AIN NEWS 1: प्रयागराज में आयोजित माघ मेला 2026 के दौरान साधु-संतों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनती जा रही है। इस विवाद के केंद्र में हैं शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, जिनके कुछ कदमों और बयानों को लेकर माघ मेला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान भी सामने आया है, जिसे बिना नाम लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जोड़कर देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी का तीखा संदेश
एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परंपरा, अनुशासन और सनातन धर्म की मर्यादा पर जोर देते हुए कहा कि किसी को भी धार्मिक परंपराओं को बाधित करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि आज के समय में कुछ ऐसे “कालनेमि” मौजूद हैं, जो धर्म की आड़ लेकर सनातन परंपरा को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
सीएम योगी ने यह भी स्पष्ट किया कि एक सच्चे संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र सर्वोपरि होते हैं और किसी भी प्रकार का अहंकार या अराजकता संन्यास की भावना के विपरीत है। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रयागराज में माघ मेला प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच तनातनी खुलकर सामने आ चुकी है।
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48 घंटे में दूसरा नोटिस, बढ़ा प्रशासनिक दबाव
माघ मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को 48 घंटे के भीतर दूसरा नोटिस जारी किया है। यह नोटिस मौनी अमावस्या के दिन हुई घटनाओं से जुड़ा है। प्रशासन का आरोप है कि उस दिन बैरिकेडिंग तोड़ी गई और सुरक्षा नियमों की अनदेखी करते हुए भीड़ के बीच जबरन बग्घी प्रवेश कराई गई, जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी।
नोटिस में यह भी पूछा गया है कि जब प्रशासन ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे, तब उनका पालन क्यों नहीं किया गया। मेला प्रशासन का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में अनुशासनहीनता किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हो सकती।
सुरक्षा और परंपरा के बीच संतुलन की चुनौती
माघ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह विश्व का सबसे बड़ा अस्थायी धार्मिक समागम माना जाता है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं की सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और परंपराओं के बीच संतुलन बनाए रखने की होती है।
प्रशासन का तर्क है कि नियम सभी के लिए समान हैं, चाहे वह आम श्रद्धालु हों या बड़े धार्मिक पदों पर आसीन संत। वहीं, संत पक्ष का मानना है कि परंपराओं के नाम पर कुछ व्यवस्थाएं सदियों से चली आ रही हैं, जिन्हें अचानक बदला नहीं जा सकता।
अविमुक्तेश्वरानंद का पक्ष
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से अभी तक नोटिस पर कोई विस्तृत लिखित प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन उनके समर्थकों का कहना है कि यह पूरा मामला परंपरागत अधिकारों और प्रशासनिक हस्तक्षेप से जुड़ा हुआ है। समर्थकों के अनुसार, संत समाज की भावनाओं को समझे बिना सख्ती दिखाना विवाद को और गहरा सकता है।
हालांकि, प्रशासन का रुख स्पष्ट है कि कानून और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा, चाहे सामने कोई भी हो।
राजनीति और धर्म का मेल
इस पूरे विवाद ने राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है। विपक्षी दल जहां इसे संतों के सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं सत्तापक्ष इसे कानून-व्यवस्था और अनुशासन का सवाल बता रहा है। मुख्यमंत्री योगी का बयान इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने सीधे नाम न लेते हुए भी कड़ा संदेश दे दिया है।
आगे क्या?
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रशासन के नोटिस का क्या जवाब देते हैं और क्या यह विवाद संवाद के जरिए सुलझता है या और बढ़ता है। माघ मेला जैसे विशाल आयोजन में किसी भी तरह का टकराव न केवल प्रशासन बल्कि श्रद्धालुओं के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है।
फिलहाल, प्रयागराज में माहौल संवेदनशील बना हुआ है और प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ स्थिति पर नजर रखे हुए है।
The Magh Mela 2026 in Prayagraj has become the center of a major controversy involving Swami Avimukteshwaranand Saraswati and the local administration. Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath issued a strong statement emphasizing discipline, tradition, and national duty, while the Magh Mela administration sent a second notice over alleged violations during Mauni Amavasya. The dispute highlights the growing tension between religious traditions and administrative regulations at one of India’s largest spiritual gatherings.


















