AIN NEWS 1 | रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका और भारत के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रशासनिक टीम ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने का फैसला लिया है। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर मोटा मुनाफा कमा रहा है और इसका सीधा फायदा कुछ चुनिंदा अमीर परिवारों को हो रहा है।
अमेरिकी वित्त मंत्री की सफाई
अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने मंगलवार (19 अगस्त 2025) को इस फैसले पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने रूस से तेल आयात अचानक कई गुना बढ़ा दिया है। पहले भारत अपनी जरूरत का 1% से भी कम तेल रूस से खरीदता था, लेकिन अब यह आंकड़ा 42% तक पहुंच चुका है। उनका कहना था कि भारत इस तेल को अपने घरेलू इस्तेमाल के साथ-साथ प्रोसेस करके दूसरे देशों को बेच रहा है और इससे अरबों डॉलर का फायदा कमा रहा है।
“भारत के कुछ रईस लोग उठा रहे फायदा”
स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मुनाफा केवल आम जनता तक सीमित नहीं है बल्कि भारत के कुछ चुनिंदा बड़े कारोबारी घरानों तक जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह परिवार इस संकट को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
चीन की स्थिति क्यों अलग?
जब पत्रकारों ने चीन पर अपेक्षाकृत कम टैरिफ (30%) लगाने की वजह पूछी, तो अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा – “चीन के आयात स्रोत विविध हैं। वह रूस से तेल जरूर खरीदता है, लेकिन उसका कुल आयात केवल 13% से बढ़कर 16% तक ही पहुंचा है। चीन अलग-अलग देशों से तेल आयात करता है, इसलिए उसकी स्थिति भारत जैसी नहीं है।”
भारत पर क्यों इतना कड़ा फैसला?
अमेरिका का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान जब पूरी दुनिया रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करने की कोशिश कर रही है, तब भारत का इस तरह सस्ता तेल खरीदना और उससे मुनाफा कमाना, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की रणनीति को कमजोर कर रहा है। इसी वजह से ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50% का भारी टैरिफ लगाया है, जो 27 अगस्त 2025 से लागू होगा।
भारत का मुनाफा कितना बड़ा?
अमेरिकी मंत्री के अनुसार, रूस से सस्ते दामों पर कच्चा तेल खरीदकर और उसे प्रोसेस कर बेचने से भारत ने अब तक 16 बिलियन डॉलर (लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा का मुनाफा कमाया है। उनका आरोप है कि यह मुनाफा राष्ट्रीय स्तर पर जनता की भलाई के लिए इस्तेमाल होने के बजाय अमीर घरानों की जेब में जा रहा है।
रूस का समर्थन और अमेरिका को चेतावनी
भारत पर लगाए गए इस जुर्माने के तुरंत बाद रूस ने नई दिल्ली का समर्थन किया। रूस का कहना है कि हर देश को यह अधिकार है कि वह किसके साथ व्यापार करे। मॉस्को ने अमेरिका को चेतावनी दी कि इस तरह की जबरदस्ती से वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंचेगा और कई देश अमेरिकी दबाव के खिलाफ खड़े हो सकते हैं।
भारत का दृष्टिकोण – ऊर्जा सुरक्षा प्राथमिकता
हालांकि भारत ने इस मुद्दे पर आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत का रुख साफ है – ऊर्जा सुरक्षा सबसे पहले। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है और उसे अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना ही होगा। रूस से सस्ता तेल खरीदना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद है क्योंकि इससे घरेलू स्तर पर महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है।
अमेरिकी प्रतिबंध और राजनीतिक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा केवल आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक भी है। ट्रंप प्रशासन आने वाले अमेरिकी चुनावों में कड़ा रुख दिखाकर घरेलू राजनीति में बढ़त लेना चाहता है। वहीं, भारत पर जुर्माना लगाने से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आ सकता है।
वैश्विक असर – ऊर्जा बाजार में हलचल
भारत पर लगाए गए इस टैरिफ का असर केवल द्विपक्षीय संबंधों पर नहीं पड़ेगा बल्कि पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर दिखेगा। भारत रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाला प्रमुख देश बन चुका है। ऐसे में अगर भारत पर भारी शुल्क लगाया जाता है, तो इसका असर पेट्रोल-डीजल की वैश्विक कीमतों पर भी पड़ सकता है।
नतीजा – आगे क्या होगा?
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस टैरिफ का कैसे जवाब देता है। क्या भारत अमेरिकी दबाव में आकर रूसी तेल आयात कम करेगा या फिर रूस के साथ व्यापारिक संबंध और मजबूत करेगा? फिलहाल इतना तय है कि ट्रंप प्रशासन का यह कदम भारत-अमेरिका संबंधों को नई परीक्षा में डाल देगा।



















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