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अरब सागर में भारत की ताकत बढ़ाने की तैयारी, सरकार बिट्रा द्वीप को बनाएगी रणनीतिक केंद्र, स्थानीय विरोध तेज

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AIN NEWS 1| नई दिल्ली: भारत सरकार अब अरब सागर में अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके तहत केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप का बिट्रा द्वीप रक्षा और रणनीतिक उद्देश्यों के लिए अधिग्रहित किए जाने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि, इस फैसले का स्थानीय लोगों और लक्षद्वीप के सांसद हामदुल्ला सईद की ओर से जोरदार विरोध हो रहा है।

क्या है बिट्रा द्वीप और क्यों है यह अहम?

बिट्रा, लक्षद्वीप का सबसे छोटा और कम आबादी वाला द्वीप है। इसकी रणनीतिक स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार इसे रक्षा बलों और अन्य रणनीतिक एजेंसियों को सौंपना चाहती है, ताकि भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। द्वीप पर कम जनसंख्या और उसका भौगोलिक महत्व, इसे रक्षा दृष्टिकोण से उपयुक्त बनाता है।

सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

हाल ही में जारी प्रशासनिक अधिसूचना के अनुसार, बिट्रा द्वीप की भू-स्थिति, राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरतें, और वहां की प्रशासनिक एवं लॉजिस्टिक चुनौतियों को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है।

यह अधिग्रहण भारत सरकार के 2013 भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अंतर्गत होगा, जिसमें पारदर्शिता और उचित मुआवजा सुनिश्चित करने का प्रावधान है।

स्थानीय लोगों और सांसद का विरोध

लक्षद्वीप के सांसद हामदुल्ला सईद ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि,

“यह अधिग्रहण रक्षा के नाम पर स्थानीय निवासियों को विस्थापित करने का प्रयास है। बिट्रा वर्षों से आबाद है और बिना स्थानीय लोगों से बात किए इस तरह की योजना चलाना संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने पहले भी कई द्वीपों पर रक्षा उद्देश्यों के लिए जमीन अधिग्रहित की है, लेकिन वहां से स्थायी आबादी को नहीं हटाया गया। इसलिए अब बिट्रा को चुनना पूरी तरह से अनुचित और भेदभावपूर्ण है।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी?

सांसद सईद ने यह भी आरोप लगाया कि यह निर्णय स्थानीय पंचायतों की गैरमौजूदगी में लिया जा रहा है। ऐसे में लोगों की राय को पूरी तरह से नजरअंदाज करना न केवल लोकतंत्र के खिलाफ है बल्कि संविधान द्वारा नागरिकों को दिए गए अधिकारों का उल्लंघन भी है।

क्या है आगे की रणनीति?

सांसद सईद ने कहा कि वे इस प्रस्ताव के विरोध में राजनीतिक और कानूनी दोनों रास्तों को अपनाएंगे। उन्होंने बिट्रा द्वीप के नागरिकों को भरोसा दिलाया कि वे उनके साथ खड़े हैं और किसी भी हालत में उन्हें उनके घरों से बेदखल नहीं होने दिया जाएगा

भारत सरकार का यह कदम एक ओर जहां रक्षा क्षेत्र में मजबूती लाने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर यह स्थानीय लोगों के जीवन, अधिकारों और संस्कृति पर असर डाल सकता है। इस तरह के निर्णय में यदि जन भागीदारी और पारदर्शिता न हो तो यह सामाजिक और राजनीतिक तनाव को जन्म दे सकता है।

इसलिए ज़रूरी है कि प्रशासन इस मुद्दे पर संतुलन बनाए, स्थानीय समुदायों से संवाद करे और हर स्तर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करे।

India is preparing to strengthen its strategic presence in the Arabian Sea by acquiring Bitra Island in Lakshadweep for defense purposes. The move has sparked local opposition, with MP Hamdullah Sayeed calling it unconstitutional and an attempt to displace native islanders. Bitra, the least populated island in Lakshadweep, holds strategic maritime importance. Despite government assurances of transparency and compensation under the 2013 Land Acquisition Act, concerns over lack of consultation and democratic process continue to rise.

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