AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कुख्यात गैंगस्टर रविंद्र सिंह उर्फ रवि काना की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई रिहाई के मामले ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल अधीक्षक, जेलर समेत कई अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और पूरे घटनाक्रम की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
कैसे सामने आया मामला
बताया जा रहा है कि गैंगस्टर रवि काना, जिस पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, उसकी रिहाई तय प्रक्रिया और नियमों के विपरीत तरीके से की गई। इस रिहाई को लेकर जेल प्रशासन की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। जैसे ही यह मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया, तुरंत जांच के आदेश दिए गए।
जेल चौकी प्रभारी की तहरीर पर FIR
इस पूरे मामले में जेल चौकी प्रभारी की ओर से कोतवाली नगर थाने में तहरीर दी गई, जिसके आधार पर जेल अधीक्षक, जेलर और अन्य संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। रिपोर्ट में आरोप है कि नियमों की अनदेखी करते हुए गैंगस्टर को जेल से बाहर किया गया, जिससे कानून-व्यवस्था पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता था।
एसपी ने बनाई विशेष जांच टीम (SIT)
बांदा के पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। SIT को निर्देश दिए गए हैं कि वह रिहाई की पूरी प्रक्रिया की परत-दर-परत जांच करे और यह पता लगाए कि आखिर किन परिस्थितियों में और किसकी अनुमति से गैंगस्टर को छोड़ा गया।
6 घंटे तक खंगाले गए रिकॉर्ड और CCTV फुटेज
जांच के दौरान जेल परिसर में लगभग छह घंटे तक महत्वपूर्ण दस्तावेजों, रजिस्टरों और CCTV फुटेज की बारीकी से जांच की गई। रिहाई के समय मौजूद अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य गतिविधियों को लेकर फुटेज को खंगाला गया, ताकि किसी भी तरह की लापरवाही या साजिश का खुलासा हो सके।
जेल अधीक्षक समेत 10 कर्मचारियों से पूछताछ
जांच टीम ने जेल अधीक्षक सहित कुल 10 जेलकर्मियों से लंबी पूछताछ की। इसके अलावा, जेल में बंद 9 अन्य बंदियों से भी बयान लिए गए, ताकि यह समझा जा सके कि रिहाई के दौरान क्या कुछ असामान्य हुआ था। पूछताछ में कई अहम बिंदु सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
पहले ही निलंबित हो चुके हैं जेलर
इस मामले में लापरवाही सामने आने के बाद जेलर विक्रम सिंह यादव को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। प्रशासन का मानना है कि प्रारंभिक जांच में उनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई। आगे की जांच में अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
नए जेलर की तैनाती
स्थिति को नियंत्रण में रखने और जेल प्रशासन को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए प्रयागराज जोन से आलोक कुमार को नया जेलर नियुक्त किया गया है। उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे जेल व्यवस्था को पारदर्शी और नियमों के अनुरूप संचालित करेंगे।
रिहाई प्रक्रिया की बारीकी से जांच जारी
फिलहाल SIT रिहाई से जुड़े हर दस्तावेज, आदेश पत्र और अनुमतियों की जांच कर रही है। यह भी देखा जा रहा है कि क्या किसी स्तर पर जानबूझकर नियमों की अनदेखी की गई या फिर किसी दबाव अथवा मिलीभगत के चलते गैंगस्टर को छोड़ा गया।
प्रशासनिक गलियारों में हलचल
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद जेल प्रशासन और पुलिस विभाग में भारी हलचल है। उच्च स्तर से लगातार निगरानी की जा रही है और संकेत दिए गए हैं कि दोषी पाए जाने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
जनता और कानून व्यवस्था पर असर
गैंगस्टर की संदिग्ध रिहाई ने आम जनता में भी चिंता पैदा कर दी है। लोगों का कहना है कि यदि इस तरह खतरनाक अपराधियों को नियमों को ताक पर रखकर छोड़ा जाएगा, तो कानून-व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। प्रशासन पर जनता का भरोसा बनाए रखना इस समय सबसे बड़ी चुनौती है।
आगे क्या?
जांच पूरी होने के बाद SIT अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि साजिश या गंभीर लापरवाही की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों पर सख्त धाराओं में केस दर्ज हो सकता है।
फिलहाल पूरा मामला बांदा जिले के साथ-साथ प्रदेश स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की निगाहें जांच के नतीजों पर टिकी हैं।
The Banda jail controversy has sparked major concerns after the suspicious release of gangster Ravindra Singh alias Ravi Kana. An FIR has been filed against jail officials, including the jail superintendent, and a Special Investigation Team (SIT) has been formed to probe the entire release process. Police are examining CCTV footage, jail records, and official documents to determine accountability in this high-profile Uttar Pradesh crime case.






