AIN NEWS 1: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग से जुड़े एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह में तीन महिलाएं और दो पुरुष शामिल बताए जा रहे हैं। आरोप है कि ये लोग सुनियोजित तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनसे लाखों रुपये वसूलते थे।
कैसे काम करता था गिरोह?
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, इस गिरोह की महिलाएं सोशल मीडिया और फोन कॉल के जरिए लोगों से संपर्क करती थीं। पहले दोस्ती, फिर भरोसा और उसके बाद निजी मुलाकात का प्रस्ताव—यही इनका तरीका था।
जब कोई व्यक्ति मिलने के लिए तैयार हो जाता था, तो उसे किसी होटल, किराए के मकान या सुनसान जगह पर बुलाया जाता था। वहां पहले से ही गिरोह के अन्य सदस्य मौजूद रहते थे। मुलाकात के दौरान छिपे कैमरों या मोबाइल फोन से आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड किए जाते थे।
इसके बाद शुरू होता था असली खेल—ब्लैकमेलिंग।
वीडियो के जरिए वसूली
जैसे ही वीडियो रिकॉर्ड हो जाता, पीड़ित को धमकी दी जाती कि यदि उसने पैसे नहीं दिए तो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा या उसके परिवार को भेज दिया जाएगा। सामाजिक प्रतिष्ठा और बदनामी के डर से कई लोग चुपचाप पैसे दे देते थे।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने इसी तरह कई लोगों को निशाना बनाया। कुछ मामलों में पीड़ितों से बार-बार पैसे वसूले गए। रकम छोटी नहीं थी—कई मामलों में लाखों रुपये तक की मांग की गई।
शिकायत के बाद खुला मामला
यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक पीड़ित ने हिम्मत दिखाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उसने बताया कि उसे एक महिला ने दोस्ती के नाम पर मिलने बुलाया और बाद में वीडियो बनाकर पैसों की मांग की गई। लगातार धमकियों से परेशान होकर उसने कानून का सहारा लिया।
शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आई और तकनीकी जांच शुरू की। मोबाइल कॉल डिटेल, बैंक ट्रांजैक्शन और सोशल मीडिया चैट्स की जांच के बाद गिरोह तक पहुंच बनाई गई।
ऐसे हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने जाल बिछाकर आरोपियों को पकड़ने की योजना बनाई। एक टीम ने पीड़ित के साथ मिलकर आरोपियों से संपर्क बनाए रखा और तय जगह पर पहुंचने का प्लान किया। जैसे ही आरोपी पैसे लेने पहुंचे, पुलिस ने उन्हें मौके से गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों में तीन महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से मोबाइल फोन, कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इस गिरोह के तार किसी अन्य जिले या राज्य से तो नहीं जुड़े हैं।
क्या यह संगठित नेटवर्क है?
पुलिस को शक है कि यह सिर्फ स्थानीय गिरोह नहीं, बल्कि संभव है कि इससे बड़ा नेटवर्क काम कर रहा हो। साइबर क्राइम सेल को भी जांच में शामिल किया गया है। डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच से और खुलासे होने की संभावना है।
अधिकारियों का कहना है कि कई लोग बदनामी के डर से सामने नहीं आते, जिससे ऐसे गिरोहों का हौसला बढ़ता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर कोई इस तरह के जाल में फंसा है तो तुरंत शिकायत करे।
सोशल मीडिया बना हथियार
आज के समय में सोशल मीडिया जहां संवाद का जरिया है, वहीं अपराधियों के लिए एक नया प्लेटफॉर्म भी बन गया है। फर्जी प्रोफाइल, नकली नाम और आकर्षक तस्वीरों के जरिए लोगों को फंसाना आसान हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में ज्यादातर लोग भावनात्मक कमजोरी या अकेलेपन का शिकार होते हैं। अपराधी इसी मनोविज्ञान का फायदा उठाते हैं।
क्या रखें सावधानी?
अनजान लोगों से निजी जानकारी साझा न करें।
सोशल मीडिया पर मिले व्यक्ति से निजी मुलाकात से पहले पूरी जांच करें।
किसी भी तरह की ब्लैकमेलिंग होने पर तुरंत पुलिस से संपर्क करें।
डर या शर्म के कारण चुप न रहें।
याद रखें, अपराधी आपकी चुप्पी से मजबूत होते हैं। कानून आपके साथ है।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया। बैंक खातों और लेन-देन की भी जांच की जा रही है ताकि अवैध रूप से वसूली गई रकम का पता लगाया जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में और नाम सामने आते हैं तो आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
A major honey trap and blackmailing racket has been exposed in Khargone district of Madhya Pradesh, where police arrested five accused including three women. The gang allegedly used social media to lure victims, recorded objectionable videos during private meetings, and extorted large sums of money by threatening to leak the footage. The case highlights the growing threat of cyber crime, honey trap scams, and organized blackmailing networks in India. Authorities are investigating digital evidence and financial transactions to uncover the full extent of the operation.


















