इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: यूपी के थानों में लगे CCTV कैमरों की निगरानी अब करेंगे मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी
AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में पुलिस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अदालत ने कहा है कि अब प्रदेश के सभी जिलों में पुलिस थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित जिले के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) को सौंपी जाएगी।
इस आदेश के तहत CJM समय-समय पर पुलिस थानों का निरीक्षण करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि वहां लगे CCTV कैमरे ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं। निरीक्षण के दौरान वे यह भी देखेंगे कि रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जा रही है या नहीं और किसी घटना की स्थिति में फुटेज उपलब्ध कराई जा सकती है या नहीं।
कोर्ट ने क्यों दिया यह आदेश
दरअसल यह मामला एक ऐसे केस के दौरान सामने आया जब अदालत ने पुलिस से एक थाने के CCTV फुटेज मांगे थे। न्यायिक आदेश के बावजूद पुलिस समय पर फुटेज उपलब्ध नहीं करा सकी। बाद में यह दलील दी गई कि कैमरों का स्टोरेज भर गया था, इसलिए फुटेज सुरक्षित नहीं रह पाया।
इस जवाब से अदालत संतुष्ट नहीं हुई। कोर्ट ने इसे गंभीर मामला मानते हुए कहा कि अगर पुलिस स्टेशन में लगे CCTV कैमरे सही ढंग से काम नहीं कर रहे या फुटेज सुरक्षित नहीं रखा जा रहा है, तो इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
इसी वजह से हाईकोर्ट ने यह सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया कि भविष्य में इस तरह की स्थिति पैदा न हो।
CJM करेंगे थानों का निरीक्षण
अदालत के निर्देश के अनुसार हर जिले के CJM समय-समय पर थानों का निरीक्षण करेंगे।
वे यह जांचेंगे कि थानों में लगे CCTV कैमरे चालू हालत में हैं या नहीं।
कैमरों की रिकॉर्डिंग कितने समय तक सुरक्षित रखी जा रही है।
कहीं कैमरे बंद या खराब तो नहीं हैं।
फुटेज सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त स्टोरेज उपलब्ध है या नहीं।
अगर किसी थाने में कैमरे बंद पाए जाते हैं या रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होती, तो इसकी रिपोर्ट जिला जज को दी जाएगी।
जिला जज को दी जाएगी जानकारी
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि निरीक्षण से पहले CJM को जिला जज को जानकारी देनी होगी। इसके बाद वे थानों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करेंगे।
इस रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि पुलिस विभाग द्वारा CCTV निगरानी से जुड़े नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी संदर्भ
दरअसल देश के सभी पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाने को लेकर पहले भी सुप्रीम कोर्ट महत्वपूर्ण निर्देश दे चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाना बेहद जरूरी है ताकि हिरासत में होने वाली घटनाओं की निगरानी हो सके और किसी भी तरह की अवैध गतिविधि या दुर्व्यवहार पर रोक लगाई जा सके।
इसी निर्देश को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने यह सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था मजबूत करने का फैसला किया है।
हिरासत से जुड़े मामलों में मदद
पुलिस थानों में CCTV कैमरों की व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि हिरासत में लिए गए लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
कई बार यह आरोप सामने आते रहे हैं कि पुलिस हिरासत में लोगों के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार हुआ। ऐसे मामलों में CCTV फुटेज महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं।
अगर कैमरे ठीक से काम करेंगे और फुटेज सुरक्षित रहेगा, तो किसी भी विवाद या आरोप की स्थिति में सच्चाई सामने लाना आसान होगा।
पुलिस की जवाबदेही बढ़ेगी
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह आदेश पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में अहम कदम है।
जब न्यायिक अधिकारी समय-समय पर थानों का निरीक्षण करेंगे, तो पुलिस अधिकारियों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी कैमरे ठीक से काम कर रहे हों और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाए।
अदालत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक अधिकारियों के आदेशों का पालन करना सभी सरकारी विभागों की जिम्मेदारी है।
अगर अदालत के आदेशों को नजरअंदाज किया जाता है, तो इसे न्यायालय की अवमानना माना जा सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायिक कार्य करते समय न्यायिक अधिकारी की स्थिति प्रशासनिक अधिकारियों से अलग होती है और उनके आदेशों का सम्मान किया जाना जरूरी है।
पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
आज के दौर में तकनीक का इस्तेमाल प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है। CCTV कैमरे भी उसी का हिस्सा हैं। अगर इनका सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो इससे कानून व्यवस्था मजबूत हो सकती है और आम नागरिकों का भरोसा भी बढ़ेगा।
आम लोगों को क्या होगा फायदा
इस आदेश का सीधा फायदा आम नागरिकों को मिल सकता है।
अगर किसी व्यक्ति को पुलिस थाने में किसी प्रकार की परेशानी होती है या उसके साथ गलत व्यवहार किया जाता है, तो CCTV फुटेज उसकी सच्चाई सामने लाने में मदद कर सकता है।
इसके अलावा पुलिस और जनता के बीच विश्वास बढ़ाने में भी यह व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब राज्य के सभी जिलों में CJM को यह जिम्मेदारी निभानी होगी। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि पुलिस थानों में CCTV व्यवस्था कितनी प्रभावी तरीके से लागू की जा रही है।
अगर इस व्यवस्था को सख्ती से लागू किया गया, तो इससे पुलिस थानों में पारदर्शिता बढ़ेगी और न्यायिक प्रक्रिया को भी मजबूती मिलेगी।
The Allahabad High Court has issued an important directive regarding CCTV monitoring in police stations across Uttar Pradesh. According to the order, the Chief Judicial Magistrate (CJM) of every district will inspect police stations and monitor the functioning of CCTV cameras to ensure transparency and accountability. The move comes after concerns about missing CCTV footage and allegations of custodial misconduct, reinforcing the judiciary’s role in strengthening police accountability and safeguarding citizens’ rights.


















