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कानपुर में फर्जी FIR से वसूली का काला खेल, ऑपरेशन महाकाल ने खोला बड़ा राज़!

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Ground Report: Kanpur SIT Investigation into Akhilesh Dubey’s Fake FIR Racket under Operation Mahakal

ग्राउंड रिपोर्ट: कानपुर में फर्जी FIR से वसूली का काला खेल, ऑपरेशन महाकाल ने खोला बड़ा राज़

AIN NEWS 1 कानपुर, उत्तर प्रदेश — कानपुर की गलियों में इन दिनों एक ही नाम गूंज रहा है — “ऑपरेशन महाकाल”। लोग चाय की दुकानों पर बैठकर चर्चा कर रहे हैं कि क्या इस बार सच में भ्रष्टाचार के गढ़ को तोड़ा जाएगा, या फिर यह भी कुछ दिनों में ठंडा पड़ जाएगा।

सुबह 9 बजे कलक्टरगंज थाने के बाहर भीड़ है। किसी के हाथ में कागज हैं, किसी के चेहरे पर थकान। वहां खड़े 45 वर्षीय रमेश यादव फुसफुसाते हैं, “नाम मत लिखना भाई, लेकिन इस शहर में जो चाहे, जैसे चाहे, फंसा सकता है। मैं खुद भुगत चुका हूं।”

पास ही एक चायवाले की आवाज़ आती है — “जब पुलिस और वकील एक हो जाएं, तो फिर कानून सिर्फ ताकतवर के लिए रह जाता है।”

जांच की शुरुआत

एसआईटी (Special Investigation Team) ने हाल ही में खुलासा किया कि अधिवक्ता अखिलेश दुबे और उनके करीबी, सरकारी सिस्टम में बैठे कुछ अधिकारियों की मदद से, झूठी FIR दर्ज करवाकर लोगों से मोटी रकम वसूलते थे।

तरीका सीधा था लेकिन घातक —

1. किसी व्यापारी, प्रॉपर्टी मालिक या आम नागरिक को टारगेट करना।

2. उस पर दुष्कर्म, छेड़छाड़ या धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाना।

3. पुलिस और सिस्टम में मौजूद ‘अपने लोगों’ के जरिए FIR दर्ज कराना।

4. गिरफ्तारी और बदनामी के डर से समझौते के नाम पर लाखों रुपये लेना।

पीड़ितों की सच्ची कहानियां

राकेश अग्रवाल (38, व्यापारी)

“एक दिन अचानक पता चला कि मेरे खिलाफ छेड़छाड़ का केस दर्ज हो गया है। जिनसे कभी मिला तक नहीं, उनके नाम से शिकायत आ गई। कुछ ही दिनों में मोहल्ले में मेरी इज्जत मिट्टी में मिल गई। आखिर मजबूरी में पैसे देकर केस खत्म करवाना पड़ा।”

अमित तिवारी (42, छोटे व्यापारी)

“मुझे कहा गया कि अगर समझौता नहीं किया, तो जेल जाने के लिए तैयार रहो। पुलिस और गिरोह के लोग ऐसे समन्वय से काम कर रहे थे, जैसे सब एक ही टीम के हों।”

सुनीता मिश्रा (55, गृहिणी)

“मेरे बेटे पर गलत केस लगाया गया। हमने गहने बेचकर पैसे दिए, ताकि उसे जेल न जाना पड़े। हम आम लोग कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने में जिंदगी बर्बाद नहीं कर सकते।”

सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता

जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क सिर्फ वकील और दलालों तक सीमित नहीं था। इसमें पुलिसकर्मी, नगर निगम के कर्मचारी, जिला प्रशासन के अफसर और कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) के अधिकारी भी शामिल थे।

भाजपा के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक रवि सतीजा ने तो यहां तक आरोप लगाया कि एक पुलिस इंस्पेक्टर खुद उन्हें अखिलेश दुबे के दफ्तर ले गया था। अब यह इंस्पेक्टर भी जांच के घेरे में है।

ऑपरेशन महाकाल का मिशन

5 अगस्त 2025 को शुरू हुआ ऑपरेशन महाकाल सिर्फ इस गिरोह को खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि पूरे शहर में फैले भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ने के लिए है।

इस मिशन के तहत इन विभागों पर भी जांच चल रही है —

पुलिस

नगर निगम

KDA

RTO

स्वास्थ्य विभाग

ट्रैफिक पुलिस

सामने आए आरोप:

सरकारी और निजी जमीनों पर कब्जा

फर्जी दस्तावेज बनवाना

अवैध नोटिस जारी करना

लाइसेंस और परमिट के नाम पर वसूली

जांच अधिकारियों का रुख

कानपुर के पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार का कहना है,

“अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ दो से ज्यादा शिकायतें मिलीं, तो विभागीय और कानूनी, दोनों कार्रवाई होगी। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।”

जनता की उम्मीदें और डर

थाने के बाहर खड़े बुजुर्ग रामनाथ शुक्ल कहते हैं,

“हमने सोचा था कि कानून हमें बचाएगा, लेकिन यहां तो डर ही डर है। अब अगर यह ऑपरेशन सफल हुआ, तो शायद भरोसा लौटे।”

शहर के व्यापारियों में भी राहत और डर दोनों हैं। राहत इसलिए कि सिस्टम को साफ करने का प्रयास हो रहा है, और डर इसलिए कि कहीं यह मामला भी राजनीतिक दबाव में दब न जाए।

आगे की योजना

एसआईटी अब तक आरोपियों की सूची तैयार कर चुकी है और संबंधित विभागों को रिपोर्ट भेज दी है। आगे होने वाली कार्रवाई में शामिल हैं —

मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी

भ्रष्ट अधिकारियों की संपत्ति की जांच

इसी तरह के अन्य रैकेट्स का पर्दाफाश

कानपुर का यह मामला सिर्फ एक शहर का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम का आईना है — जहां सत्ता, भ्रष्टाचार और अपराध मिलकर आम आदमी का जीना मुश्किल बना देते हैं।

ऑपरेशन महाकाल ने उम्मीद जगाई है कि शायद इस बार गुनहगारों को सजा और पीड़ितों को इंसाफ मिलेगा। लेकिन यह तभी मुमकिन होगा, जब जांच अंत तक निष्पक्ष रहे और किसी दबाव में न रुके।

This ground report from Kanpur uncovers the SIT’s investigation into lawyer Akhilesh Dubey’s fake FIR extortion racket, revealing deep-rooted corruption involving police, KDA officials, and other government bodies. Operation Mahakal’s mission to crack down on land grabs, forged documents, and systemic exploitation has brought hope to victims, as chilling accounts expose the fear and pressure they faced.

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