बागपत में फौजी भाईचारे की मिसाल: शहीद हवलदार की बेटी की शादी में सैनिकों ने निभाई पिता की जिम्मेदारी
AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक ऐसी भावुक और प्रेरणादायक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके के लोगों की आंखें नम कर दीं। यहां एक बेटी की शादी में उसके पिता मौजूद नहीं थे, लेकिन भारतीय सेना के सैनिकों ने मिलकर उस कमी को इस तरह पूरा किया कि हर कोई भावुक हो उठा।
दरअसल, बागपत जिले के काठा गांव में रहने वाले हवलदार हरेंद्र सिंह भारतीय सेना की जाट रेजीमेंट में तैनात थे। साल 2020 में अरुणाचल प्रदेश में एक सड़क दुर्घटना में उनका निधन हो गया था। उनके अचानक चले जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। उस समय उनकी बेटी अभी छोटी थी और परिवार को यह चिंता भी थी कि भविष्य में उसकी शादी कैसे होगी।
लेकिन सेना के साथियों ने उस समय जो वादा किया था, उसे उन्होंने पूरी ईमानदारी से निभाया।
बेटी की शादी में फौज बन गई परिवार
समय बीतता गया और जब हवलदार हरेंद्र सिंह की बेटी की शादी तय हुई, तो परिवार में खुशी के साथ-साथ पिता की कमी भी महसूस हो रही थी। लेकिन शादी के दिन जो दृश्य देखने को मिला, उसने हर किसी का दिल छू लिया।
देश के अलग-अलग हिस्सों में तैनात सेना के कई जवान छुट्टी लेकर काठा गांव पहुंचे। ये सभी सैनिक दिवंगत हवलदार हरेंद्र सिंह के साथी थे। वे सिर्फ मेहमान बनकर नहीं आए थे, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह हर जिम्मेदारी निभाने के लिए आए थे।
शादी की तैयारियों से लेकर मेहमानों के स्वागत तक, हर काम में सैनिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने पूरे आयोजन की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली ताकि परिवार को किसी तरह की परेशानी न हो।
सैनिकों ने निभाई पिता की भूमिका
शादी के दिन जब बारात गांव पहुंची, तो सेना के जवानों ने आगे बढ़कर बारातियों का स्वागत किया। मंडप की व्यवस्था, रस्मों की तैयारी और सभी जरूरी व्यवस्थाओं में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।
सबसे भावुक पल तब आया जब शादी की रस्में शुरू हुईं। पिता की अनुपस्थिति में सैनिकों ने मिलकर वही जिम्मेदारी निभाई, जो आमतौर पर एक पिता निभाता है।
फेरों के समय सैनिक मंडप के पास खड़े रहे और बेटी का हौसला बढ़ाते रहे। कन्यादान की रस्म में भी उन्होंने परिवार का सहारा बनकर पूरा सहयोग दिया।
जब दुल्हन की विदाई का समय आया, तो माहौल बेहद भावुक हो गया। सैनिकों की आंखों में भी आंसू थे, क्योंकि वे अपने साथी की बेटी को विदा कर रहे थे। गांव के लोगों ने भी इस दृश्य को देखकर सेना के भाईचारे की जमकर सराहना की।
कन्यादान में सैनिकों का योगदान
सैनिकों ने सिर्फ भावनात्मक सहयोग ही नहीं दिया, बल्कि आर्थिक रूप से भी परिवार का साथ निभाया। बताया जाता है कि सैनिकों ने मिलकर लाखों रुपये की राशि कन्यादान के रूप में दी, ताकि शादी अच्छे से संपन्न हो सके।
यह कदम इस बात का प्रतीक था कि सेना में साथ काम करने वाले साथी सिर्फ सहकर्मी नहीं होते, बल्कि एक परिवार की तरह होते हैं।
गांव में चर्चा का विषय बनी घटना
काठा गांव में हुई यह शादी अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने ऐसा भाईचारा पहले कभी नहीं देखा।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिस तरह सैनिकों ने अपने दिवंगत साथी के परिवार का साथ दिया, वह समाज के लिए एक बड़ी मिसाल है।
गांव के कई लोगों ने कहा कि सेना के जवान सिर्फ देश की सीमाओं की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि इंसानियत और रिश्तों की भी मिसाल पेश करते हैं।
सेना का भाईचारा क्यों होता है खास
भारतीय सेना में काम करने वाले सैनिक अक्सर एक दूसरे के साथ कठिन परिस्थितियों में रहते हैं। सीमाओं पर तैनाती के दौरान वे कई मुश्किल हालातों का सामना करते हैं।
इसी वजह से उनके बीच आपसी भरोसा और भाईचारा बहुत मजबूत हो जाता है। जब कोई सैनिक शहीद हो जाता है या किसी कारण से दुनिया छोड़ देता है, तो उसके साथी उसके परिवार को अकेला नहीं छोड़ते।
बागपत की यह घटना इसी परंपरा का एक उदाहरण है, जहां सैनिकों ने अपने साथी की बेटी की शादी को अपना पारिवारिक कर्तव्य समझकर पूरा किया।
समाज के लिए एक संदेश
यह घटना सिर्फ एक शादी की कहानी नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक मजबूत संदेश भी है। यह बताती है कि रिश्ते सिर्फ खून के नहीं होते, बल्कि विश्वास और जिम्मेदारी से भी बनते हैं।
भारतीय सेना के जवानों ने यह साबित कर दिया कि अगर किसी परिवार पर मुश्किल आती है, तो वे उसके साथ खड़े रहते हैं।
काठा गांव की यह कहानी अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है और लोग सेना के इस भाईचारे की जमकर सराहना कर रहे हैं।
एक पिता का अधूरा सपना पूरा हुआ
हालांकि हवलदार हरेंद्र सिंह अपनी बेटी की शादी देखने के लिए इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनके साथियों ने यह सुनिश्चित किया कि उनकी बेटी की शादी पूरे सम्मान और खुशी के साथ हो।
शादी के दिन ऐसा महसूस हो रहा था जैसे पूरी फौज उस बेटी के पिता बनकर उसके साथ खड़ी है।
यही कारण है कि यह घटना लोगों के दिलों को छू रही है और भारतीय सेना के मानवीय चेहरे को दुनिया के सामने ला रही है।
A heart-warming incident from Baghpat, Uttar Pradesh highlights the strong brotherhood of the Indian Army. Soldiers of the Jat Regiment came together to perform the role of a father at the wedding of their late colleague Havildar Harendra Singh’s daughter. Harendra Singh died in a road accident in Arunachal Pradesh in 2020 while serving in the Indian Army. His fellow soldiers travelled from different parts of India to attend the wedding, manage the arrangements, perform key rituals, and support the family emotionally and financially. The touching gesture reflects the deep bond among Indian soldiers and shows how the army stands with the families of their comrades even after their sacrifice.


















