AIN NEWS 1| गाजियाबाद में आवासीय इलाकों में बढ़ते अवैध व्यवसायों के खिलाफ GDA ने सख्त रुख अपनाया है।
मधुबन बापूधाम के ईडब्ल्यूएस (EWS) फ्लैट्स में व्यावसायिक गतिविधियों की शिकायतों के बाद गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) ने इन फ्लैट्स को सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। यह फैसला उन लोगों के लिए चेतावनी है जो आवासीय इलाकों में बगैर अनुमति के व्यवसाय चला रहे हैं।
मामला क्या है?
मधुबन बापूधाम में GDA द्वारा बनाए गए ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स का उद्देश्य था – आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को किफायती घर उपलब्ध कराना। लेकिन समय के साथ कई फ्लैट मालिकों ने इन घरों में दुकानें, कोचिंग सेंटर, ब्यूटी पार्लर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दीं।
यह न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे आवासीय क्षेत्र का मूल उद्देश्य भी खत्म हो जाता है। GDA के नियम स्पष्ट हैं — बिना अनुमति के रिहायशी फ्लैट में व्यावसायिक काम नहीं किया जा सकता।
पहले भेजे गए थे नोटिस
प्राधिकरण को जब इन अवैध गतिविधियों की जानकारी मिली, तो संबंधित फ्लैट मालिकों को पहले नोटिस जारी किए गए।
इनमें स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि अगर व्यावसायिक गतिविधियों को बंद नहीं किया गया, तो प्राधिकरण कार्रवाई करेगा।
लेकिन अधिकांश लोगों ने इन चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया, और व्यवसाय चलाते रहे।
अचानक पहुंची टीम, फ्लैट किए गए सील
बुधवार को GDA की प्रवर्तन टीम, जोन-3 के नेतृत्व में, अचानक मधुबन बापूधाम पहुंची।
जिन फ्लैटों में व्यवसाय चल रहे थे, उन्हें चिन्हित कर सील कर दिया गया।
यह छापामार कार्रवाई इतनी अचानक हुई कि किसी को भी तैयारी का मौका नहीं मिला।
GDA के अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह ने बताया:
“हमने पहले भी चेतावनी दी थी। लेकिन जब लोग नहीं माने, तो हमें यह कार्रवाई करनी पड़ी। रिहायशी मकानों को दुकान में बदलना कानून का उल्लंघन है।”
GDA की चिंता क्यों है?
प्राधिकरण का कहना है कि रिहायशी इलाकों में दुकानें और कोचिंग सेंटर खुलने से कई तरह की समस्याएं पैदा होती हैं:
शांति भंग होती है
ट्रैफिक बढ़ता है
पार्किंग की समस्या होती है
बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है
इसके अलावा, यह उन लोगों के साथ अन्याय है, जो घर रहने के उद्देश्य से खरीदते हैं, लेकिन आसपास अवैध दुकानें खुल जाने से उनका रहन-सहन प्रभावित होता है।
स्थानीय लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
सीलिंग की कार्रवाई के बाद लोगों की राय बंटी नजर आई।
कई स्थानीय निवासियों ने इस कदम का समर्थन किया, जबकि कुछ फ्लैट मालिकों ने इसे अचानक और कठोर बताया।
रेखा शर्मा, जो वहीं रहती हैं, ने कहा:
“बिल्डिंग के हर कोने में दुकानें खुल गई थीं। बच्चों का निकलना मुश्किल हो गया था। यह कार्रवाई समय रहते हो गई, अच्छा है।”
वहीं सुनील वर्मा, जिनका ट्यूशन सेंटर सील हुआ, बोले:
“हम लॉकडाउन के बाद से आर्थिक तंगी झेल रहे थे। थोड़ा समय मिल जाता, तो खुद ही बंद कर देते। एकदम से सीलिंग करना कठोर है।”
आगे और होगी कार्रवाई?
GDA ने यह भी साफ कर दिया है कि यह सिर्फ शुरुआत है।
अगर अन्य जगहों पर भी इसी तरह के उल्लंघन पाए गए, तो वहां भी जल्द कार्रवाई की जाएगी।
प्राधिकरण का कहना है कि शहर का व्यवस्थित और नियमबद्ध विकास ही प्राथमिकता है, और उसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्या आपके फ्लैट पर भी हो सकती है कार्रवाई?
अगर आप भी किसी रिहायशी सोसाइटी या फ्लैट में बिना अनुमति के कोई व्यवसाय चला रहे हैं, तो सतर्क हो जाइए:
GDA या अन्य प्राधिकरण द्वारा कोई भी नोटिस मिलने के बाद कार्रवाई कभी भी हो सकती है।
सीलिंग के बाद राहत पाने के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी।
बिना अनुमति के व्यवसाय करने पर जुर्माना और अदालत में केस तक चल सकता है।
मधुबन बापूधाम में GDA की कार्रवाई सिर्फ कुछ फ्लैटों की सीलिंग नहीं है — यह एक संदेश है।
शहर में नियम तोड़ने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।
ईडब्ल्यूएस फ्लैट जैसे प्रोजेक्ट्स उन लोगों के लिए बनाए जाते हैं, जो वाकई ज़रूरतमंद हैं। लेकिन जब इन्हें अवैध व्यवसायों में बदला जाता है, तो पूरा सिस्टम प्रभावित होता है।
इसलिए GDA की कार्रवाई को नियमों की रक्षा और शहर के सुनियोजित विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जाना चाहिए।
In a strict move to enforce urban housing regulations, the Ghaziabad Development Authority (GDA) sealed several EWS flats in Madhuban Bapudham for unauthorized commercial activities. These flats, meant for economically weaker sections, were being misused for shops and tuition centers. Despite multiple GDA warnings and notices, owners failed to comply, leading to sealing action. This GDA crackdown aims to protect residential integrity and ensure lawful urban development in Ghaziabad.



















