AIN NEWS 1: गाजियाबाद का राज नगर एक्सटेंशन इन दिनों देश के सबसे प्रदूषित इलाकों में शुमार हो चुका है। गुरुवार सुबह 9:53 बजे दर्ज किए गए आंकड़ों के मुताबिक यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 465 तक पहुंच गया, जिसे वायु गुणवत्ता की श्रेणी में “Hazardous यानी अत्यंत खतरनाक” माना जाता है। यह स्तर न केवल बुज़ुर्गों और बच्चों, बल्कि पूरी आबादी के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।
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🚨 AQI 465 का मतलब क्या है?
AQI अगर 300 के पार चला जाए, तो उसे Severe माना जाता है। लेकिन जब यह 400 के ऊपर पहुंचता है, तो हालात बेहद चिंताजनक हो जाते हैं।
राज नगर एक्सटेंशन में दर्ज AQI 465 यह साफ संकेत देता है कि यहां की हवा में सांस लेना स्वास्थ्य के लिए उतना ही खतरनाक है, जितना रोज़ाना कई सिगरेट पीना।
🚬 एक दिन में 12.8 सिगरेट पीने जितना ज़हर
Berkeley Earth के हेल्थ एडवाइजरी डेटा के मुताबिक,
राज नगर एक्सटेंशन में PM2.5 के मौजूदा स्तर पर सांस लेना ऐसा है जैसे कोई व्यक्ति रोज़ाना 12.8 सिगरेट पी रहा हो।
साप्ताहिक असर: लगभग 90 सिगरेट
मासिक असर: करीब 384 सिगरेट
यह आंकड़े बताते हैं कि बिना धुएं के भी फेफड़े किस हद तक ज़हर झेल रहे हैं।
🧪 सबसे खतरनाक प्रदूषक: PM2.5 और PM10
इस इलाके में प्रदूषण के दो सबसे बड़े कारण हैं:
PM2.5: 308 µg/m³
PM10: 446 µg/m³
PM2.5 इतने सूक्ष्म कण होते हैं कि ये सीधे फेफड़ों में जाकर खून में घुल सकते हैं। इससे अस्थमा, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और यहां तक कि कैंसर तक का खतरा बढ़ जाता है।
🌫️ कोहरे ने बढ़ाई मुसीबत
गाजियाबाद में इस समय तापमान करीब 7 डिग्री सेल्सियस, नमी 93%, और मौसम में घना कोहरा दर्ज किया गया है।
कम हवा की रफ्तार (9 किमी/घंटा) के चलते प्रदूषक कण हवा में ही अटके हुए हैं, जिससे हालात और बिगड़ गए हैं।
🌍 दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में गाजियाबाद दूसरे नंबर पर
एक और चौंकाने वाली बात यह है कि इस समय गाजियाबाद दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।
यह न सिर्फ स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है।
📅 जनवरी 2026: पूरा महीना ज़हरीली हवा के नाम
जनवरी 2026 का AQI कैलेंडर बताता है कि लगभग पूरा महीना हवा की गुणवत्ता Poor से लेकर Hazardous श्रेणी में रही।
कुछ उदाहरण:
14 जनवरी: AQI 468
15 जनवरी: AQI 432
16 जनवरी: AQI 464
यानी यह कोई एक दिन की समस्या नहीं, बल्कि लगातार बना रहने वाला संकट है।
⚠️ स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर
डॉक्टरों के मुताबिक, ऐसे हालात में लोगों को ये समस्याएं हो सकती हैं:
आंखों में जलन और पानी आना
गले में खराश और खांसी
सांस फूलना
सिर दर्द और चक्कर
बच्चों में फेफड़ों का विकास प्रभावित होना
लंबे समय तक इस हवा में रहने से हार्ट डिज़ीज़ और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
🛑 क्या करें, क्या न करें? (Health Advisory)
विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार:
✔ घर के अंदर एयर प्यूरीफायर चालू रखें
✔ बाहर निकलते समय N95 मास्क ज़रूर पहनें
✔ कार में केबिन एयर फिल्टर का इस्तेमाल करें
✔ बच्चों और बुज़ुर्गों को बाहर जाने से रोकें
❌ सुबह-शाम टहलने से बचें
❌ खुले में व्यायाम न करें
🤔 सवाल सिर्फ मौसम का नहीं, सिस्टम का भी
हर साल सर्दियों में यही हाल होता है, लेकिन समाधान अब भी अधूरे हैं।
निर्माण कार्यों से उठती धूल, वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन और पराली जैसे मुद्दे अब केवल बहाने बनकर रह गए हैं।
जब हवा सांस लेने लायक न बचे, तो यह सिर्फ पर्यावरण की नहीं, बल्कि मानव अधिकारों की भी समस्या बन जाती है।
राज नगर एक्सटेंशन की हवा इस समय ज़हर बन चुकी है। यह रिपोर्ट सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि एक चेतावनी है।
अगर अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में इसका खामियाजा पूरी पीढ़ी को भुगतना पड़ सकता है।
Ghaziabad air pollution has reached alarming levels as AQI in Raj Nagar Extension touched 465, placing it in the hazardous category. High PM2.5 and PM10 concentrations have severely affected air quality, making breathing equivalent to smoking multiple cigarettes daily. Ghaziabad currently ranks among the most polluted cities globally, raising serious health concerns for residents.


















