PM Modi to Chair High-Level Cabinet Meeting Amid US Tariff Hike on Indian Exports
भारतीय निर्यात पर अमेरिका की टैरिफ वृद्धि: पीएम मोदी की अध्यक्षता में आज होगी उच्च स्तरीय कैबिनेट बैठक
AIN NEWS 1 नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दोपहर 1 बजे एक महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करने वाले हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका ने भारत समेत 60 से अधिक देशों के उत्पादों पर आयात शुल्क (टैरिफ) में भारी वृद्धि कर दी है। भारत के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि अमेरिकी सरकार ने भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का फैसला किया है, जिससे व्यापार संबंधों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
अमेरिका ने क्यों बढ़ाया टैरिफ?
व्हाइट हाउस द्वारा घोषित नई नीति के तहत, अमेरिका अब 60 से अधिक देशों और यूरोपीय संघ से आयात होने वाले उत्पादों पर 10 से 20 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगा रहा है।
भारत जैसे देशों पर 50% तक टैरिफ
जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ पर 15% टैरिफ
वियतनाम, ताइवान और बांग्लादेश पर 20% तक टैरिफ
यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में उठाया गया है, जिनकी योजना है कि यह दबाव अन्य देशों को अमेरिका में निवेश के लिए प्रेरित करेगा।
भारत के लिए क्या हैं संभावित परिणाम?
अमेरिका का यह कदम भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है, खासकर मसाले, कृषि उत्पाद, और दुग्ध उत्पाद निर्यात करने वालों के लिए।
अमेरिका में भारतीय मसालों की मांग काफी अधिक है।
पिछले साल अमेरिका ने भारत से करीब 41 करोड़ डॉलर के मसाले आयात किए थे।
नया टैरिफ सीधा आम अमेरिकी उपभोक्ताओं की रसोई पर असर डालेगा क्योंकि मसालों की कीमतें बढ़ेंगी।
अमेरिकियों की रसोई पर असर
अमेरिका के एक प्रमुख व्यापार संघ ने चेतावनी दी है कि यह टैरिफ केवल भारत को नहीं, बल्कि अमेरिका को भी प्रभावित करेगा।
भारत से आयात होने वाले मसाले जैसे हल्दी, मिर्च, धनिया आदि की कीमतें बढ़ेंगी।
रेस्टोरेंट, खाद्य निर्माता, और घरेलू रसोई तक इसकी सीधी मार पड़ेगी।
भारत की रणनीति क्या होगी?
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में होने वाली आज की बैठक में यह तय किया जाएगा कि भारत इस अमेरिकी निर्णय पर कैसे प्रतिक्रिया देगा।
बैठक में वाणिज्य मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो सकते हैं।
यह भी संभव है कि भारत डब्ल्यूटीओ (WTO) का दरवाजा खटखटाए या फिर प्रतिशोधात्मक टैरिफ की रणनीति पर विचार करे।
कृषि और दुग्ध उत्पादों पर गतिरोध
भारत और अमेरिका के बीच जो द्विपक्षीय व्यापार समझौता बनने की संभावनाएं थीं, वे भी इस निर्णय के कारण धुंधली पड़ सकती हैं।
अमेरिका चाहता है कि भारत अपना दुग्ध और कृषि उत्पाद बाजार पूरी तरह खोले।
लेकिन भारत की घरेलू नीतियां, छोटे किसानों और डेयरी उत्पादकों की सुरक्षा को ध्यान में रखती हैं।
इसी बिंदु पर दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत बिना किसी परिणाम के समाप्त हो चुकी हैं।
कैबिनेट बैठक में क्या हो सकता है निर्णय?
प्रधानमंत्री की इस बैठक से कई महत्वपूर्ण निर्णय निकल सकते हैं:
भारतीय निर्यातकों को समर्थन देने के लिए नई राहत योजनाएं
अमेरिकी टैरिफ के जवाब में नीति संबंधी बदलाव
भारत की WTO में शिकायत दर्ज कराने की संभावना
द्विपक्षीय संवाद को नया रूप देने की पहल
दोनों देशों के रिश्तों पर असर
यह पूरा घटनाक्रम भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को प्रभावित कर सकता है। दोनों देश रणनीतिक साझेदार हैं, लेकिन व्यापारिक तनाव से इस रिश्ते में खटास आ सकती है।
हालांकि दोनों पक्षों के लिए आर्थिक मजबूरियां भी हैं—जहां अमेरिका भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार में दिलचस्पी रखता है, वहीं भारत अमेरिका को अपने तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र में निवेशक के रूप में देखता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में दोनों देश किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।
अमेरिका द्वारा उठाए गए इस कदम का प्रभाव केवल सरकारी नीतियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम जनता, उद्योग और वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ेगा। प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में होने वाली यह कैबिनेट बैठक इस समय की सबसे अहम नीति-निर्माण प्रक्रिया साबित हो सकती है।
Prime Minister Narendra Modi is set to chair a high-level cabinet meeting today to assess the impact of the United States’ recent decision to increase import tariffs on Indian goods by up to 50%. The move by the US government underlines rising trade tensions between the two nations. The meeting will focus on formulating India’s strategic response and evaluating the implications for Indian exporters, particularly those in the spice and dairy sectors. With the US imposing additional duties on over 60 countries, including India, Japan, and the EU, this development could reshape Indo-US bilateral trade relations.



















