Delhi Police Corruption: Sub-Inspector Caught Taking ₹40,000 Bribe, SHO Suspended
दिल्ली पुलिस में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा: सब-इंस्पेक्टर रिश्वत लेते पकड़ा गया, SHO निलंबित
AIN NEWS 1: दिल्ली पुलिस एक बार फिर सवालों के घेरे में है, और इस बार वजह है रिश्वतखोरी का एक चौंकाने वाला मामला। उत्तरी रोहिणी थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर विजय सिंह को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है। इस कार्रवाई को अंजाम दिया है केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने, जो इस मामले में पहले से जांच कर रही थी। विजय सिंह पर आरोप है कि वह एक व्यक्ति के रिश्तेदार को गिरफ्तार न करने और अग्रिम जमानत में मदद करने के बदले घूस मांग रहा था।
रिश्वत की डील और गिरफ्तारी की पटकथा
5 अगस्त को CBI को एक व्यक्ति ने शिकायत दी कि सब-इंस्पेक्टर विजय सिंह उसके चचेरे भाई को गिरफ़्तार न करने के लिए 50 हजार रुपये की मांग कर रहा है। काफी बातचीत के बाद विजय सिंह 40 हजार रुपये पर तैयार हो गया। CBI ने शिकायतकर्ता की मदद से जाल बिछाया और जैसे ही विजय सिंह ने रकम ली, उसे मौके पर ही धर दबोचा गया।
SHO पर भी कार्रवाई, विभागीय जांच शुरू
रिश्वत मामले में सिर्फ विजय सिंह ही नहीं, बल्कि थाने के प्रभारी एसएचओ खालिद हुसैन पर भी गाज गिरी है। दिल्ली पुलिस आयुक्त एसबीके सिंह के निर्देश पर एसएचओ खालिद हुसैन को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। खालिद हुसैन 1996 बैच के अधिकारी हैं और इससे पहले तुगलक रोड थाने में भी तैनात रह चुके हैं। वहां से भी उन्हें विधानसभा चुनाव के दौरान एक सप्ताह में ही हटा दिया गया था।
SHO पद पर समय सीमा: भ्रष्टाचार की जड़?
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार SHO पद पर इंस्पेक्टरों को अधिकतम तीन साल तक रहने की पाबंदी है। इसी कारण कई अधिकारी इलाके की कानून व्यवस्था पर ध्यान देने के बजाय अन्य गतिविधियों में लिप्त हो जाते हैं, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह नियम, जिसे चार साल पहले लागू किया गया था, दिल्ली पुलिस में फैलते भ्रष्टाचार का कारण बन रहा है?
खालिद हुसैन ने केवल छह महीने ही उत्तरी रोहिणी थाने के SHO पद पर कार्य किया था। बावजूद इसके, उनके और विजय सिंह के संबंधों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, विजय सिंह को SHO खालिद हुसैन का करीबी माना जाता है, जिससे इस मामले में मिलीभगत की आशंका और गहराती है।
दिल्ली पुलिस में भ्रष्टाचार: क्यों और कैसे?
यह कोई पहला मामला नहीं है जब दिल्ली पुलिस के किसी अधिकारी पर रिश्वत लेने का आरोप लगा हो। पिछले कुछ वर्षों में विजिलेंस यूनिट और CBI द्वारा कई पुलिसकर्मियों को रिश्वत लेते पकड़ा गया है। यह स्पष्ट संकेत देता है कि विभाग के अंदर व्यवस्था में कुछ गंभीर खामियां हैं, जिन्हें जल्द ठीक करना जरूरी है।
अक्सर देखा गया है कि थानों में तैनात अधिकारी, खासतौर पर जो एसएचओ जैसे अहम पदों पर होते हैं, क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति सुधारने के बजाय अपने निजी हितों के लिए पद का दुरुपयोग करते हैं। इस बार सीबीआई की सक्रियता ने एक ऐसे ही मामले का खुलासा किया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जो मामले सामने नहीं आते, उनका क्या?
आगे की कार्रवाई क्या होगी?
CBI ने विजय सिंह को रिश्वत लेते गिरफ्तार करने के बाद उसके खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा और उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी। वहीं SHO खालिद हुसैन के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने विभागीय जांच शुरू कर दी है, और उनके निलंबन के आदेश भी जारी हो चुके हैं।
क्या SHO पद की समयसीमा खत्म होनी चाहिए?
वरिष्ठ अधिकारियों के बीच यह बहस तेज हो गई है कि SHO पद पर तीन साल की सीमा भ्रष्टाचार को रोकने की बजाय उसे बढ़ावा दे रही है। अधिकारी कहते हैं कि जब SHO को पता होता है कि उसका कार्यकाल सीमित है, तो वह कानून व्यवस्था के बजाय जल्दी-जल्दी निजी लाभ लेने की कोशिश करता है। ऐसे में जरूरत है इस नीति की पुनः समीक्षा की।
उत्तरी रोहिणी थाने में सामने आए इस मामले ने दिल्ली पुलिस की छवि को फिर से धूमिल कर दिया है। जहां एक ओर आम जनता न्याय और सुरक्षा के लिए पुलिस की ओर देखती है, वहीं दूसरी ओर रिश्वतखोरी जैसे मामले विश्वास को तोड़ने का काम करते हैं। CBI की यह कार्रवाई जरूरी थी, लेकिन अब देखना होगा कि दिल्ली पुलिस इस मामले से क्या सबक लेती है और भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
In a major Delhi Police corruption case, the CBI arrested Sub-Inspector Vijay Singh from North Rohini Police Station while accepting a ₹40,000 bribe. The bribe was allegedly demanded in exchange for not arresting a person’s relative. Following this, SHO Khalid Hussain was suspended, and a departmental inquiry was initiated. This incident has again raised serious questions about rising police corruption in Delhi and the systemic failures that allow it.



















