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दिल्ली में बड़ी कार्रवाई: डी.सी.पी. एस. बी. के. सिंह हटाए गए, सतिश गोलचा बने नए पुलिस कमिश्नर

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AIN NEWS 1 | दिल्ली में कानून व्यवस्था के शीर्ष पद—पुलिस कमिश्नर—में अचानक हुए बदलाव ने पूरे कैपिटल में हलचल मचा दी है। यह परिवर्तन उस बड़ी घटना के ठीक बाद आया, जब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर उनके निवास पर जन सुनवाई के दौरान हमला हुआ। इस घटना को लेकर सुरक्षा में चूक की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने एस. बी. के. सिंह को उनके पद से हटा दिया और तत्काल प्रभाव से सतीश गोलचा को नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया।

सुरक्षा में चूक—क्या हुआ था?

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर उनके आधिकारिक आवास में आयोजित जन सुनवाई के दौरान एक हमलावर ने हमला किया। इस सुरक्षा चूक की गहराई से जांच की गई, और इसकी रिपोर्ट के निष्कर्षों ने सुरक्षाबलों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए। केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया तेज़ थी—एक ओर सुरक्षा में संशोधन की घोषणा की गई, वहीं दूसरी ओर पुलिस नेतृत्व में बदलाव की दिशा में कदम उठाया गया।

शीर्ष पदस्थ अधिकारी बदलने का औपचारिक आदेश

गृह मंत्रालय (MHA) ने कार्यालय आदेश जारी कर स्पष्ट रूप से लिखा कि “स. सतीश गोलचा, आईपीएस (AGMUT:1992), वर्तमान में डी.जी. (प्रिजन), दिल्ली” हैं, “उन्हें तत्काल प्रभाव से दिल्ली पुलिस कमिश्नर के रूप में नियुक्त किया जाता है, यह पद ‘और आदेश तक’ उनके पास रहेगा।”

एस. बी. के. सिंह कौन थे—और क्यों हटाए गए?

एस. बी. के. सिंह, जो कि 1988-बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और AGMUT कैडर से आते हैं, उन्हें 1 अगस्त 2025 को अतिरिक्त प्रभार के रूप में दिल्ली पुलिस कमिश्नर बनाया गया था—संजय अरोड़ा के वरिष्ठता लेने के बाद  हालांकि, मुख्यमंत्री पर हुए हमले के बाद उनके नेतृत्व में सुरक्षा व्यवस्था की विफलता को गंभीरता से लिया गया, और उन्हें हटाने का निर्णय लिया गया

नया कमिश्नर—सतीश गोलचा का परिचय

नई पोस्ट की जिम्मेदारी संभालने वाले सतीश गोलचा, 1992-बैच के AGMUT कैडर आईपीएस अधिकारी हैं। इससे पहले वे दिल्ली के डी.जी. (प्रिजन) के रूप में तिहाड़ जेल, मंडोली और रोहिणी जेलों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे इसके अतिरिक्त, उन्होंने पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों के दौरान विशेष पुलिस आयुक्त (लॉ एंड ऑर्डर) और स्पेशल पुलिस आयुक्त (इंटेलिजेंस) जैसे अहम पदों पर रहते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है

उनकी छवि एक सख्त, अनुशासित और क्षमता संपन्न अधिकारी के रूप में स्थापित है। एक समाचार में उन्हें “हार्ड टास्कमास्टर” कहा गया है, जिसका मतलब—कठिन परिश्रमी और जिम्मेदार— है

कानूनी और सार्वजनिक प्रतिक्रिया

इस परिवर्तन को दिल्ली प्रशासन और आम जनता दोनों ने सतर्कता और जिम्मेदारी की दिशा में उठाया गया कदम माना है। गृह मंत्रालय की यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश है कि राजधानी में सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इसी क्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को ‘Z’ श्रेणी सुरक्षा (CRPF द्वारा) प्रदान की गई है, जो उनके सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित करती है

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