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दिल्ली: हुमायूं मकबरे में हादसा, पांच लोगों की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

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AIN NEWS 1 | राजधानी दिल्ली के निज़ामुद्दीन इलाके में स्थित ऐतिहासिक हुमायूं मकबरे के परिसर में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ। इस हादसे में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जिनमें तीन महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक, मकबरे के पीछे की ओर फतेह शाह दरगाह का एक हिस्सा बारिश के कारण गिर गया। इस दौरान कई लोग वहीं रुके हुए थे, और मलबे में दब गए। राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू किए गए, जिसमें लगभग 10-12 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला गया। घायलों को एम्स और LNJP अस्पताल में भर्ती कराया गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन और सुरक्षा उपाय

हादसे के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और दिल्ली पुलिस के साथ-साथ आपदा प्रबंधन दल और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंची। उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन को रातभर जारी रखा। घायल लोगों का प्राथमिक उपचार घटनास्थल पर किया गया और गंभीर मामलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिकारियों का कहना है कि बारिश और मलबे की स्थिति रेस्क्यू कार्य को चुनौतीपूर्ण बना रही है।

ASI की देखरेख और मकबरे का महत्व

हुमायूं मकबरे की देखरेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) करता है। यह मकबरा दिल्ली में पर्यटन और इतिहास प्रेमियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्थल है। छुट्टियों और स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसरों पर यहाँ भारी भीड़ उमड़ती है। हालांकि ASI समय-समय पर सुरक्षा और रख-रखाव के काम करती रहती है, फिर भी बारिश जैसी अप्रत्याशित परिस्थितियां कभी-कभी खतरे को बढ़ा देती हैं।

हुमायूं मकबरे का इतिहास

हुमायूं मकबरा, जिसे मकबरा-ए-हुमायूं के नाम से भी जाना जाता है, मुगल सम्राट हुमायूं की याद में उनकी पहली पत्नी बेगा बेगम (हाजी बेगम) द्वारा 1569-70 में बनवाया गया था। इस भव्य स्मारक का डिज़ाइन फ़ारसी वास्तुकार मिर्क मिर्ज़ा गियास और उनके बेटे सय्यद मुहम्मद ने तैयार किया था।

मकबरा भारतीय उपमहाद्वीप में पहले बगीचा-मकबरे के रूप में जाना जाता है। यह निज़ामुद्दीन पूर्व इलाके में स्थित है और इसके आसपास पुराना किला (दीना-पनाह) भी मौजूद है, जिसकी नींव हुमायूं ने 1533 में रखी थी।

वास्तुकला और संरचना

हुमायूं मकबरे में लाल बलुआ पत्थर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है। यह वास्तुकला में अनूठा उदाहरण है और इसे मुगल स्थापत्य का महत्वपूर्ण नमूना माना जाता है। 1993 में इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया। इसके बाद यहाँ संरक्षण और जीर्णोद्धार के बड़े पैमाने पर कार्य किए गए।

मुख्य मकबरे के साथ-साथ परिसर में कई छोटे स्मारक भी हैं। खास तौर पर पश्चिमी प्रवेश द्वार के पास ईसा खान नियाज़ी का मकबरा मौजूद है। ईसा खान सूरी वंश के शेरशाह सूरी के दरबार में एक प्रमुख अफगान सरदार थे, जिन्होंने 1547 में मुगलों के खिलाफ युद्ध लड़ा था।

सुरक्षा और भविष्य की चुनौतियां

हुमायूं मकबरे जैसे ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा और संरचना का रख-रखाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश और प्राकृतिक घटनाओं से ऐसे हादसे कभी-कभी हो सकते हैं। ASI को यह सुनिश्चित करना होगा कि मलबा, ढांचे की कमजोरी या अन्य जोखिमों के कारण कोई और दुर्घटना न हो।

हुमायूं मकबरा न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मुगल वास्तुकला, बगीचा शैली और लाल बलुआ पत्थर के उपयोग का जीवंत उदाहरण भी है। इसे देखने आने वाले पर्यटक और इतिहास प्रेमियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था और मार्गदर्शन बेहद जरूरी है।

भावी कार्रवाई

ASI और स्थानीय प्रशासन ने इस हादसे की जांच शुरू कर दी है। हादसे की वजह, ढांचे की स्थिति और सुरक्षा मानकों की जांच की जाएगी। साथ ही यह तय किया जाएगा कि भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए कौन से कदम उठाए जाएं।

On August 15, 2025, a tragic accident occurred at Humayun’s Tomb in Delhi, where five people lost their lives after part of the Fateh Shah Dargah collapsed due to rain. The Archaeological Survey of India (ASI) oversees the site, which is a UNESCO World Heritage and a prominent example of Mughal architecture. Rescue operations continue, and authorities are investigating structural safety and preventive measures to avoid future incidents.

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