BJP Faces Challenge After Jagdeep Dhankhar Resigns as Vice President, RSS Disagrees on BJP President Candidate
AIN NEWS 1: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए इस समय एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद पार्टी को दो महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां करनी हैं – नया उपराष्ट्रपति और भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष। यह काम इसलिए मुश्किल हो गया है क्योंकि दोनों पदों पर जातीय और राजनीतिक समीकरणों का खास ध्यान रखना होगा।
धनखड़ के इस्तीफे से बढ़ी दिक्कतें
जगदीप धनखड़ 2022 में उपराष्ट्रपति बने थे। उनकी पहचान किसान पुत्र के रूप में की जाती है, और माना जाता है कि उन्हें उपराष्ट्रपति बनाने का उद्देश्य जाट किसानों के बीच पार्टी की छवि मजबूत करना था। यह कदम खास तौर पर उन जाट किसानों को साधने के लिए उठाया गया था, जो 2020-21 में कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। अब उनके इस्तीफे के बाद भाजपा को नए उपराष्ट्रपति के चयन के साथ-साथ नए अध्यक्ष की तलाश भी करनी पड़ रही है।
भाजपा और RSS में सहमति का अभाव
पार्टी के भीतर चर्चा यह है कि भाजपा अध्यक्ष के नाम को लेकर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर पार्टी ने इस पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि RSS अध्यक्ष पद के लिए एक “मजबूत संगठनात्मक नेता” चाहता है, जबकि पार्टी नेतृत्व राजनीतिक और जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहता है।
दो पद, अलग-अलग समीकरण
खबरों के अनुसार, भाजपा अगस्त के अंत तक नए उपराष्ट्रपति का चुनाव करना चाहती है। पार्टी यह भी चाहती है कि लगभग इसी समय नए अध्यक्ष की भी घोषणा कर दी जाए। यदि उपराष्ट्रपति पद के लिए उच्च जाति के किसी नेता का चयन किया जाता है, तो अध्यक्ष पद के लिए ओबीसी या दलित नेता पर विचार किया जा सकता है।
2022 में राष्ट्रपति पद पर द्रौपदी मुर्मू के चयन के बाद भाजपा ने संदेश दिया था कि वह समाज के हर वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है। मुर्मू देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनी थीं। उस समय धनखड़ को उपराष्ट्रपति बनाकर पार्टी ने किसान समुदाय और विशेषकर जाट किसानों को साधने का प्रयास किया था।
संघ की पसंद और मोदी का हस्तक्षेप
अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने अध्यक्ष पद के लिए दो ओबीसी मंत्रियों के नाम सुझाए हैं – शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव। लेकिन RSS इन नामों से पूरी तरह सहमत नहीं है। माना जा रहा है कि इस गतिरोध को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं संघ नेतृत्व से बातचीत कर सकते हैं।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का नाम तय करने वाली बैठक में प्रधानमंत्री अगले अध्यक्ष के नाम पर भी चर्चा कर सकते हैं। यदि सहमति नहीं बनी तो प्रधानमंत्री स्वयं आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व से इस विषय पर बात करेंगे।”
एनडीए दलों से भी होगी चर्चा
रिपोर्टों के अनुसार, उपराष्ट्रपति पद के लिए नाम तय करने से पहले एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के सहयोगी दलों से भी चर्चा की जाएगी। पार्टी चाहती है कि जो भी नाम घोषित किया जाए, वह सभी दलों की सहमति से हो।
भविष्य की रणनीति
विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा इन दोनों पदों पर ऐसे नेताओं को बैठाना चाहती है, जो संगठन और सरकार दोनों के लिए लाभदायक हों। अध्यक्ष पद के लिए ओबीसी या दलित नेता चुनने से पार्टी को आने वाले चुनावों में लाभ मिल सकता है। दूसरी ओर, उपराष्ट्रपति पद के लिए उच्च जाति के नेता पर विचार से संतुलन साधा जा सकता है।
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे ने भाजपा के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब पार्टी को न केवल एक नए उपराष्ट्रपति की तलाश करनी है, बल्कि एक ऐसे अध्यक्ष की भी नियुक्ति करनी है, जिस पर पार्टी और RSS दोनों सहमत हों। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और RSS नेतृत्व इस गतिरोध को कैसे हल करते हैं और किन नामों पर अंतिम मुहर लगती है।
After Jagdeep Dhankhar’s resignation as Vice President, BJP faces a dual challenge of appointing a new Vice President and choosing the next BJP President. Internal disagreements between BJP and RSS over leadership preferences have delayed the announcement. While RSS seeks a strong organizational leader, Prime Minister Modi is focused on balancing caste and political equations. The party is considering OBC leaders like Dharmendra Pradhan and Bhupender Yadav, but final consensus is yet to be reached.


















