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स्पेस स्टेशन से धरती पर कैसे होती है वीडियो कॉल? जानिए कौन सी टेक्नोलॉजी और नेटवर्क करते हैं काम

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AIN NEWS 1 | एयरफोर्स ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने जब इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पहुंचकर इतिहास रचा, तो पूरा देश गर्व से भर गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनसे अंतरिक्ष से वीडियो कॉल पर बात की। लेकिन इसी के साथ लोगों के मन में एक सवाल फिर से गूंजने लगा — अंतरिक्ष में मोबाइल नेटवर्क नहीं होते, फिर वीडियो कॉल कैसे संभव हो पाता है?

🌌 मोबाइल टावर नहीं, टेक्नोलॉजी का करिश्मा है ये

अंतरिक्ष में न हवा होती है, न मोबाइल टावर, और न ही इंटरनेट के तार। वहां वैक्यूम की स्थिति होती है, जहां सामान्य रेडियो या मोबाइल सिग्नल काम नहीं करते। फिर भी वैज्ञानिक स्पेस स्टेशन से लगातार धरती से संपर्क में रहते हैं — इसका श्रेय जाता है विज्ञान और सैटेलाइट नेटवर्क को।

🛰️ कैसे होता है स्पेस से धरती पर कम्युनिकेशन?

अंतरिक्ष में वीडियो कॉल या डाटा ट्रांसमिशन नासा के SCaN सिस्टम (Space Communication and Navigation) के जरिए होता है। यह सिस्टम कई लेयर में काम करता है:

  • ट्रांसमिटर: स्पेस स्टेशन पर मौजूद सिस्टम, जानकारी को रेडियोवेव में बदलते हैं।

  • रिले सैटेलाइट: ये सैटेलाइट धरती के ऊपर स्थिर रहते हैं और ट्रांसमिशन को ग्राउंड स्टेशन तक पहुंचाते हैं।

  • ग्राउंड स्टेशन: ये धरती पर फैले विशाल एंटीना होते हैं, जो सिग्नल रिसीव करके उसे डिकोड करते हैं।

🌍 पूरी दुनिया में फैले हैं नासा के ग्राउंड स्टेशन

नासा ने सातों महाद्वीपों पर विशाल एंटीना लगाए हैं जो ISS या किसी स्पेस मिशन से सीधे संपर्क करते हैं।

  • ये एंटीना करीब 230 फीट ऊंचे होते हैं।

  • इनसे 200 करोड़ मील दूर तक सिग्नल भेजे और रिसीव किए जा सकते हैं।

  • ये मुख्य रूप से रेडियोवेव्स पर आधारित होते हैं।

🔭 भविष्य की टेक्नोलॉजी: लेजर कम्युनिकेशन

नासा सिर्फ रेडियो सिग्नल पर नहीं रुका है। अब वह इन्फ्रारेड लेजर तकनीक पर काम कर रहा है।

  • ये तकनीक रेडियो सिग्नल से 100 गुना तेज डाटा भेज सकती है।

  • इससे भविष्य में स्पेस से वीडियो कॉल और लाइव डेटा ट्रांसफर और भी क्लियर और तेज होगा।

🔧 क्या कोई नेटवर्क ऑपरेटर वहां काम करता है?

नहीं, स्पेस स्टेशन पर कोई मोबाइल नेटवर्क नहीं चलता। वहां की संचार व्यवस्था पूरी तरह सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम पर निर्भर है। किसी भी मोबाइल सिम या टावर का वहां कोई रोल नहीं होता।

🧑‍🚀 स्पेस में सोना भी है चुनौती

शुभांशु शुक्ला ने अपनी बातचीत में बताया कि अंतरिक्ष में सबसे बड़ा चैलेंज है सोना। वहां की शून्यता और शरीर पर भार ना होने की स्थिति में नींद लेना भी आसान नहीं होता। लेकिन मानसिक शांति बनाए रखने से समझने की क्षमता बढ़ती है — यही उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया।

Have you ever wondered how astronauts make video calls from the International Space Station without mobile networks? The answer lies in NASA’s advanced space communication system (SCaN) which uses giant ground antennas, relay satellites, and radio waves to establish real-time contact with Earth. Indian Air Force Group Captain Shubanshu Shukla’s live video call from space once again highlighted this brilliant technology that makes communication from space to Earth seamless and secure.

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