AIN NEWS 1 | बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का नाम भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। उनकी लोकप्रियता केवल पर्दे पर निभाए गए किरदारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनकी सादगी और जीवन जीने के तरीके ने भी लोगों के दिलों में जगह बनाई है। ‘शोले’, ‘सीता और गीता’, ‘चुपके-चुपके’ और ‘हीरो’ जैसी हिट फिल्मों से उन्होंने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। लेकिन पर्दे की चमक-धमक के पीछे उनकी असली जिंदगी बेहद सादा और शांत है।
धर्मेंद्र के पास एक बड़ा परिवार है – दो पत्नियाँ, छह बच्चे और तेरह नाती-पोते। फिर भी, उन्होंने अपना ज्यादातर वक्त अपने फार्महाउस में अकेले बिताने का फैसला किया है। यही उनकी जिंदगी का वह पहलू है जो लोगों को सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर इतने बड़े परिवार के बावजूद धर्मेंद्र ने अकेलेपन को क्यों चुना।
धर्मेंद्र का फार्महाउस – शांति का ठिकाना
राजस्थान और मुंबई के पास स्थित धर्मेंद्र का फार्महाउस हरियाली और सुकून से भरा हुआ है। यहां वे खेती-बाड़ी, बागवानी और पशुपालन जैसी गतिविधियों में समय बिताते हैं। यह जगह उनके लिए केवल एक घर नहीं, बल्कि मानसिक शांति और आत्मिक संतोष का स्रोत है।
जब वह फिल्मों और व्यस्तताओं से थक जाते हैं, तो यही फार्महाउस उन्हें नई ऊर्जा देता है। धर्मेंद्र का मानना है कि प्रकृति के बीच बिताया गया समय जीवन को गहराई से समझने का अवसर देता है।
फिल्मी चमक से दूर निजी जिंदगी
धर्मेंद्र का करियर हमेशा सुर्खियों में रहा। एक्शन हीरो से लेकर रोमांटिक किरदारों तक, उन्होंने हर भूमिका में खुद को साबित किया। उनकी निजी जिंदगी भी हमेशा चर्चा में रही। पहली पत्नी प्रकाश कौर (जिन्हें अक्सर हीरा कहा जाता है) और दूसरी पत्नी हेमा मालिनी के साथ उनका परिवार बहुत बड़ा है।
उनके बेटे सनी देओल और बॉबी देओल बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता हैं। वहीं, बेटियाँ ईशा देओल और अहाना देओल भी अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय हैं। परिवार के साथ प्यार और जुड़ाव के बावजूद, धर्मेंद्र ने फार्महाउस को अपनी प्राथमिकता बना लिया है।
अकेलेपन में छिपा सुकून
धर्मेंद्र का अकेले रहना उदासी या दूरी का प्रतीक नहीं है। बल्कि वह इसे अपने लिए “मी-टाइम” मानते हैं। यहां बैठकर वह अपने जीवन के संघर्षों, उपलब्धियों और अनुभवों पर विचार करते हैं।
वह मानते हैं कि जीवन में कभी-कभी अकेले रहना जरूरी होता है। यह समय इंसान को आत्मनिरीक्षण का मौका देता है और छोटे-छोटे सुखों का महत्व सिखाता है।
परिवार से गहरा जुड़ाव
धर्मेंद्र का यह निर्णय उनके परिवार से दूरी बनाने का नहीं है। वह अपने बच्चों और नाती-पोतों के बेहद करीब हैं। अक्सर उनके बच्चे और पोते-पोतियाँ फार्महाउस में उनसे मिलने आते हैं और परिवार एक साथ समय बिताता है।
धर्मेंद्र के लिए यह मुलाकातें त्योहारों से कम नहीं होतीं। उनका कहना है कि परिवार का प्यार और साथ जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
जीवन दर्शन और प्रेरणा
धर्मेंद्र का मानना है कि सफलता और धन जीवन को सुखी नहीं बनाते, बल्कि असली खुशी मानसिक शांति और आत्मिक संतोष से आती है। फार्महाउस में अकेले रहकर वह इस विचार को जीते हैं।
उनकी सादगी और सोच आज की युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा है। वह अपने फैन्स को यह संदेश देना चाहते हैं कि भीड़-भाड़ और शोहरत से ज्यादा जरूरी है खुद को समझना और जीवन को सादगी से जीना।
स्वास्थ्य और दिनचर्या
धर्मेंद्र अपने स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखते हैं। सुबह की सैर, हल्का व्यायाम और संतुलित आहार उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। इसके अलावा उन्हें बागवानी और पशुपालन करना बेहद पसंद है।
ये छोटे-छोटे शौक उन्हें न केवल व्यस्त रखते हैं बल्कि मानसिक ताजगी भी देते हैं।
धर्मेंद्र की जिंदगी यह साबित करती है कि खुशियां बाहरी दुनिया की भीड़ या शोहरत में नहीं, बल्कि सादगी और आत्मसंतोष में छिपी होती हैं।
बड़े परिवार और स्टारडम के बावजूद उन्होंने फार्महाउस में अकेले रहना चुना और इसे अपनी खुशी का जरिया बनाया। परिवार, करियर और निजी शांति – इन तीनों के बीच संतुलन बनाना ही उनका जीवन दर्शन है।
यह कहानी हमें सिखाती है कि जिंदगी की असली सफलता वही है, जिसमें इंसान अपनी आत्मा की आवाज़ सुनकर जी सके।



















