Delhi Court issues NBW against SI Sandeep Rawal in POCSO case, sends him to judicial custody
कोर्ट की सख्ती: पॉक्सो मामले में पेश न होने पर एसआई संदीप रावल न्यायिक हिरासत में, 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया
AIN NEWS 1: पूर्वी दिल्ली में कड़कड़डूमा कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर (एसआई) संदीप रावल को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दरअसल, वर्ष 2018 में दर्ज एक पॉक्सो मामले (POCSO Case) की सुनवाई में बार-बार अनुपस्थित रहने और कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने पर यह कड़ी कार्रवाई की गई।
मामला क्या है?
कल्याणपुरी थाने में साल 2018 में पॉक्सो एक्ट के तहत एक केस दर्ज हुआ था। इस केस के जांच अधिकारी एसआई संदीप रावल थे। उस समय वह कल्याणपुरी थाने में तैनात थे, जबकि वर्तमान में उनकी तैनाती गोविंदपुरी थाने में है।
कोर्ट में बार-बार नोटिस भेजने और बुलाने के बावजूद एसआई रावल सुनवाई में पेश नहीं हो रहे थे। अदालत ने पहले उन्हें पेश होने का मौका दिया और ₹10,000 के जमानती वारंट (Bail Bond) भरने का आदेश भी दिया। लेकिन उन्होंने आदेश की अनदेखी की, जिसके बाद स्थिति और गंभीर हो गई।
कोर्ट की सख्ती
जब एसआई लगातार सुनवाई में पेश नहीं हुए, तो कड़कड़डूमा कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया। इसके बाद एसआई कोर्ट में पहुंचे और सफाई दी कि उस दिन वह साकेत कोर्ट में एक अन्य केस से जुड़े आरोपपत्र दाखिल करने में व्यस्त थे।
लेकिन कोर्ट ने उनकी यह दलील मानने से इनकार कर दिया और कड़ी नाराज़गी जताई। अदालत ने उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि जांच अधिकारी का इस तरह से लापरवाह रवैया न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करता है और यह अस्वीकार्य है।
₹10,000 की जमानती राशि का आदेश
कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए आदेश दिया कि वे ₹10,000 की जमानती राशि जमा करें। मगर एसआई रावल ने यह राशि दो बार मौका देने के बावजूद भी जमा नहीं की।
आखिरकार, अदालत ने सख्ती दिखाते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया।
विभागीय कार्यवाही का भरोसा और जमानत
जब यह खबर गोविंदपुरी थाने के एसएचओ धर्मवीर सिंह तक पहुंची तो वे तुरंत कड़कड़डूमा कोर्ट पहुंचे और अदालत से एसआई को छोड़ने का अनुरोध किया।
एसएचओ ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि एसआई रावल के खिलाफ विभागीय कार्यवाही (Departmental Action) जरूर की जाएगी। इस आश्वासन के बाद कोर्ट ने उन्हें राहत दी और ₹10,000 की जमानत राशि तथा इतने ही निजी मुचलके पर जमानत दे दी।
कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि पुलिस अधिकारियों का कोर्ट की कार्यवाही में गैर-हाजिर होना न्याय व्यवस्था को कमजोर करता है। पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में जांच अधिकारी का लगातार अनुपस्थित रहना पीड़ित पक्ष के लिए भी न्याय में देरी का कारण बनता है।
पुलिस विभाग पर भी सवाल
यह पूरा मामला केवल एसआई की व्यक्तिगत लापरवाही नहीं, बल्कि पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है। अगर एक जांच अधिकारी, जो इतने संवेदनशील केस से जुड़ा हो, कोर्ट की तारीखों को गंभीरता से नहीं लेता, तो यह पीड़ित परिवार के लिए न्याय पाने की प्रक्रिया को और कठिन बना देता है।
एसआई की सफाई
कोर्ट में पेश होकर एसआई रावल ने कहा कि वह सुनवाई में गैर-हाजिर इसलिए रहे क्योंकि उन्हें दूसरी अदालत में आरोपपत्र दाखिल करना था। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को बहाना मानते हुए कहा कि उन्हें पहले से कोर्ट को सूचित करना चाहिए था।
बड़ा सबक
यह मामला पुलिस विभाग के सभी अधिकारियों के लिए एक बड़ा सबक है। अदालत ने यह साफ कर दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया से खिलवाड़ किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। जांच अधिकारी का यह कर्तव्य है कि वह हर सुनवाई में समय पर हाज़िर हो और केस से जुड़ी सभी जानकारी कोर्ट को समय पर उपलब्ध कराए।
आगे क्या होगा?
अब जबकि एसएचओ ने कोर्ट को विभागीय कार्रवाई का भरोसा दिया है, उम्मीद की जा रही है कि दिल्ली पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेगी। विभागीय जांच के बाद एसआई रावल पर क्या कार्रवाई होगी, यह आने वाला समय बताएगा।
The Delhi Karkardooma Court has issued a non-bailable warrant (NBW) against SI Sandeep Rawal for repeatedly failing to appear in a POCSO case from 2018. The court imposed a ₹10,000 fine and sent him to judicial custody, later granting bail after the assurance of departmental action by senior Delhi Police officers. This incident highlights issues of police accountability, judicial discipline, and the importance of POCSO case hearings in India.


















