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गाजियाबाद कस्टडी विवाद: युवक की पिटाई के आरोप, 2 दरोगा समेत 4 पुलिसकर्मी सस्पेंड, गांव में उबाल!

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AIN NEWS 1: गाजियाबाद जिले के निवाड़ी थाना क्षेत्र में एक युवक के साथ कथित पुलिस बर्बरता का मामला सामने आने के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय स्तर पर आक्रोश पैदा किया है, बल्कि पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 2 दरोगा समेत 4 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है और विभागीय जांच शुरू कर दी है।

📍 क्या है पूरा मामला?

यह मामला निवाड़ी थाना क्षेत्र के पतला गांव का है, जहां रहने वाले 32 वर्षीय अमित कुमार नगर पंचायत में आउटसोर्सिंग कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं। बताया जा रहा है कि 7 अप्रैल की रात अमित अपने तीन दोस्तों के साथ बैठकर शराब पी रहा था। इसी दौरान पुलिस वहां पहुंची और किसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हो गई।

स्थिति बिगड़ने पर पुलिस अमित को हिरासत में लेकर निवाड़ी थाने ले आई। इसके बाद जो हुआ, वही इस पूरे विवाद की जड़ बन गया।

⚠️ परिवार का आरोप: थाने में बेरहमी से पिटाई

अमित के परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उसे थाने में बंद कर बुरी तरह पीटा। उसके छोटे भाई सुमित, जो भारतीय सेना में तैनात हैं, का कहना है कि पुलिस ने अमित को थर्ड डिग्री दी। जब उसकी हालत बिगड़ गई और वह अधमरा हो गया, तब पुलिस उसे अस्पताल लेकर गई।

परिजनों का दावा है कि पुलिस ने उन्हें समय पर कोई जानकारी नहीं दी। रात करीब डेढ़ बजे फोन कर सिर्फ यह बताया गया कि अमित की तबीयत खराब है।

अमित के पिता सुभाष चौधरी का कहना है कि अगर उनका बेटा शराब पी रहा था, तो पुलिस उसे चालान कर सकती थी या कानूनी कार्रवाई कर सकती थी, लेकिन उसे पीटने का कोई अधिकार नहीं था। उनका आरोप है कि पुलिस अब इस मामले को सड़क हादसा बताकर दबाने की कोशिश कर रही है।

🚨 पुलिस का पक्ष: भागते समय ट्रक से टकराया

वहीं पुलिस की ओर से पूरी तरह अलग कहानी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, अमित को मेडिकल जांच के लिए मुरादनगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जा रहा था। इसी दौरान वह पुलिस की गाड़ी से उतरकर अचानक भागने लगा।

पुलिस का कहना है कि सड़क पार करते समय वह एक तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आ गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। इसके बाद उसे पहले स्थानीय अस्पताल और फिर हालत नाजुक होने पर यशोदा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह वेंटिलेटर पर है।

🎥 सीसीटीवी फुटेज ने बढ़ाया विवाद

इस मामले में दो सीसीटीवी फुटेज सामने आए हैं, जिनसे विवाद और गहरा गया है। एक फुटेज में दिखता है कि अस्पताल के बाहर पुलिस की गाड़ी रुकती है और अचानक एक युवक पीछे का दरवाजा खोलकर भाग जाता है।

दूसरे फुटेज में वही युवक गलियों में भागता नजर आता है और पीछे-पीछे पुलिसकर्मी दौड़ रहे हैं।

हालांकि, परिवार का आरोप है कि कई अहम सीसीटीवी फुटेज को पुलिस ने डिलीट कर दिया है, ताकि सच्चाई सामने न आ सके।

😡 गांव वालों का गुस्सा फूटा

जैसे ही घटना की जानकारी गांव में फैली, लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे बड़ी संख्या में ग्रामीण निवाड़ी थाने पहुंच गए और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

करीब 2 घंटे तक चले इस हंगामे में ग्रामीणों ने दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस दौरान कई स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार का समर्थन किया।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एसीपी मोदीनगर भास्कर वर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को शांत कराने की कोशिश की।

⚖️ पुलिस की कार्रवाई: 4 पुलिसकर्मी सस्पेंड

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी देहात सुरेंद्रनाथ तिवारी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 4 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। इनमें दो दरोगा—लोकेंद्र कुमार और शाहिद खान, हेड कांस्टेबल सचिन मोहन और सिपाही नरेंद्र शामिल हैं।

डीसीपी ने कहा कि प्रारंभिक जांच में पुलिसकर्मियों की लापरवाही और अवैध हिरासत की बात सामने आई है। विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

🏥 अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा अमित

अमित कुमार की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक, उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है और उसकी स्थिति नाजुक है। परिवार लगातार अस्पताल में मौजूद है और बेटे के ठीक होने की दुआ कर रहा है।

उठते सवाल

इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—

क्या पुलिस ने वाकई हिरासत में युवक के साथ मारपीट की?

अगर युवक भाग रहा था, तो सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?

क्या सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ हुई है?

क्या पुलिस अपनी गलती छिपाने के लिए हादसे की कहानी बना रही है?

इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएंगे।

🔍 आगे क्या?

फिलहाल इस मामले की जांच जारी है और पुलिस प्रशासन पर सच्चाई सामने लाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। यदि परिवार के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला पुलिसिया बर्बरता का एक बड़ा उदाहरण बन सकता है।

वहीं अगर पुलिस की बात सही निकलती है, तो यह घटना सुरक्षा में गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करती है।

गाजियाबाद का यह मामला सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम पर उठते भरोसे का सवाल है। एक तरफ परिवार इंसाफ की मांग कर रहा है, तो दूसरी तरफ पुलिस अपनी सफाई दे रही है। सच्चाई क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन फिलहाल इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

A major controversy has emerged in Ghaziabad after a youth named Amit Kumar was critically injured following alleged police brutality in custody. While police claim he was hit by a truck while trying to escape, the family alleges third degree torture inside Nivadi police station. The incident has sparked protests, leading to the suspension of four police officers. This Ghaziabad police custody case highlights serious concerns about police conduct, accountability, and human rights violations in India.

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