AIN NEWS 1: बॉलीवुड के ‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’ कहे जाने वाले आमिर खान एक बार फिर अपने सोचने के अंदाज़ और गंभीर नजरिए को लेकर चर्चा में हैं। इस बार वजह है उनका ड्रीम प्रोजेक्ट — महाभारत। हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में आमिर खान ने साफ कर दिया कि महाभारत उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक भावनात्मक, सांस्कृतिक और नैतिक जिम्मेदारी है, जिसे वह किसी भी कीमत पर हल्के में नहीं लेना चाहते।
जल्दबाज़ी नहीं, जिम्मेदारी है प्राथमिकता
आमिर खान का मानना है कि महाभारत जैसी महान गाथा पर फिल्म बनाना साधारण काम नहीं है। उन्होंने कहा कि वह इस प्रोजेक्ट को लेकर जल्दबाज़ी नहीं करना चाहते, क्योंकि यह कहानी सिर्फ एक पौराणिक ग्रंथ नहीं, बल्कि हर भारतीय की भावनाओं से गहराई से जुड़ी हुई है।
उनके मुताबिक, अगर इस कहानी को सही तरीके से नहीं दिखाया गया, तो वह लाखों लोगों की उम्मीदों को ठेस पहुंचा सकती है। यही वजह है कि वह तब तक इस फिल्म पर काम शुरू नहीं करेंगे, जब तक उन्हें यह पूरा विश्वास न हो जाए कि वह इसे पूरी सच्चाई और सम्मान के साथ पर्दे पर उतार सकते हैं।
महाभारत: किताब नहीं, जीवन दर्शन
आमिर खान ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि महाभारत सिर्फ पढ़ी जाने वाली किताब नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, हमारे संस्कार और हमारी सोच का आधार है।
उन्होंने बताया कि कैसे यह कहानी पीढ़ियों से लोगों के जीवन का हिस्सा रही है — कभी दादी-नानी की कहानियों में, तो कभी भगवद्गीता के श्लोकों के ज़रिए। महाभारत हमें जीवन, धर्म, कर्तव्य, रिश्तों और संघर्षों की सीख देती है। ऐसे में इसे सिर्फ मनोरंजन के तौर पर देखना या दिखाना, इस महान गाथा के साथ अन्याय होगा।
सबसे बड़ा डर: कहानी के साथ गलती
आमिर खान ने बेहद ईमानदारी से यह स्वीकार किया कि महाभारत को लेकर उनका सबसे बड़ा डर यही है कि कहीं इसे गलत तरीके से न पेश कर दिया जाए।
उन्होंने कहा कि अगर फिल्म कमजोर बनी, तो दोष महाभारत की कहानी का नहीं, बल्कि फिल्ममेकर का होगा। यही सोच उन्हें इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद सतर्क बनाती है। आमिर का मानना है कि इतनी विशाल और गहन कथा को समझने के लिए सिर्फ तकनीक या बजट नहीं, बल्कि गहरी समझ, संवेदनशीलता और ईमानदारी की जरूरत होती है।
हर भारतीय को गर्व महसूस हो, यही लक्ष्य
आमिर खान ने यह भी साफ किया कि अगर कभी वह महाभारत पर फिल्म बनाते हैं, तो उनका एक ही लक्ष्य होगा — हर भारतीय उस फिल्म को देखकर गर्व महसूस करे।
उनका कहना है कि यह फिल्म ऐसी होनी चाहिए, जो न सिर्फ भारत में बल्कि दुनिया भर में हमारी संस्कृति और सोच को सम्मान के साथ पेश करे। वह नहीं चाहते कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ बॉक्स ऑफिस नंबरों तक सीमित रह जाए, बल्कि यह लोगों के दिलों में जगह बनाए।
क्यों खास है आमिर खान का नजरिया?
आमिर खान का करियर इस बात का गवाह रहा है कि वह हमेशा सोच-समझकर फिल्में चुनते हैं। ‘लगान’, ‘तारे ज़मीन पर’, ‘दंगल’ और ‘पीके’ जैसी फिल्मों के ज़रिए उन्होंने साबित किया है कि वह सिर्फ स्टार नहीं, बल्कि एक संवेदनशील कलाकार भी हैं।
महाभारत को लेकर उनका यह सतर्क रवैया यही दिखाता है कि वह इस कहानी को किसी ट्रेंड या दबाव में नहीं बनाना चाहते। उनके लिए यह एक ऐसा सपना है, जिसे वह तब ही साकार करना चाहते हैं, जब वह खुद उसके लिए पूरी तरह तैयार हों।
दर्शकों की उम्मीदें भी हैं बड़ी
महाभारत जैसी कहानी को लेकर दर्शकों की उम्मीदें भी बेहद ऊंची हैं। हर किरदार, हर संवाद और हर दृश्य लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। ऐसे में एक छोटी सी चूक भी विवाद और निराशा की वजह बन सकती है।
आमिर खान शायद इसी सच्चाई को समझते हैं और इसलिए वह समय लेने के पक्ष में हैं। उनका यह रवैया बताता है कि कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जिन्हें बनाने से पहले कई बार खुद से सवाल पूछना जरूरी होता है।
सपना ज़िंदा है, लेकिन सब्र के साथ
फिलहाल आमिर खान ने यह साफ नहीं किया है कि महाभारत पर काम कब शुरू होगा या वह खुद किस भूमिका में नजर आएंगे। लेकिन उन्होंने यह जरूर संकेत दिया है कि यह सपना अभी ज़िंदा है, बस सही वक्त और सही तैयारी का इंतज़ार कर रहा है।
उनके शब्दों में, महाभारत तभी बनेगी, जब वह खुद यह महसूस करेंगे कि वह इसके साथ न्याय कर सकते हैं।
Aamir Khan has often spoken about his dream of making a Mahabharat movie, calling it one of the most challenging and meaningful projects of his career. The Bollywood superstar believes that Mahabharat is not just an epic story but a reflection of Indian culture, values, and philosophy. In a recent interview, Aamir Khan emphasized that he does not want to rush the Mahabharat film and will only take it forward when he feels confident about doing complete justice to the epic. His thoughtful approach has once again highlighted why Aamir Khan is considered one of the most responsible filmmakers in Indian cinema.


















