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आज़ाद भारत का पहला बजट किसने पेश किया था? अब तक सबसे ज़्यादा बार वित्त मंत्री कौन बना, जानिए पूरी जानकारी

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AIN NEWS 1 | देश का आम बजट भारत की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने वाला सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। हर साल 1 फरवरी को जब वित्त मंत्री संसद में बजट भाषण पढ़ते हैं, तो करोड़ों लोगों की निगाहें टीवी स्क्रीन पर टिकी रहती हैं। किसान, नौकरीपेशा वर्ग, व्यापारी, उद्योगपति — सभी को इस दिन सरकार से बड़ी उम्मीदें होती हैं।

इस साल भी देश एक बार फिर बजट के लिए तैयार है। 1 फरवरी को रविवार के दिन आम बजट पेश किया जाएगा, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में प्रस्तुत करेंगी। यह बजट कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रहा है, क्योंकि निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार बजट पेश करने वाली पहली वित्त मंत्री बन जाएंगी।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज़ाद भारत का पहला बजट किसने पेश किया था?
या फिर अब तक सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड किसके नाम है?

आइए जानते हैं भारत के बजट इतिहास से जुड़ी पूरी कहानी।

भारत में बजट की शुरुआत कैसे हुई?

भारत में बजट की परंपरा आज़ादी से भी पहले की है। ब्रिटिश शासन के दौरान ही देश में पहली बार बजट पेश किया गया था।

7 अप्रैल 1860 को ब्रिटिश सरकार के वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने भारत का पहला बजट प्रस्तुत किया था। उस समय भारत पूरी तरह अंग्रेजों के नियंत्रण में था और बजट का मकसद औपनिवेशिक शासन को मजबूत करना था।

हालांकि यह बजट भारतीय हितों के लिए नहीं, बल्कि ब्रिटिश प्रशासन की जरूरतों के अनुसार बनाया गया था।

आज़ाद भारत का पहला बजट किसने पेश किया?

देश को आज़ादी मिलने के बाद भारत ने अपनी आर्थिक नीति खुद तय करनी शुरू की। इसी क्रम में 26 नवंबर 1947 को आज़ाद भारत का पहला आम बजट पेश किया गया।

इस ऐतिहासिक बजट को पेश करने वाले थे—

आर. के. शनमुखम चेट्टी

वे स्वतंत्र भारत के पहले वित्त मंत्री बने और उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू की अंतरिम सरकार में यह जिम्मेदारी निभाई।

यह बजट उस दौर में आया था जब देश:

  • बंटवारे की पीड़ा झेल रहा था

  • शरणार्थियों की समस्या गंभीर थी

  • अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर हालत में थी

ऐसे कठिन समय में पेश किया गया यह बजट भारत के आर्थिक पुनर्निर्माण की पहली नींव माना जाता है।

सबसे ज्यादा बार बजट किसने पेश किया?

अगर बात करें भारत के इतिहास में सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने की, तो यह रिकॉर्ड मोरारजी देसाई के नाम दर्ज है।

🔹 मोरारजी देसाई

  • कुल बजट: 10 बार

  • वित्त मंत्री के रूप में कार्यकाल:

    • जवाहरलाल नेहरू सरकार

    • लाल बहादुर शास्त्री सरकार

मोरारजी देसाई भारत के ऐसे नेता थे जिन्होंने न केवल सबसे अधिक बजट पेश किए, बल्कि बाद में देश के प्रधानमंत्री भी बने।

आज भी उनका नाम बजट इतिहास में सबसे ऊपर दर्ज है।

मनमोहन सिंह का ऐतिहासिक योगदान

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह भी भारत के बजट इतिहास में बेहद अहम स्थान रखते हैं।

उन्होंने 1991 से 1995 के बीच, प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार में वित्त मंत्री रहते हुए—

  • लगातार 5 बजट पेश किए

1991 का बजट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। इसी बजट के जरिए:

  • आर्थिक उदारीकरण

  • निजीकरण

  • वैश्वीकरण

जैसी नीतियों की शुरुआत हुई, जिसने भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी।

पी. चिदंबरम ने कितनी बार बजट पेश किया?

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम भी सबसे ज्यादा बजट पेश करने वाले नेताओं में शामिल हैं।

उन्होंने कुल 9 बार आम बजट प्रस्तुत किया।

उनका कार्यकाल इस प्रकार रहा:

  • पहला बजट: 19 मार्च 1996 (एच.डी. देवेगौड़ा सरकार)

  • संयुक्त मोर्चा सरकार में 2 बजट

  • 2004 से 2008 तक यूपीए सरकार में 5 बजट

  • 2013 और 2014 में 2 बजट

पी. चिदंबरम को आर्थिक मामलों में मजबूत पकड़ रखने वाले वित्त मंत्रियों में गिना जाता है।

प्रणब मुखर्जी का रिकॉर्ड

भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी वित्त मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कुल 8 बार बजट भाषण दिए।

  • 1982, 1983 और 1984 में 3 बजट

  • 2009 से 2012 के बीच यूपीए सरकार में लगातार 5 बजट

प्रणब मुखर्जी को बजट भाषणों में स्पष्टता और गहराई के लिए जाना जाता था।

निर्मला सीतारमण का ऐतिहासिक सफर

वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 2019 से इस पद पर कार्यरत हैं।

वे भारत की:

  • पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री

  • और सबसे लंबे समय तक लगातार बजट पेश करने वाली वित्त मंत्री बनने जा रही हैं

अब तक उन्होंने:

  • 1 अंतरिम बजट

  • 7 आम बजट

पेश किए हैं।

2026 का बजट उनका लगातार नौवां बजट होगा, जो उन्हें इतिहास में एक अलग पहचान दिलाएगा।

एक ही प्रधानमंत्री के कार्यकाल में लगातार 9 बार बजट पेश करने वाली वे देश की इकलौती वित्त मंत्री होंगी।

क्यों खास होता है बजट का दिन?

बजट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं होता, बल्कि यह देश की:

  • आर्थिक प्राथमिकताएं

  • सरकार की नीतियां

  • आने वाले वर्षों की दिशा

तय करता है।

इसी वजह से बजट का इतिहास जानना हमें यह समझने में मदद करता है कि भारत ने आर्थिक रूप से कितनी लंबी यात्रा तय की है।

आज जब देश 2026 के बजट की ओर देख रहा है, तब यह जानना भी जरूरी है कि:

  • यह परंपरा कहां से शुरू हुई

  • किन नेताओं ने इसे दिशा दी

  • और कैसे बजट ने भारत को आज की अर्थव्यवस्था तक पहुंचाया

आजादी के बाद से लेकर अब तक बजट भारत की विकास यात्रा का आईना रहा है।

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