AIN NEWS 1: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया तेज़ी से बदल रही है, और इसके साथ ही आम लोगों की जिंदगी में भी नई तकनीकें तेजी से प्रवेश कर रही हैं। हाल ही में AI Glasses का एक डेमो वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ, जिसने लोगों को हैरान करने के साथ-साथ डरा भी दिया। इस वीडियो में दिखाया गया कि एक व्यक्ति सड़क पर चलते हुए किसी भी अनजान शख्स की ओर देखता है और चश्मा तुरंत उसके बारे में जरूरी जानकारी बता देता है—जैसे नाम, काम और उससे जुड़ी कई अन्य डिटेल्स।
यह तकनीक पहली नज़र में बेहद स्मार्ट और फिल्मी लग सकती है, लेकिन इसके साथ प्राइवेसी को लेकर बड़े और गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस तकनीक का दावा है कि यह किसी सरकारी डेटाबेस या रजिस्टर्ड रिकॉर्ड से डेटा नहीं लेती, बल्कि इंटरनेट पर पहले से मौजूद ओपन-सोर्स जानकारियों का उपयोग करती है। हालांकि, यह बात समझना जरूरी है कि इंटरनेट पर उपलब्ध डेटा भी किसी की निजी जिंदगी का हिस्सा हो सकता है।
कैसे काम करते हैं AI Glasses?
वायरल वीडियो में दिखाया गया AI Glass एक तरह का स्मार्ट चश्मा है जो सामने मौजूद व्यक्ति का फेस स्कैन करता है। चश्मे में लगी AI प्रणाली व्यक्ति के चेहरे की पहचान करती है और फिर उस चेहरे को इंटरनेट पर उपलब्ध फोटो, सोशल मीडिया प्रोफाइल, ब्लॉग या अन्य स्रोतों से मैच किया जाता है।
अगर चेहरे से मिलती-जुलती कोई जानकारी AI को मिल जाती है, तो वह तुरंत स्क्रीन पर दिखा देता है—जैसे:
व्यक्ति का नाम
उसका पेशा या नौकरी
सोशल मीडिया अकाउंट
ऑनलाइन उपलब्ध फोटो
उसके बारे में सार्वजनिक जानकारी
यानी कोई भी राह चलते व्यक्ति की पहचान कुछ ही सेकंड में सामने आ सकती है।
प्राइवेसी का असली खतरा क्या है?
तकनीक जितनी आकर्षक लगती है, खतरे भी उतने ही गहरे हैं। दुनिया में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो चाहेगा कि कोई अनजान व्यक्ति सिर्फ एक नजर डालकर उसके बारे में सब कुछ जान ले।
प्राइवेसी एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह तकनीक समाज में कई समस्याएं पैदा कर सकती है:
1. हर व्यक्ति ट्रैक होने लगेगा
किसी भी सार्वजनिक जगह पर चलना भी निजी क्षण नहीं रहेगा। कोई भी आपका चेहरा स्कैन करके आपकी पहचान निकाल सकता है।
2. स्टॉकिंग और अपराध बढ़ने का खतरा
अगर यह तकनीक गलत हाथों में जाती है, तो अपराधी इसका गलत उपयोग कर सकते हैं—खासकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
3. सरकार और कंपनियों के लिए निगरानी आसान
अगर कंपनियां या संस्थाएं इसका इस्तेमाल करने लगें, तो लोगों की मूवमेंट और गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा सकती है।
4. फेक जानकारी का खतरा
AI इंटरनेट पर मौजूद जानकारी के आधार पर डिटेल्स दिखाता है। अगर वहां गलत या अफवाह जैसे डेटा मौजूद है, तो किसी के बारे में गलत छवि भी बन सकती है।
क्या सरकार के डेटाबेस से जुड़ी है यह तकनीक?
डेमो देने वालों ने दावा किया है कि AI Glasses किसी सरकारी डेटाबेस—जैसे आधार, पासपोर्ट या पहचान पत्र—से जुड़ी जानकारी नहीं लेते।
यह पूरी तरह पब्लिक डेटा या इंटरनेट पर उपलब्ध ओपन जानकारी पर निर्भर करता है।
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही यह सरकारी डेटा उपयोग न कर रहा हो, लेकिन असर वही पड़ रहा है—लोगों की पहचान अनजाने में उजागर हो रही है।
लोगों की प्रतिक्रिया कैसी रही?
सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होते ही लाखों लोग इस पर प्रतिक्रिया देने लगे। कुछ लोग इसे भविष्य की तकनीक कहकर उत्साहित थे, जबकि बड़ी संख्या में लोग इससे डरे हुए थे।
कमेंट्स में लोग कह रहे थे:
“अब प्राइवेसी नाम की कोई चीज नहीं बचेगी।”
“यह तो Black Mirror का भविष्य जैसा लगता है।”
“टेक्नोलॉजी अच्छी है, लेकिन गलत हवाले में बहुत खतरनाक।”
क्या ऐसे ग्लासेस मार्केट में आएंगे?
कई टेक कंपनियां AI आधारित स्मार्ट ग्लासेस पर काम कर रही हैं। Google Glass पहले भी चर्चा में रह चुका है, हालांकि प्राइवेसी समस्या के कारण इसे कई देशों में बैन और सीमित कर दिया गया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में ऐसे चश्मे और भी उन्नत होंगे, लेकिन प्राइवेसी कानूनों के चलते इन्हें आम उपयोग के लिए सीमित किया जा सकता है।
तकनीक शानदार, लेकिन जोखिम भी उतने ही बड़े
AI Glasses जैसी तकनीकें हमें भविष्य की दुनिया का अहसास कराती हैं, जहां जानकारी पाना बेहद आसान होगा। लेकिन वही जानकारी किसी की निजी जिंदगी में दखल भी बन सकती है।
इसलिए टेक्नोलॉजी को अपनाने से पहले उसके नियम, सुरक्षा और सीमाएं तय करना बेहद जरूरी है। वरना एक दिन ऐसा आएगा कि दुनिया में कोई भी व्यक्ति पूरी तरह “अनजान” नहीं रह पाएगा।
The viral AI Glasses demo has sparked global discussions about face scan technology, privacy risks, and the future of smart glasses. In the video, the AI-powered device identifies strangers instantly by matching their faces with publicly available online data. Experts warn that such AI face recognition tools may lead to unprecedented surveillance, misuse by criminals, and serious privacy concerns, making it essential to regulate this emerging technology before it becomes mainstream.


















