AIN NEWS 1 : उत्तर प्रदेश की सियासत के बड़े चेहरों में से एक समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आज़म खान आखिरकार 23 महीने बाद सीतापुर जेल से रिहा हो गए। बाहर निकलते समय वह हमेशा की तरह अपने राजनीतिक अंदाज़ में नज़र आए—सफेद कुर्ता-पायजामा, काली जैकेट और आंखों पर काला चश्मा लगाए हुए।
जेल से निकलने के बाद आज़म खान सीधे कार में बैठकर अपने बेटों के साथ रामपुर रवाना हो गए। इस दौरान मीडिया ने उनसे कई बार सवाल पूछने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने एक भी शब्द नहीं बोला। यहां तक कि कार का शीशा भी नीचे नहीं किया।
कोर्ट का आदेश और जमानत की प्रक्रिया
आज़म खान पर अलग-अलग मामलों में कुल 53 मुकदमे दर्ज थे। इनमें लूट, डकैती और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। सोमवार को एमपी-एमएलए कोर्ट ने 19 मुकदमों में उनकी रिहाई के आदेश जारी किए थे। इसके अलावा बाकी मामलों में भी उन्हें जमानत मिल चुकी है।
डूंगरपुर केस में उन्हें 10 साल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद मंगलवार की दोपहर उन्हें जेल से बाहर आने की अनुमति मिली।
चालान न जमा होने से हुई देरी
जानकारी के मुताबिक, आज़म खान को सुबह ही जेल से बाहर आना था। लेकिन करीब 8,000 रुपये का चालान जमा न होने के कारण उनकी रिहाई में देरी हो गई। चालान जमा होते ही उन्हें तुरंत बाहर भेज दिया गया।
परिवार और समर्थक पहुंचे जेल
आज़म खान की रिहाई के वक्त उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म समेत कई सपा नेता और कार्यकर्ता जेल के बाहर मौजूद रहे। सभी ने उनका स्वागत किया और उन्हें रामपुर तक एस्कॉर्ट किया।
शिवपाल सिंह यादव का बयान
समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने स्पष्ट कर दिया कि आज़म खान किसी भी अन्य राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगे।
उन्होंने कहा,
“आज़म खान सपा के महासचिव हैं और समाजवादी पार्टी को छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। उनके बसपा या आज़ाद समाज पार्टी में जाने की खबरें पूरी तरह झूठ और अफवाह हैं।”
शिवपाल यादव ने यह भी कहा कि आज़म खान को राजनीतिक द्वेषवश सैकड़ों फर्जी मामलों में फंसाया गया था। समाजवादी पार्टी ने हमेशा उनका साथ दिया है और आगे भी देती रहेगी।
राजनीतिक महत्व
आज़म खान का उत्तर प्रदेश की सियासत में हमेशा से अहम रोल रहा है। रामपुर को उनकी राजनीतिक धरती कहा जाता है। उनकी रिहाई से सपा खेमे में नई ऊर्जा आने की उम्मीद जताई जा रही है। पार्टी कार्यकर्ता मानते हैं कि उनकी वापसी से पार्टी की पकड़ मुस्लिम मतदाताओं पर और मजबूत होगी।
मीडिया से चुप्पी क्यों?
जेल से बाहर आते ही मीडिया ने उनसे कई सवाल पूछने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने एक भी शब्द नहीं कहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आज़म खान इस समय चुप्पी साधे हुए हैं और वह आने वाले दिनों में किसी बड़ी रणनीति का ऐलान कर सकते हैं।
करीब दो साल जेल में रहने के बाद आज़म खान की रिहाई न केवल उनके परिवार और समर्थकों के लिए राहत की खबर है, बल्कि सपा की राजनीति में भी नई हलचल पैदा कर रही है। अब देखना यह होगा कि वह आगे क्या कदम उठाते हैं और यूपी की राजनीति में उनकी क्या भूमिका रहती है।
Azam Khan, senior leader of the Samajwadi Party, has been released from Sitapur Jail after spending 23 months behind bars. Dressed in his signature white kurta-pajama, black jacket, and sunglasses, he avoided media interactions and directly headed to Rampur with his sons. Shivpal Yadav, uncle of SP chief Akhilesh Yadav, confirmed that Azam Khan will not join any other political party and called rumors about BSP or Azad Samaj Party affiliation baseless. His release after bail in 53 cases is seen as a significant political development in Uttar Pradesh politics.



















