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महागठबंधन में दरार: कई सीटों पर घटक दलों में सीधी टक्कर, कहीं RJD बनाम कांग्रेस तो कहीं VIP बनाम RJD

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AIN NEWS 1 | बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के नामांकन के आखिरी दिन, यानी 17 अक्टूबर (गुरुवार) को राजनीतिक गलियारों में गहमागहमी चरम पर रही। बड़ी संख्या में प्रत्याशियों ने पर्चा दाखिल किया, लेकिन इस दौरान जो सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा, वह था महागठबंधन (RJD, कांग्रेस, CPI, VIP आदि) के अंदर मची आपसी भिड़ंत।

जहां एक ओर सीट शेयरिंग की तस्वीर अभी तक पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है, वहीं दूसरी ओर महागठबंधन के घटक दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ ही उम्मीदवार खड़े कर दिए हैं। इस कारण अब कई सीटों पर “फ्रेंडली फाइट” देखने को मिलेगी — यानी महागठबंधन बनाम महागठबंधन।

कहलगांव में RJD बनाम कांग्रेस की सीधी टक्कर

कहलगांव विधानसभा सीट पर इस बार महागठबंधन की दो प्रमुख पार्टियां आमने-सामने हैं।

  • RJD ने इस सीट से रजनीश यादव को उम्मीदवार बनाया है और उन्हें सिंबल भी दे दिया गया है।

  • दूसरी तरफ, कांग्रेस ने प्रवीण कुशवाहा को टिकट देकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

यानी कहलगांव में अब महागठबंधन की दो सहयोगी पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतर चुकी हैं।

बिहार शरीफ सीट पर भी दो-दो उम्मीदवार

इसी तरह बिहार शरीफ विधानसभा सीट पर भी अंदरूनी फाइट देखने को मिलेगी।

  • यहां CPI ने शिव प्रकाश यादव को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

  • वहीं, कांग्रेस ने भी इस सीट पर अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं।

यहां भी एक बार फिर महागठबंधन के दो घटक दल सीधे आमने-सामने आ गए हैं।

अन्य सीटें जहां ‘फ्रेंडली फाइट’ होगी

बिहार के कई अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है।
कुछ प्रमुख सीटें इस प्रकार हैं –

  • बछवाड़ा सीट:
    यहां CPI के अवधेश राय और कांग्रेस के गरीब दास एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं।

  • गौरा बौराम सीट:
    इस सीट से RJD ने अफजल अली को उम्मीदवार बनाया है, जबकि VIP पार्टी से संतोष सहनी ताल ठोक रहे हैं।

  • लालगंज सीट:
    RJD की ओर से शिवानी शुक्ला उम्मीदवार हैं, वहीं कांग्रेस ने आदित्य राजा को टिकट देकर इस सीट को भी मुकाबले का केंद्र बना दिया है।

इन सीटों पर अब महागठबंधन के दलों के बीच ही वोटों का बंटवारा तय है, जिससे विपक्षी दलों को अप्रत्यक्ष फायदा मिल सकता है।

कांग्रेस की पहली सूची: 48 उम्मीदवारों के नाम घोषित

कांग्रेस पार्टी ने 17 अक्टूबर की देर रात अपनी पहली उम्मीदवार सूची जारी कर दी, जिसमें 48 प्रत्याशियों के नाम शामिल हैं।

इस सूची में पार्टी के कई मौजूदा विधायक और वरिष्ठ नेता शामिल हैं।

  • प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम (कुटुंबा) को दोबारा टिकट दिया गया है।

  • वहीं, कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान (कदवा) को भी फिर से मौका मिला है।

हालांकि, यह सूची ऐसे समय में जारी की गई जब महागठबंधन के अन्य घटकों (RJD, CPI, VIP) के साथ सीट बंटवारे की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई थी।

यही कारण है कि अब कई सीटों पर महागठबंधन के भीतर ही सीधी लड़ाई बन गई है।

महागठबंधन की उलझन और रणनीतिक दुविधा

विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बिहार में महागठबंधन के भीतर समन्वय की कमी साफ नजर आ रही है।
कांग्रेस ने जहां सीट बंटवारे से पहले ही अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए, वहीं RJD ने भी कई सीटों पर सिंबल बांटने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

इस जल्दबाजी ने कुछ सीटों पर स्थिति को और पेचीदा बना दिया। अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह ‘फ्रेंडली फाइट’ वाकई फ्रेंडली रहेगी, या फिर वोटों के बंटवारे से महागठबंधन की चुनावी संभावनाएं कमजोर होंगी।

दो चरणों में होगा बिहार विधानसभा चुनाव

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 इस बार दो चरणों में होंगे —

  • पहला चरण: 6 नवंबर 2025

  • दूसरा चरण: 11 नवंबर 2025

मतगणना 14 नवंबर 2025 को होगी।

पहले चरण के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 17 अक्टूबर थी, जबकि दूसरे चरण के लिए यह तिथि 20 अक्टूबर तय की गई है।

राजनीतिक विश्लेषण: किसे होगा नुकसान, किसे फायदा?

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि महागठबंधन में सीटों को लेकर जारी असहमति से विपक्षी दलों को फायदा मिल सकता है।
अगर RJD और कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टियां आपस में ही भिड़ती रहीं, तो इसका सीधा असर NDA और अन्य पार्टियों की जीत की संभावनाओं पर पड़ेगा।

हालांकि, कांग्रेस और RJD के सूत्र यह भी कह रहे हैं कि आंतरिक बातचीत चल रही है और जल्द ही सीटों पर “फ्रेंडली” मुकाबलों का समाधान निकाल लिया जाएगा।

लेकिन, वर्तमान हालात में यह कहना गलत नहीं होगा कि महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

बिहार चुनाव 2025 में महागठबंधन की स्थिति अभी असमंजस में है।
जहां जनता विपक्ष से एक मजबूत विकल्प की उम्मीद कर रही थी, वहीं महागठबंधन के अंदर के विवाद ने इस धारणा को कमजोर किया है।

अब देखना यह है कि RJD, कांग्रेस और उनके सहयोगी दल समय रहते अपने मतभेद दूर कर पाते हैं या नहीं।
अगर नहीं, तो यह “फ्रेंडली फाइट” महागठबंधन के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है, और राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।

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