AIN NEWS 1: दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने आम आदमी पार्टी (AAP) से इस्तीफा दे दिया और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा लेने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने इस्तीफे की वजह पार्टी के अंदरूनी संघर्ष और जनता के प्रति वादों को पूरा न कर पाने को बताया है।
कैलाश गहलोत ने अपनी resignation letter में दिल्ली सरकार के कार्यों पर खेद जताया। उन्होंने खास तौर पर यमुना नदी के सफाई के वादे और शीशमहल विवाद का उल्लेख किया, जिनसे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है।
1. यमुना सफाई का वादा अधूरा रहा
कैलाश गहलोत ने अपने पत्र में लिखा, “यमुना नदी को साफ करने का वादा हम ने किया था, लेकिन यह वादा अब तक पूरा नहीं हो सका है। आज यमुना नदी शायद पहले से भी ज्यादा गंदी हो गई है।” उन्होंने कहा कि यह विफलता पार्टी की छवि पर बुरा असर डाल रही है।
2. शीशमहल विवाद और आंतरिक विवाद
गहलोत ने शीशमहल विवाद को भी अपनी इस्तीफे की एक वजह बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के विवादों ने पार्टी के मूल उद्देश्यों और जनता के प्रति वादों को संदेहास्पद बना दिया है। “अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या हम आम आदमी पार्टी के मूल विचारों में विश्वास रखते हैं?” उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं जनहित से ऊपर हो गई हैं।
3. पार्टी के राजनीतिक एजेंडे से निराश
गहलोत ने आगे लिखा, “पार्टी के भीतर की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं ने लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने की जगह अपने राजनीतिक एजेंडों को प्राथमिकता दे दी है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस कारण से दिल्ली के नागरिकों को बुनियादी सेवाएं देने में भी पार्टी को दिक्कतें आ रही हैं।
4. पार्टी से हटने का निर्णय
कैलाश गहलोत ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत दिल्ली की जनता की सेवा करने के वादे से की थी, लेकिन अब उन्होंने महसूस किया कि यह संभव नहीं है। उन्होंने कहा, “दिल्ली सरकार का ज्यादातर समय केंद्र के साथ संघर्ष में बीत रहा है, जो कि दिल्ली के विकास के लिए ठीक नहीं है।” इसके बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
5. पार्टी को भविष्य के लिए शुभकामनाएं
अपने इस्तीफे के पत्र में गहलोत ने अरविंद केजरीवाल और पार्टी के सभी सहयोगियों को धन्यवाद दिया और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।
इस इस्तीफे से दिल्ली की राजनीति में एक नया मोड़ आ सकता है, क्योंकि कैलाश गहलोत को पार्टी के एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली मंत्री के रूप में देखा जाता था।