Maharashtra Kanifnath Mela Controversy: Muslims Entry Ban Sparks Political Debate
महाराष्ट्र का कानिफनाथ मेला विवाद: मुस्लिमों की एंट्री बैन पर गरमाई सियासत
AIN NEWS 1: महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित कानिफनाथ महाराज मंदिर हर साल एक बड़े मेले का आयोजन करता है, जहां हजारों श्रद्धालु जुटते हैं। इस बार यह धार्मिक आयोजन अपनी परंपराओं से ज्यादा मुस्लिम समुदाय की एंट्री बैन को लेकर विवादों में घिर गया है।
क्या है पूरा मामला?
मढ़ी गांव में लगने वाला कानिफनाथ मेला सनातनी परंपराओं से जुड़ा हुआ है। स्थानीय लोगों और संत समाज का कहना है कि यह मेला पूरी तरह से धार्मिक परंपराओं के तहत आयोजित किया जाता है, जिसमें उन्हीं लोगों को शामिल होना चाहिए जो इन नियमों का पालन करें।
मुस्लिमों की एंट्री पर आपत्ति क्यों?
इस बार कुछ स्थानीय संतों और संगठनों ने मांग उठाई कि मुस्लिम समुदाय के लोगों को मेले में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाए।
उनका तर्क है कि –
मुस्लिम श्रद्धालु मेले की धार्मिक परंपराओं का पालन नहीं करते।
कुछ मुस्लिम दुकानदार मेले में मांसाहारी भोजन बेचते हैं, जो यहां की धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है।
इससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं।
हालांकि, मुस्लिम व्यापारी और श्रद्धालु इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे सालों से मेले में हिस्सा लेते आए हैं और कभी कोई विवाद नहीं हुआ।
ओवैसी ने जताई आपत्ति
इस मामले में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि –
“यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 17 का उल्लंघन है और सामाजिक बहिष्कार की श्रेणी में आता है।”
उन्होंने सवाल किया कि अगर धार्मिक मान्यताओं के पालन की शर्त सभी पर लागू है, तो फिर हिंदू दुकानदारों पर यह नियम क्यों नहीं लगाया जा रहा?
क्या कहता है प्रशासन?
स्थानीय प्रशासन ने दोनों पक्षों से बातचीत शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वे ऐसा हल निकालने की कोशिश कर रहे हैं जिससे –
मेले की परंपरा बनी रहे।
किसी समुदाय के साथ भेदभाव न हो।
हालांकि, ओवैसी के बयान के बाद मामला अब राजनीतिक रंग लेने लगा है।
पहली बार नहीं उठा ऐसा मुद्दा
धार्मिक आयोजनों में मुस्लिमों की एंट्री को लेकर विवाद नया नहीं है। हाल ही में महाकुंभ 2025 में भी कुछ साधु-संतों ने मुस्लिमों के प्रवेश पर सवाल उठाए थे।
हालांकि, महाकुंभ से एक सकारात्मक कहानी भी सामने आई। प्रयागराज के शराफत नाम के चाय विक्रेता ने बताया कि उन्होंने कुंभ के दौरान 44 दिनों में करीब 9 लाख रुपये की कमाई की।
नतीजा क्या होगा?
फिलहाल कानिफनाथ मेले का विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। जहां एक ओर धार्मिक परंपराओं का पालन जरूरी बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे सांप्रदायिक भेदभाव का मामला माना जा रहा है।
स्थानीय प्रशासन की कोशिश है कि मामला जल्द से जल्द सुलझ जाए ताकि मेले की परंपरा बनी रहे और किसी समुदाय की भावनाएं आहत न हों।
The Kanifnath Mela controversy in Maharashtra has sparked a political debate after local organizations demanded a ban on Muslims’ entry citing religious traditions. The decision has drawn criticism from AIMIM leader Asaduddin Owaisi, who called it a violation of Article 17 of the Indian Constitution. The dispute has now become a sensitive issue, with the administration trying to resolve the matter amicably. This incident highlights the ongoing religious tensions in Maharashtra amid growing communal divides.