AIN NEWS 1: फरीदाबाद की नीमका जिला जेल में बंद संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की हत्या ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि राम मंदिर को लेकर चल रही बहस ने हिंसक रूप ले लिया और सहबंदी ने पत्थर से हमला कर उसकी जान ले ली। इस घटना के बाद जेल प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच को लेकर बहस तेज हो गई है।
परिवार का कहना है कि अब्दुल रहमान बेगुनाह था और उसे जल्द ही हाईकोर्ट से जमानत मिलने की उम्मीद थी। अब वे न्याय और सच्चाई सामने आने की मांग कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
रविवार देर रात नीमका जिला जेल में एक दर्दनाक घटना हुई। अयोध्या में राम मंदिर पर हमले की साजिश के आरोप में गिरफ्तार अब्दुल रहमान की उसी जेल में बंद सहबंदी अरुण चौधरी ने कथित रूप से पत्थर से हमला कर हत्या कर दी।
पुलिस के मुताबिक, दोनों के बीच पिछले कई दिनों से राम मंदिर को लेकर बहस चल रही थी। बताया जा रहा है कि विवाद बढ़ते-बढ़ते हिंसा में बदल गया। इसी दौरान आरोपी ने पत्थर से वार कर दिया, जिससे अब्दुल की मौके पर ही मौत हो गई।
जांच में क्या सामने आया?
फरीदाबाद पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। मामला डीएलएफ क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है।
एसीपी अशोक कुमार ने बताया कि प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमआईसी) संचिता सिंह की मौजूदगी में पुलिस टीम ने जेल परिसर में घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान वह नुकीला पत्थर बरामद किया गया, जिससे हमला किया गया था। साथ ही वह कपड़ा भी मिला, जिसमें पत्थर बांधकर वार करने की बात सामने आई।
बरामद सभी साक्ष्यों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।
इसके अलावा, घटना के समय ड्यूटी पर तैनात जेल अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कड़ी सुरक्षा वाली जेल में हमले के लिए इस्तेमाल किया गया सामान आरोपी तक कैसे पहुंचा।
पोस्टमार्टम और कानूनी प्रक्रिया
अब्दुल रहमान का शव फरीदाबाद के ईएसआई मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेजा गया। पोस्टमार्टम तीन सदस्यीय फॉरेंसिक मेडिकल बोर्ड द्वारा किया गया। पूरी प्रक्रिया न्यायिक मजिस्ट्रेट की निगरानी में हुई और उसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई।
पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिवार ने इस दौरान निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।
कौन था अब्दुल रहमान?
अब्दुल रहमान उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले के मिल्कीपुर क्षेत्र का रहने वाला था। वह अपने परिवार का इकलौता बेटा और तीन बहनों का अकेला भाई था।
पिछले साल मार्च में उसे अयोध्या के पास एक गांव के खेत में बने कमरे से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने दावा किया था कि उसके पास से दो हैंड ग्रेनेड बरामद हुए और उस पर राम मंदिर पर हमले की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था।
गिरफ्तारी से पहले अब्दुल रिक्शा चलाकर और एक छोटी मीट की दुकान पर काम करके परिवार की आर्थिक मदद करता था। परिवार की हालत कमजोर बताई जा रही है। पिता भी रिक्शा चलाते हैं और छोटी दुकान के सहारे घर चलाते हैं।
परिवार का दर्द और सवाल
अब्दुल के पिता अबू बकर का कहना है कि उनका बेटा निर्दोष था। उनकी आंखों में बेटे को खोने का गहरा दर्द साफ दिखाई देता है।
उन्होंने कहा, “अगर मेरा बेटा दोषी था तो कानून उसे सजा देता। लेकिन अगर वह बेगुनाह था तो उसे इस तरह मरने का हक किसी को नहीं था।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि हाईकोर्ट में जमानत की सुनवाई उनके पक्ष में जा रही थी और उन्हें जल्द राहत मिलने की उम्मीद थी। लेकिन जमानत मिलने से पहले ही उनकी हत्या हो गई।
अब्दुल की तीन बहनें—आसमा (16), अल्फिया (13) और अल्फिशा (6)—अपने इकलौते भाई को खो चुकी हैं। परिवार के मुताबिक, अब घर का सहारा भी छिन गया है।
जेल सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। उच्च सुरक्षा वाली जेल में पत्थर और कपड़ा जैसी चीजें आरोपी तक कैसे पहुंचीं?
क्या जेल में कैदियों के बीच चल रहे विवाद की जानकारी पहले से थी?
क्या किसी तरह की लापरवाही हुई?
इन सभी सवालों की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हीं के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
क्या थी बहस की वजह?
जेल सूत्रों के अनुसार, दोनों बंदियों के बीच राम मंदिर को लेकर कई दिनों से बहस हो रही थी। यह बहस धीरे-धीरे तनाव में बदल गई।
हालांकि, जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि कहीं इसके पीछे कोई और कारण तो नहीं था। फिलहाल आधिकारिक रूप से धार्मिक बहस को ही विवाद की वजह बताया जा रहा है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
आगे क्या?
डीएलएफ क्राइम ब्रांच पूरे घटनाक्रम की गहन जांच कर रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट, जेल स्टाफ के बयान और सीसीटीवी फुटेज जैसे सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
परिवार ने निष्पक्ष जांच और सच्चाई सामने लाने की मांग की है। वहीं प्रशासन का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है—क्या यह सिर्फ एक बहस का परिणाम था, या इसके पीछे और भी परतें हैं?
The Abdul Rehman Faridabad jail murder case has raised serious concerns over prison security and communal tensions inside high-security facilities. Abdul Rehman, accused in the Ayodhya Ram Mandir attack conspiracy, was allegedly killed by a fellow inmate after a dispute over the Ram Mandir issue inside Neemka Jail. The Faridabad Crime Branch is investigating the incident, while the family claims he was innocent and awaiting bail from the High Court. The case highlights questions about jail security lapses, inmate safety, and the broader implications of religious disputes within prisons.


















