस सरकारी खजाने में चली गई।

दूसरी लॉटरी: दोबारा आवेदन मांगे गए, जिसमें 173 लोगों ने आवेदन किया और सरकार को 1.12 करोड़ रुपये की प्रोसेसिंग फीस मिली।

आखिरकार, सरकार को हुआ 1.22 करोड़ रुपये का लाभ

इस पूरे घटनाक्रम में कुल 189 लोगों ने आवेदन किया, लेकिन दुकान सिर्फ एक व्यक्ति को ही मिली। यानी 188 लोगों की प्रोसेसिंग फीस सरकारी खजाने में चली गई। इस तरह, इस गलती के कारण सरकार को कुल 1.22 करोड़ रुपये का राजस्व मिला।

शराब की दुकानें और लॉटरी प्रक्रिया

ग्रेटर नोएडा में कुल 501 शराब की दुकानें हैं। आबकारी विभाग ने 6 मार्च को सभी दुकानों के लिए ई-लॉटरी प्रक्रिया पूरी की थी।

6 मार्च को 18,229 आवेदकों ने आवेदन किया और विभिन्न दुकानों के हिसाब से 139 करोड़ रुपये का राजस्व सरकार को प्राप्त हुआ।

ई-लॉटरी प्रक्रिया के जरिए 500 दुकानों का आवंटन हो चुका था, लेकिन विवाद के कारण एक दुकान का आवंटन अब किया गया।

शिक्षक की एक गलती से सरकार को अप्रत्याशित मुनाफा

इस मामले से यह साफ होता है कि नियमों का पालन न करने पर कैसे आम लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। शिक्षक की गलती से 188 लोगों का पैसा बर्बाद हुआ, लेकिन राज्य सरकार को अप्रत्याशित रूप से 1.22 करोड़ रुपये का फायदा हो गया।

A government teacher’s mistake in the Greater Noida liquor shop allotment process led to financial losses for 188 applicants while benefiting the UP government by ₹1.22 crore. The excise department in Uttar Pradesh canceled the liquor shop allocation after discovering the applicant was a government employee, which is against the UP liquor policy. Due to this cancellation, all processing fees paid by 188 applicants were forfeited, generating huge revenue for the state. This incident highlights how a single mistake can affect many while boosting government earnings from liquor license applications.

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