AIN NEWS 1 इलाहाबाद: उत्तर प्रदेश में वाहन दुर्घटनाओं से जुड़े मामलों में आज एक महत्वपूर्ण न्यायिक स्पष्टता आई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजे से जुड़े एक विवाद में यह स्पष्ट किया है कि किसी वाहन की बिक्री हो चुकी हो, लेकिन यदि परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम दर्ज है, तो दुर्घटना की स्थिति में वही पंजीकृत मालिक मुआवजे का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार माना जाएगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन ने सुनाया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल यह बात कि वाहन किसी और को बेचा जा चुका है, मुआवजे की देयता से पंजीकृत मालिक को मुक्त नहीं करती। यानी वाहन बेचने के बाद भी अगर नया मालिक परिवहन विभाग में नाम दर्ज कराने में लापरवाही करता है और दुर्घटना हो जाती है, तो कानूनी रूप से जिम्मेदारी पंजीकृत मालिक की ही होगी।
पृष्ठभूमि
मामला इस प्रकार था कि एक वाहन दुर्घटना हुई थी और मुआवजे के लिए दावे की प्रक्रिया शुरू की गई थी। दुर्घटना के बाद पता चला कि वाहन पहले किसी और के पास था, लेकिन परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में अभी भी पुराने मालिक का नाम दर्ज था। इस पर विवाद खड़ा हुआ कि मुआवजा किसे देना चाहिए।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वाहन के पंजीकृत रिकॉर्ड का महत्व सबसे अधिक है। सड़क सुरक्षा और वाहन दुर्घटना कानून के तहत पंजीकृत मालिक को प्राथमिक जिम्मेदार माना जाता है। यह नियम इस उद्देश्य से बनाया गया है कि मुआवजे के दावे में किसी भी तरह की देरी या विवाद न हो और पीड़ित को जल्द से जल्द राहत मिल सके।
कोर्ट का तर्क
कोर्ट ने यह भी कहा कि वाहन बेचने के बाद यदि नए मालिक ने पंजीकरण बदलवाने में लापरवाही की, तो वह गलत है, लेकिन इसका खामियाजा पुराने मालिक को भुगतना पड़ सकता है। न्यायमूर्ति संदीप जैन ने अपने आदेश में लिखा कि “वाहन का पंजीकृत मालिक ही कानूनी रूप से जिम्मेदार है जब तक कि परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में बदलाव नहीं हो जाता।”
कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि वाहन के मालिक के लिए यह जरूरी है कि बिक्री के समय उचित दस्तावेज और ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी की जाए। यदि नई खरीददार ने पंजीकरण बदलवाने में देरी की, तो मुआवजे की देयता पुराने मालिक पर ही आएगी।
वाहन मालिकों के लिए अहम संदेश
इस आदेश के बाद सभी वाहन मालिकों को यह बात समझना बेहद जरूरी है कि वाहन बेचते समय न केवल बिक्री की रसीद बनाई जाए, बल्कि परिवहन विभाग में नामांतरण भी तुरंत करवाना आवश्यक है। ऐसा न करने पर दुर्घटना होने की स्थिति में कानूनी जिम्मेदारी पंजीकृत मालिक पर ही आ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला वाहन मालिकों और बीमा कंपनियों दोनों के लिए अहम है। बीमा कंपनियों के लिए यह आदेश यह सुनिश्चित करता है कि मुआवजे की प्रक्रिया में किसी तकनीकी विवाद या मालिक के बदलने के कारण देरी न हो।
मुआवजे की प्रक्रिया
मोटर दुर्घटना मुआवजा कानून के तहत पीड़ित या उनके परिवार के लिए मुआवजे की प्रक्रिया त्वरित होनी चाहिए। अगर वाहन दुर्घटना में शामिल हो और पंजीकरण में पुराने मालिक का नाम हो, तो मुआवजा दावे की जिम्मेदारी पुराने पंजीकृत मालिक पर आती है।
यह आदेश विशेष रूप से उन मामलों में लागू होता है, जहां वाहन बेचा गया हो लेकिन पंजीकरण ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई हो। कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया कि पीड़ित को न्याय मिले और कोई भी तकनीकी कारण मुआवजे में बाधा न बने।
पूरे उत्तर प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण
यह फैसला सिर्फ एक व्यक्ति या एक मामले तक सीमित नहीं है। पूरे उत्तर प्रदेश में वाहन मालिकों और बीमा कंपनियों के लिए यह दिशा-निर्देश का काम करेगा। अब से कोई भी वाहन मालिक यह दावा नहीं कर सकता कि वाहन बेचने के बाद दुर्घटना की जिम्मेदारी उनके ऊपर नहीं है, अगर पंजीकरण परिवर्तित नहीं हुआ है।
विशेष रूप से यह निर्णय उन परिवारों के लिए राहत की खबर है, जिन्हें दुर्घटना में नुकसान हुआ है। अब वे सीधे पंजीकृत मालिक या उनकी बीमा कंपनी से मुआवजा प्राप्त कर सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला मोटर दुर्घटना कानून की व्यावहारिकता को मजबूत करता है। यह पुराने मालिकों को सतर्क रहने का संदेश देता है और नए मालिकों को यह जिम्मेदारी समझाता है कि पंजीकरण प्रक्रिया में देरी करना गंभीर परिणाम ला सकता है।
सड़क सुरक्षा और वाहन लेन-देन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह निर्णय अहम है। यह आदेश यह भी सुनिश्चित करता है कि दुर्घटना के पीड़ित को समय पर मुआवजा मिले और कोई तकनीकी अड़चन न आए।
The Allahabad High Court clarified that in vehicle accident cases, the registered owner in transport records is legally responsible for compensation, even if the vehicle has been sold. This decision ensures that accident victims receive timely motor accident compensation and highlights the importance of updating vehicle registration records. Vehicle owners in Uttar Pradesh must complete registration transfers immediately after sale to avoid legal liability. This ruling is a significant update in UP news, motor accident cases, and vehicle ownership responsibilities.


















