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हिमाचल में मानसून बना मुसीबत: 20 जून से तबाही का सिलसिला जारी?

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Date:

Himachal Pradesh Rain Havoc: 106 Dead, ₹818 Crore Loss Since June 20

हिमाचल में बारिश का कहर: 20 जून से अब तक 106 लोगों की मौत, 818 करोड़ की संपत्ति बर्बाद

AIN NEWS 1: हिमाचल प्रदेश में इस साल मानसून राहत नहीं, बल्कि मुसीबत बनकर आया है। 20 जून 2025 से लेकर अब तक प्रदेश में भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं ने आम लोगों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन प्राकृतिक आपदाओं के चलते अब तक 106 लोगों की जान जा चुकी है, और 818 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हो चुका है।

मानव जीवन पर सबसे बड़ा प्रभाव

जून के अंत से शुरू हुई बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक हर जगह पानी ही पानी नजर आ रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों के टूटने, पुलों के बह जाने और भूस्खलन की घटनाओं ने कई गांवों को मुख्य शहरों से काट दिया है। प्रभावित इलाकों में बिजली और पानी की आपूर्ति भी बाधित हो गई है।

हादसों में जान गंवाने वालों में अधिकतर लोग गांवों के निवासी हैं, जो या तो मकान गिरने से दबे या फिर तेज बहाव में बह गए। सरकार और एनडीआरएफ की टीमें लगातार राहत कार्य में लगी हैं, लेकिन दुर्गम इलाकों में पहुंचना अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

818 करोड़ रुपये का नुकसान: सरकारी और निजी संपत्तियां चपेट में

हिमाचल प्रदेश सरकार ने बताया है कि अब तक बारिश और बाढ़ से सरकारी इमारतों, सड़कों, पुलों, स्कूलों, अस्पतालों और व्यक्तिगत घरों को मिलाकर करीब 818 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है।

नुकसान का प्राथमिक आकलन:

सड़कें और पुल: सैकड़ों सड़कें क्षतिग्रस्त, कई पुल पूरी तरह ढहे।

सरकारी इमारतें: स्कूल, पंचायत भवन, पुलिस चौकियां प्रभावित।

निजी संपत्तियां: घर, दुकानें, खेत और बागान नष्ट।

बादल फटने की घटनाएं बनीं सबसे खतरनाक

इस सीजन में बादल फटने की घटनाएं बढ़ गई हैं। अकेले जुलाई के पहले दो हफ्तों में ही राज्य के कुल्लू, चंबा, मंडी और किन्नौर जिलों में 12 से ज्यादा बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इससे नदियों और नालों में अचानक आई बाढ़ ने गांवों को तहस-नहस कर दिया है।

राहत और बचाव कार्य: सीमित संसाधनों में बड़ा प्रयास

प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं। हेलिकॉप्टर से खाद्य सामग्री और दवाइयां पहुंचाई जा रही हैं, लेकिन खराब मौसम और टूटे हुए रास्तों के कारण कार्य में देरी हो रही है।

400 से अधिक गांव प्रभावित

1000 से ज्यादा लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए

50 से ज्यादा मेडिकल टीमें तैनात

पर्यटन को भी तगड़ा झटका

हिमाचल प्रदेश पर्यटन का प्रमुख केंद्र है, लेकिन मौजूदा स्थिति के कारण राज्य के पर्यटन उद्योग को बड़ा नुकसान हुआ है। होटल खाली पड़े हैं, ट्रैवल बुकिंग्स रद्द हो चुकी हैं और पर्यटक लौट चुके हैं।

स्थानीय लोगों की व्यथा

राज्य के मंडी जिले के निवासी सुरेश ठाकुर कहते हैं,

“हमने अपने खेत, घर और मवेशी सब कुछ खो दिया। सरकार से मदद की आस है, लेकिन अब तक केवल सर्वे टीम आई है।”

वहीं किन्नौर की रेखा देवी का कहना है,

“पहाड़ गिरने से हमारा घर टूट गया, बच्चे सुरक्षित हैं, ये सबसे बड़ी राहत है।”

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों को 4-4 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही जिनका घर या दुकान बर्बाद हुआ है, उन्हें प्राथमिकता पर राहत देने की बात कही गई है।

राज्य सरकार ने केंद्र से भी विशेष आर्थिक सहायता की मांग की है। केंद्रीय टीम जल्द ही स्थिति का जायजा लेने के लिए हिमाचल का दौरा कर सकती है।

देशभर में बारिश-बाढ़ की स्थिति पर नजर रखें

हिमाचल ही नहीं, देश के कई हिस्सों में इस बार मानसून ने कहर बरपाया है। उत्तराखंड, असम, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी बाढ़ और भूस्खलन से हालात गंभीर हैं।

यदि आप देशभर की बारिश और बाढ़ से जुड़ी अपडेट्स जानना चाहते हैं, तो इस लिंक पर क्लिक करें।

जरूरत है ठोस व्यवस्था की

प्राकृतिक आपदाएं रोकी नहीं जा सकतीं, लेकिन उनका प्रभाव कम किया जा सकता है। हिमाचल प्रदेश को इस प्रकार की आपात स्थितियों से निपटने के लिए बेहतर पूर्व-योजना, मजबूत आपदा प्रबंधन ढांचा और अधिक फंडिंग की सख्त आवश्यकता है।

सरकार और जनता, दोनों को मिलकर इस संकट से उबरने की दिशा में कदम उठाने होंगे।

Since June 20, Himachal Pradesh has been battling extreme monsoon weather, with heavy rainfall, flash floods, and cloudbursts wreaking havoc. The state has reported 106 fatalities and damage worth ₹818 crore to both government and private properties. This Himachal Pradesh rain disaster update provides a clear look at the destruction caused during the monsoon 2025 season and the broader impact of rain and floods across India.

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