AIN NEWS 1 | दिल्ली ने इस साल अगस्त महीने में वो नज़ारा देखा, जो पिछले डेढ़ दशक में नहीं हुआ था। लगातार बरसात ने जहां राजधानी की तपती गर्मी और उमस से लोगों को राहत दी, वहीं जलभराव, जाम और हादसों ने मुश्किलें भी बढ़ा दीं। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस बार अगस्त में हुई बारिश ने 15 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
15 साल बाद टूटा रिकॉर्ड
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2025 में अब तक 399.8 मिमी बारिश दर्ज की गई है। यह आंकड़ा 2010 के बाद सबसे अधिक है। उस समय अगस्त में 455.8 मिमी बारिश हुई थी। मौसम विभाग का कहना है कि इस साल मानसून असामान्य रूप से लंबे समय तक सक्रिय रहा, जिसकी बड़ी वजह ला-नीना (La-Nina) की भौगोलिक घटना मानी जा रही है।
राहत और मुसीबत साथ-साथ
बारिश से एक ओर लोगों को चिलचिलाती गर्मी से राहत मिली, तो दूसरी ओर राजधानी की सड़कों पर जलभराव और जाम ने आमजन का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। कई जगहों पर पानी इतना भर गया कि लोग पैदल भी निकलना मुश्किल समझने लगे।
प्रमुख सड़कों पर भारी जाम
ऑफिस जाने वालों को घंटों का इंतज़ार
स्कूल बसें और यहां तक कि एम्बुलेंस तक जाम में फंसीं
MCD को लगातार पेड़ गिरने और जलभराव की शिकायतें मिलीं
दिल्ली यातायात पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि DND फ्लाईवे, आईटीओ, मथुरा रोड, गीता कॉलोनी, धौलाकुआं और बदरपुर-आश्रम मार्ग सबसे ज़्यादा प्रभावित रहे।
दीवार गिरने से बड़ा हादसा टला
बारिश के चलते पूर्वी दिल्ली के मंडावली इलाके में एक पुरानी दीवार ढह गई। इस हादसे में पास में खेल रहे तीन बच्चे घायल हो गए। गनीमत यह रही कि उन्हें गंभीर चोटें नहीं आईं और वे बाल-बाल बच गए। हादसे के बाद इलाके के लोग डरे और प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाने लगे।
प्रशासन की तैयारी और कदम
दिल्ली नगर निगम (MCD) और लोक निर्माण विभाग (PWD) ने राहत कार्यों के लिए टीमें तैनात कीं।
पंप लगाकर पानी निकालने की कोशिशें तेज़ की गईं
पेड़ों के गिरने और दीवार ढहने से जुड़े मामलों पर फौरन कार्रवाई की गई
सफाई कर्मचारियों और इंजीनियरों को जलभराव वाले इलाकों में लगाया गया
IMD ने चेतावनी दी है कि आने वाले घंटों में भी दिल्ली में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, साथ ही तेज़ हवाएं भी चल सकती हैं।
सोशल मीडिया पर गुस्सा
सोशल मीडिया पर लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। कई यात्रियों ने शिकायत की कि जाम में फंसी एम्बुलेंस और स्कूल बसें चिंता का कारण बनीं। कुछ लोगों ने ट्वीट कर लिखा कि दिल्ली जैसे महानगर में हर साल बारिश के बाद हालात वही रहते हैं और सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठाती।
बारिश पर राजनीति भी गरमाई
जहां एक ओर दिल्लीवासी बारिश से जूझ रहे थे, वहीं दूसरी ओर राजधानी की राजनीति भी गर्म हो गई।
AAP और कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि भ्रष्टाचार और लापरवाही की वजह से दिल्ली जलमग्न हो गई है।
BJP की ओर से जवाब आया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की निगरानी में एजेंसियां तुरंत हरकत में आईं और हालात को संभालने की पूरी कोशिश की।
इस बयानबाजी से साफ है कि दिल्ली की बारिश अब सिर्फ मौसम की खबर नहीं रही, बल्कि राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गई है।
दिल्लीवासियों के लिए चुनौतियां
लगातार बारिश ने राजधानी में कई चुनौतियां खड़ी कर दीं—
स्वास्थ्य का खतरा – जलभराव से डेंगू, मलेरिया और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ा।
यातायात व्यवस्था चरमराई – लंबा जाम और पानी से भरी सड़कें।
आर्थिक असर – दुकानों और छोटे व्यापारियों को नुकसान।
शैक्षणिक व्यवधान – स्कूल बसें लेट, बच्चे समय पर स्कूल न पहुंच सके।
क्या कहता है मौसम विभाग?
IMD के अनुसार, दिल्ली में मानसून अभी और सक्रिय रह सकता है। सितंबर की शुरुआत में भी हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। हालांकि, भारी बारिश की संभावना फिलहाल कम बताई गई है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ला-नीना प्रभाव के चलते मानसून लंबे समय तक सक्रिय रह सकता है, जिससे सितंबर तक बारिश सामान्य से अधिक हो सकती है।
दिल्ली में अगस्त 2025 की बारिश ने राहत और मुसीबत दोनों ही दी। उमस से परेशान लोगों को जहां ठंडी हवाओं और पानी की बौछारों ने सुकून दिया, वहीं जलभराव, जाम और हादसों ने उनकी मुश्किलें भी बढ़ा दीं।
यह बारिश एक बार फिर ये सवाल खड़ा करती है कि क्यों हर साल राजधानी में बारिश के साथ ही जलभराव और अव्यवस्था देखने को मिलती है। क्या यह सिर्फ मौसम की मार है या फिर व्यवस्थाओं की लापरवाही? आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि सरकार और प्रशासन इन समस्याओं से निपटने के लिए कितनी गंभीरता से काम करते हैं।



















